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हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ शुरू हुए जंग में अमेरिका लगभग जीत चुका है। लेकिन ईरान की तरफ से यह बयान आया है कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अगर जिंदा हैं तो फिर ईरान उन्हें खोजकर मारेगा। इस हथियार संग जुबानी जंग ने फिलहाल वैश्विक राजनीति को अस्थिर कर दिया है।
कुछ विद्वानों का मत है कि अमेरिका (America) का इस जंग में उलझना, सिर्फ ट्रम्प के सनक भरे निर्णयों का परिणाम है। एक तरफ ट्रम्प यह बयान दे रहे हैं कि अमेरिका इस लड़ाई में जीत रहा है वहीं दूसरी तरफ चीन,जापान, इटली, जैसे देशों ने अमेरिका के साथ जाने से साफ-साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में ट्रम्प ने इस युद्ध के लिए कितने फैसले लिए जो गलत साबित हुए आइए उनको समझते हैं-
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को शुरू में ऐसा लगा कि ईरान महज कुछ दिनों युद्ध में उलझने के बाद आत्मसमर्पण कर देगा परंतु ऐसा नहीं हुआ। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध लंबा खींचते दिखाई दे रहा है। ईरान के साथ युद्ध के लिए ट्रंप बयान पर बयान दिए जा रहे हैं कि ईरान के प्रमुख ठिकानों पर हमला किया जा चुका है। ईरान अब कुछ ही दिन में आत्मसमर्पण कर देगा।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Supreme Leader Mojtaba Khamenei) को लेकर ट्रंप ने बयान दिया कि ईरान के लोगों के लिए सुप्रीम लीडर को आत्मसमर्पण कर देना चाहिए। नतीजा कुछ और ही दिखाई दे रहा है, यह युद्ध काफी लंबे समय तक खींच सकता है, क्योंकि ईरान फिलहाल किसी आत्मसमर्पण की स्थिति में नहीं दिखाई दे रहा है।
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक ट्रम्प ने अमेरिका की खुफिया एजेंसी की बात नहीं मानी थी। दरअसल,अमेरिका की खुफिया जांच एजेंसी सीआईए (CIA) ने ट्रंप को दो प्रकार के रिपोर्ट दिए थे। पहला यह था कि हवाई हमले से जरूरी नहीं है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो ही जाए। सीआईए ने यह भी कहा था कि अमेरिका के हमला करने से अगर सत्ता में त्वरित परिवर्तन नहीं होता है तो ईरान में इस्लामिक राज्य और मजबूत स्थिति में आ जाएगा और यह अमेरिका के लिए भविष्य में एक खतरा बन जाएगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने सीआईए के रिपोर्ट के आधार पर मिली सलाह को नजरंदाज किया और युद्ध में कूद पड़े।
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डोनाल्ड ट्रम्प ने जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को 28 फरवरी 2026 को मारने की पुष्टि की तो पूरी दुनिया को लगा कि अमेरिका का एकतरफा राज चलेगा। परंतु धीरे-धीरे कुछ राष्ट्रों ने अमेरिका के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। अरब देशों में अमेरिका के प्रभाव काफी समय से दिख रहे थे परंतु अरब देश भी अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं। यह बात ट्रम्प ने स्वयं स्वीकार की है कि स्थानीय देशों को इस युद्ध पर विचार करना चाहिए कि उनके लिए अमेरिका लड़ रहा है। ट्रम्प ने तो यहाँ तक बोल दिया कि अमेरिका के पास पेट्रोलियम के अन्य बहुत सारे संसाधन हैं। जिन देशों को जरूरत है उन्हें इसपर विचार करना चाहिए।
जबसे से ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू हुआ है, अमेरिका के राष्ट्रपति कुछ न कुछ बयान दिए जा रहे हैं जिससे उनकी छवि को एक हालके नेता के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, आयतुल्ला खामेनेई को मारने के बाद ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के सैनिकों को इस युद्ध में बहुत मज़ा आ रहा है। ईरान के युद्धपोत डुबोने वाली घटना पर भी ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के सैनिकों को मारने मे नहीं बल्कि डुबोने में मजा आ रहा है। हाल ही ट्रम्प ने फिर कहा है कि उनको और सैनिकों को इस युद्ध में मजा आ रहा है और मजे लेने के लिए ईरान के ऊपर अमेरिका आगे भी मिसाइल दाग सकता है।
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ट्रम्प शुरू से ही इस भ्रम में थे कि ईरान को भी वेनेजुएला की तरह समझा दिया जाएगा। ट्रम्प की दुविधा भरी सोच ने उनको युद्ध के ऐसे बीच सागर में ला खड़ा किया है कि वह न इस पार जाने लायक बचे हैं, न उस पार जाने लायक बचे हैं। मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनते ही उन्होंने कहा था कि युद्ध कुछ ही दिन में खत्म होने वाला है, फिर दूसरे दिन कहते हैं कि युद्ध कई हफ्ते और कई महीने भी जारी रह सकता है। इतना अस्थिर दिमाग वाला नेता अपने आपको इस युद्ध में इन्हीं कारणों से उलझा लिया।
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