भारत-चीन तनाव और 2020 के गलवान बाद लगे प्रतिबंधों के बावजूद भारत सरकार ने चार चीनी कंपनियों TBEA, नानजिंग इलेक्ट्रिक, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक और ताइकाई इलेक्ट्रिक को अस्थायी छूट दी है।  AI
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चीन के आगे झुकी भारत सरकार? 4 चीनी कंपनियों को मिली बड़ी छूट, जानिए पूरा मामला

भारत-चीन तनाव के बीच चार चीनी ऊर्जा कंपनियों को भारत में अस्थायी छूट, हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर और जीआईएस आपूर्ति संकट से निपटने के लिए सरकार का रणनीतिक कदम

Author : Pradeep Yadav

  • भारत-चीन तनाव और 2020 के गलवान बाद लगे प्रतिबंधों के बावजूद भारत सरकार ने चार चीनी कंपनियों TBEA, नानजिंग इलेक्ट्रिक, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक और ताइकाई इलेक्ट्रिक को अस्थायी छूट दी है। पावर ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर व GIS उपकरणों की कमी के कारण यह रणनीतिक कदम उठाया गया, जिसे सरकार स्थायी नजीर नहीं मानने को कह रही है।

भारत और चीन के बीच रिश्तों की कड़वाहट का मामला जगजाहिर है। लेकिन भारत सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे चीन की चार कंपनियों के लिए भारत में द्वार खोल दिए गए हैं। ये फैसले ऐसे वक्त में लिए गए हैं जब भारत-चीन के बीच तनाव बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला और किन कंपनियों को मिली छूट

दरअसल, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की तरफ से यह विशेष छूट दी गई है। भारत सरकार की तरफ से चीन की जिन चार कंपनियों को यह विशेष छूट दी गई है, उनके नाम हैं-टीबीईए एनर्जी इंडिया (TBEA Energy India), नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया (Nanjing Electric India), न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया (New Northeast Electric India) और ताइकाई इलेक्ट्रिक इंडिया (Taikai Electric India)।

एक तरफ जहां भारत आत्मनिर्भर बनने और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि यह महज कुछ समय विशेष के लिए दी गई छूट है। चूंकि ये चारों कंपनियां पहले से ही भारत में काम कर रही थीं, इसलिए भारत के ऊर्जा क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए इन कंपनियों को कुछ समय के लिए विशेष छूट प्रदान करना सरकार की तरफ से एक रणनीतिक कदम है।

साल 2020 में लगा था प्रतिबंध

साल 2020 में गलवान घाटी में हुई वारदात के बाद चीन की कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए कूटनीतिक फैसला लिया गया था। 23 जुलाई 2020 को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की तरफ से यह फैसला लिया गया था कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों (Countries sharing a land border with India) की कंपनियां भारत सरकार, राज्य सरकारों या सरकारी स्वायत्त निकायों की सार्वजनिक खरीद टेंडर में सीधे तौर पर शामिल नहीं हो सकती हैं।

इस नियम के लागू होने से पहले ही चीन की ये चार कंपनियां भारत में काफी निवेश कर चुकी थीं। इन कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भारत में ही मौजूद हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर भारत सरकार ने इन कंपनियों को छूट देकर वर्तमान की समस्या का निदान ढूंढने का प्रयास किया है।

क्या थी मजबूरी, जिससे चीनी कंपनियों को मिली मंजूरी

बता दें कि भारत में इस समय पावर ग्रिड और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) पर बहुत तेजी से काम करने की जरूरत है। इसके लिए हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर्स (High-Voltage Transformers) और गैस-इंसुलेटेड स्विचगियर (Gas-Insulated Switchgear - GIS) जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की आवश्यकता है। पूरे देश में इस समय इनकी मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है, लेकिन घरेलू स्तर पर आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही है।

सरकार का कहना है कि भारत की घरेलू कंपनियां मांग के अनुसार समय पर आपूर्ति करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसलिए इस काम को समय पर पूरा करने के लिए चीन की कंपनियों का सहारा लिया जा रहा है। सरकार का साफ कहना है कि इसे भविष्य की नजीर न माना जाए, बल्कि यह घरेलू कंपनियों को एक सहारा दिया जा रहा है ताकि वो तय समय में खुद को इसके लिए तैयार कर सकें।

कूटनीति पर उठते सवाल और सरकार का पक्ष

इस फैसले के बाद कुछ जानकारों का सवाल है कि क्या सरकार कूटनीतिक लड़ाई में चीन के आगे पस्त हो चुकी है, जिसके कारण चीनी कंपनियों को रियायत मिल रही है? वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि यह फैसला महज कुछ समय के लिए लिया गया है और भारत सरकार राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ही सारे फैसले ले रही है।

बता दें कि हाल ही में 22-23 जून 2026 को 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (BRICS NSA Meeting) की मीटिंग भारत में हुई। मीटिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात हुई। इसके ठीक बाद, 24 जून 2026 को चीनी कंपनियों को छूट देने का ऐलान किया गया।

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