बतौर PM नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे, नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा, लेकिन इन 5 मामलों में अब तक फ्लॉप रही BJP सरकार!

केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बने 12 साल का लंबा समय बीत चुका है। इस दौरान प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपना 12 साल का कार्यकाल पूर्ण कर लिया है।
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प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपना 12 साल का कार्यकाल पूर्ण कर लिया है। प्रधानमंत्री के रूप में इतनी लंबी अवधि तक देश का नेतृत्व कर उन्होंने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है। कार्यकाल के इस ऐतिहासिक मामले में उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। साल 2014 में देश के अंदर आम लोकसभा चुनाव के समय मोदी ने वादा किया था कि विदेशों से काला धन वापस लाकर सबके खाते में 15-15 लाख रुपये भेजे जाएंगे। लेकिन सरकार के 12 साल बीत जाने के बाद अभी तक आम जनता के खाते में यह 15 लाख रुपये नहीं आए हैंNewsGram
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केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बने 12 साल का लंबा समय बीत चुका है। इस दौरान प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपना 12 साल का कार्यकाल पूर्ण कर लिया है। प्रधानमंत्री के रूप में इतनी लंबी अवधि तक देश का नेतृत्व कर उन्होंने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है। कार्यकाल के इस ऐतिहासिक मामले में उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं में इस उपलब्धि को लेकर भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। देश के विभिन्न हिस्सों में बहुत सारे कार्यकर्ता मंदिरों में पहुंचे, जहाँ उन्होंने अपने नेता के लिए भगवान से विशेष आशीर्वाद मांगा और उनके दीर्घायु होने की कामना की। हालांकि, इसी बीच उनके 12 साल का कार्यकाल पूर्ण होने पर उनके द्वारा किए गए कार्यों की देश भर में समीक्षा भी हो रही है, और राजनीतिक आलोचकों ने उनके फैसलों की अलग-अलग तरीके से आलोचना भी की है।

15 लाख का वादा क्या जुमला था ?

साल 2014 में देश के अंदर आम लोकसभा चुनाव हुआ, जो भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इन चुनावों में बीजेपी को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही देश के अंदर राजनीति का एक बिल्कुल अलग माहौल तैयार किया गया।

अपने चुनावी अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लोगों से अपील करते हुए एक वादा किया था कि विदेशों से काला धन वापस लाकर सबके खाते में 15-15 लाख रुपये भेजे जाएंगे। लेकिन सरकार के 12 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक आम जनता के खाते में यह 15 लाख रुपये नहीं आए हैं, जिसे लेकर विपक्ष आज भी सरकार पर हमलावर रहता है।

नोटबंदी का देश पर असर !

8 नवंबर 2016 की रात 8:00 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक देश के नाम संबोधन में नोटबंदी का ऐतिहासिक ऐलान किया था। उन्होंने दावा किया था कि इस कदम से देश के भीतर जमा सारा काला धन पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इस फैसले के बाद देश की आम जनता बहुत दिनों तक बैंकों और एटीएम की कतारों में खड़ी रही।

इसी बीच सरकार द्वारा दो हजार रुपये का नया नोट जारी किया गया। बहुत सारे अर्थशास्त्रियों के अनुसार, दो हजार का नोट जारी करना देश के लिए एक नई मुसीबत बन गया। जानकारों का मानना है कि काला धन छुपाने के लिए दो हजार का नोट अधिक अनुकूल साबित हुआ और इससे कालाबाजारी और बढ़ गई। नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा।

किसान कानून जो सरकार को महंगा पड़ा !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साल 2020 में तीन नए कृषि कानून लाए गए थे। इन कृषि कानूनों का पूरे देश में, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जमकर विरोध हुआ। शुरुआत में सरकार इन कानूनों को वापस लेने या झुकने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, लेकिन किसानों का आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर लगातार बढ़ता जा रहा था। भारी और चौतरफा विरोध होने के कारण अंततः सरकार को अपना यह बड़ा फैसला वापस लेना पड़ा। 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने खुद टीवी पर सार्वजनिक घोषणा करते हुए देश को जानकारी दी कि सरकार अपना फैसला वापस लेती है। इस तरीके से सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े।

'फास्ट ट्रैक डिप्लोमेसी' और पड़ोसी मुल्कों में उठते विरोध के स्वर

साल 2014 में जब मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब भारत की विदेश नीति में व्यापक स्तर पर परिवर्तन की बात बोली गई थी। साल 2014 में मोदी सरकार की विदेश नीति को 'फास्ट ट्रैक डिप्लोमेसी' (Fast-Track Diplomacy) का नाम दिया गया। अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत सारी सफल विदेश यात्राएं भी कीं।

लेकिन हाल-फिलहाल के वैश्विक घटनाक्रमों और रणनीतिक मोर्चों पर विफलता के कारण उनके ऊपर बहुत सारे सवाल खड़े होने लगे हैं। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए हालिया तख्तापलट के घटनाक्रम पर भारत की तरफ से कुछ खास रणनीतिक कदम नहीं उठाए जाने पर सरकार की विदेश नीति पर कई सवाल खड़े हुए। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के बयानों पर मोदी की चुप्पी कई सवालों को खड़ा करती है।

सितंबर 2023 मालदीव में चुनाव के समय 'INDIA GO BACK' (इंडिया गो बैक) का नारा जोर-शोर से दिया गया, जो दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट को दर्शाता है। वहीं, भारत के पारंपरिक पड़ोसी मुल्क नेपाल और श्रीलंका के संबंध हाल के वर्षों में चीन से काफी मजबूत हुए हैं। चीन का 'सिल्क रोड' (Belt and Road Initiative) प्रोजेक्ट आज भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक और सुरक्षा चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।

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