भारतीय लिबरल पार्टी के अध्यक्ष डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा है, भारत को नए भगत सिंह और नए सुभाष चंद्र बोस की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान की राजनीतिक व्यवस्था में आम आदमी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।  X
राष्ट्रीय

‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, BLP अध्यक्ष ने फैसले पर उठाए सवाल

किताब के एक अध्याय में सर्वोच्च न्यायालय के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए एनसीईआरटी को फटकार लगाई।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • 24 फरवरी 2026 को जारी कक्षा 8 की संशोधित सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट) में भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया, जिस पर देशभर में विवाद खड़ा हो गया।

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी फटकार लगाई और इसे न्यायपालिका की गरिमा व संस्थागत अधिकार को कमजोर करने वाला बताया। कोर्ट ने किताब की राष्ट्रव्यापी जब्ती, डिजिटल प्रतियों को हटाने और प्रकाशन-वितरण पर रोक के आदेश दिए।

  • केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सुधार का आश्वासन दिया, जबकि विपक्षी नेताओं ने न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। अंततः एनसीईआरटी ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगते हुए विवादित अध्याय हटाने की घोषणा की।

एनसीईआरटी के संशोधित संस्करण को लेकर मचे बवाल के बाद अंततः सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने माफी मांगते हुए किताब से उस अध्याय को हटाने की बात की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्टाचार की बात की है। एनसीईआरटी ने जब किताब में सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्टाचार की बात की तो बहुत सारे लोगों ने इसके प्रतिक्रिया में अपने बयान दिए।

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, एनसीईआरटी (NCERT) ने 24 फरवरी 2026 को कक्षा 8 की किताब का नया संस्करण जारी किया। इस किताब के बाजार में आने के बाद बवाल मच गया। किताब के एक अध्याय में सर्वोच्च न्यायालय के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए एनसीईआरटी (NCERT) को फटकार लगाई।  सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी पुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की और संबंधित सामग्री पर रोक लगा दी। 

सीजेआई (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा-8 (भाग-2) के लिए सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक और संबंधित शीर्षक का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामले की सुनवाई करते हुए व्यापक निर्देश जारी किए, जिसमें पाठ्यपुस्तक की तत्काल राष्ट्रव्यापी जब्ती, डिजिटल प्रतियों को हटाना और इसके प्रकाशन या वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली सहित पीठ ने प्रथम दृष्टया यह राय व्यक्त की कि यह "न्यायपालिका के संस्थागत अधिकार को कमजोर करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास" दर्शाता है और चेतावनी दी कि इस तरह की बातों को बिना रोक-टोक के जारी रहने देने से जनता का विश्वास कम हो जाएगा।

यह भी पढ़ें:सिर्फ कपड़ा नहीं, पहचान है साड़ी...सिंधु घाटी से आज तक कैसे बदलते दौर में भी नारी की खूबसूरती को निखारती रही

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं 

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जैसे ही यह मामला मेरे संज्ञान में आया, मैंने तुरंत एनसीईआरटी को सुधार के कदम उठाने और यह पक्का करने का निर्देश दिया कि ऐसा मुद्दा दोबारा न उठे। न्यायतंत्र का अपमान करना सरकार का मकसद नहीं था। हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जांच की जाएगी।

वहीं दिल्ली में भारतीय लिबरल पार्टी (BLP) के अध्यक्ष डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा (Munish Kumar Raizada) ने कहा है कि निचली अदालत में जाने पर भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष दर्शन होता है। उन्होंने कहा कि आपराधिक मामले अदालत में सालों से अटके पड़े हैं, फिर भी इस चीज को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। एनसीईआरटी (NCERT) को  माफी मांगने से पहले ऐसे सवालों को उठाने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को एक नए क्रांति की जरूरत है। भारत को नए भगत सिंह और नए सुभाष चंद्र बोस की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान की राजनीतिक व्यवस्था में आम आदमी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। 

हालांकि एनसीईआरटी (NCERT) ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगते हुए कहा है कि किताब से उस उस अध्याय को हटा दिया जाएगा जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है।