बिहार में महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल: कक्षा 12वीं की परीक्षा कवर कर रही एक महिला रिपोर्टर के साथ छात्रों द्वारा बदसलूकी और धक्का देने की कोशिश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। यह घटना महिला पत्रकारों के प्रति असुरक्षित माहौल को उजागर करती है।
महिलाओं और पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते अपराध: NCRB 2023 के अनुसार बिहार में महिलाओं के खिलाफ 22,952 अपराध दर्ज हुए। कटिहार में महिला पत्रकार से छेड़खानी, पटना में कथित किडनैप प्रयास जैसे मामले बताते हैं कि पत्रकारिता, खासकर महिलाओं के लिए, लगातार जोखिम भरा कार्य बनता जा रहा है।
देशभर में पत्रकारों पर हमले लोकतंत्र के लिए खतरा: गौरी लंकेश, नरेंद्र दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और बृजेश गुप्ता जैसी हत्याएं दिखाती हैं कि पत्रकारों को निशाना बनाया गया है और कई मामलों में अब तक न्याय अधूरा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मीडिया को माना जाता है। मीडिया पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार पक्षपात करने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ समय समय पर पत्रकारों के साथ कुछ बदसलूकी होते दिखाई दिए हैं। महिला पत्रकारों की सुरक्षा भी एक अहम् मुद्दा बना हुआ है। इसी बीच बिहार से एक खबर निकलकर आ रही है। खबर यह है कि एक महिला रिपोर्टर के साथ कुछ छात्रों को असभ्य हरकतें करते हुए देखा गया। जब छात्रों से महिला रिपोर्टर सवाल कर रही थी तो कुछ छात्रों ने महिला को गलत तरीके से धक्का देने का प्रयास किया। बाद में महिला पत्रकार छात्रों पर भड़क गई।
दरअसल, बिहार राज्य में कक्षा 12 वीं के बोर्ड परीक्षा चल रही है। परीक्षा से सम्बंधित सवालों के साथ एक महिला पत्रकार छात्रों से रूबरू हो रही थी। इसी बीच कुछ छात्र, महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी करते नज़र आ रहे थे। कुछ छात्रों ने महिला पत्रकार को पीछे से धकेलने का भी प्रयास किया। इस घटना के बाद महिला पत्रकार (Reporter) छात्रों पर भड़क गई। मामले से सम्बंधित घटना सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। हालांकि इस वायरल घटना की पुष्टि न्यूज़ग्राम की तरफ से फिलाहल नहीं की जा रही है।
बिहार मे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल बने हुए हैं। महिलाओं से सम्बंधित विवाद बिहार में आज के समय आम बात हो गई है। अभी कुछ दिन पहले ही पटना में एक नीट छात्रा की घटना ने सबको चौंका दिया था। ये मामला अभी भी शांत नहीं हुआ है। बिहार में महिलाओं के साथ छेड़खानी तथा अन्य विवाद बढ़ते जा रहे हैं। एनसीआरबी (NCRB) 2023 की रिपोर्ट में बिहार राज्य में कुल “महिलाओं के खिलाफ अपराध” की संख्या लगभग 22,952 थी। ये आंकड़े ऐसे हैं जो आधिकारिक तौर पर दर्ज़ शिकायतें हैं। बिहार की हालत ऐसी है कि वहां अपने ऊपर हो रहे शोषण के खिलाफ शिकायत भी दर्ज़ नहीं हो पाती है। पिछले 20 सालों से राजग( भाजपा समर्थित ) सरकार है। राजग (NDA) सरकार का नेतृत्व कर रहे नितीश कुमार (Nitish Kumar) के 20 सालों के राज में बिहार के कानून व्यवस्था में सुधार का दावा केवल फाइलों तक सीमित रहा। धरातल पर हाल ये है कि बिहार अभी भी भ्र्ष्टाचार, दहशतगर्दी, गुंडों-माफियाओं का केंद्र बना हुआ है।
यह भी पढ़ें :दिल्ली के अस्पतालों में हाहाकार! डॉक्टर और स्टाफ की कमी पर केंद्र के आंकड़ों ने खोली पोल
बिहार में महिलाओं के लिए पत्रकारिता बहुत मुश्किल काम है। बिहार की कानून व्यवस्था पूरी तरीके से ध्वस्त है। साल 2025 में कटिहार में एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का मामला चर्चा में आया था। महिला पत्रकार ने अपने एम डी (MD) के खिलाफ छेड़खानी का आरोप लगते हुए पुलिस के पास शिकायत दर्ज़ कराई थी। साल 2024 में पटना (Patna) में एक महिला पत्रकार को किडनैप करने की कोशिश की गई थी। बाद में महिला पत्रकार ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज़ कराई। पत्रकारों के साथ केवल बिहार में ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में अलग-अलग समय पर दिल दहला देने वाली घटनाएं घटित हुई हैं
वहीं, बिहार (Bihar) से बाहर निकलकर देखें तो साल 2017 में एक पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या, उनके घर के पास में ही गोली मारकर कर दी गई। गौरी लंकेश कर्नाटक की रहने वाली पत्रकार थी। कुछ मनबढ़ों ने 5 सितम्बर 2017 को गौरी लंकेश के घर के बाहर ही गोली मार दी। बाद में मामला कोर्ट में पहुंचा। इस हत्या में कुल 18 दोषियों के खिलाफ शिकायत दर्ज़ की गई थी। गौरी लंकेश केस में ट्रायल अभी चल रहा है।
इस मामले में एक आरोपी श्रीकांत पंगरकर (Shrikant Pangarkar) ने साल 2026 के महाराष्ट्र निकाय चुनाव में जालाना के वार्ड नंबर 13 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सफलता हासिल कर ली। श्रीकांत पंगरकर को महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने कच्चे बम और हथियार बरामदगी के आरोप में भी साल 2018 में ही गिरफ्तार किया था। बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी।
इसी तरीके से कुछ अन्य पत्रकारों की हत्या हुई, जैसे नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को महाराष्ट्र में, गोविन्द पानसरे की हत्या 16 फरवरी 2015 को महाराष्ट्र में, एम एम कुलबर्गी की हत्या 30 अगस्त 2015 को की गई थी और इस मामले में अभी तक दोषियों को सजा नहीं हुई । वहीं बृजेश गुप्ता नामक एक टीवी चैनल के पत्रकार की जून 2009 में कानपुर में हत्या कर दी गई थी। पत्रकारिता पर लगातार हो रहे हमले, लोकतान्त्रिक व्यवस्था को सवालों के कटघरे में खड़ा करते हैं।