चंपत राय के करीबी चंदन राय पर अयोध्या में सर्किल रेट से 17 गुना ज्यादा दाम पर कई बीघा जमीन हड़पने का आरोप है। वहीं, गोपाल राव के भतीजे सोमेश आनंद पर चंदा चोरी और 40 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप लगे हैं। इसके अलावा, वीएचपी नेता टिन्नू यादव के भतीजे मनीष की तैनाती स्ट्रॉन्ग रूम के पास थी, जिसके पुश्तैनी घर से एसआईटी ने 36 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
राम मंदिर के नाम पर सालों से राजनीति हो रही है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराने के बाद शिवसेना, बीजेपी, आरएसएस जैसे सनगठनों ने जिम्मेवारी लिया और अपना योगदान बताया था। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि राम मंदिर में चोरी होने के बाद कोई श्रेय लेगा या नहीं। दरअसल, राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसी बीच चंपत राय के कुछ करीबियों के नाम का खुलासा हुआ है जिन्होंने इस घटना को अंजाम देने में भूमिका निभाई है। इस खुलासे ने सबको चौंका के रख दिया है।
राम मंदिर में हुई चोरी ने भाजपा सरकार के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सुनिश्चित हैं। इधर मंदिर में हुई चोरी ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंदिर में हुई चोरी की पड़ताल हेतु एसआईटी (SIT) का गठन किया जा चुका है। SIT की जांच में कुछ नामों के खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय के करीबियों पर तलवार लटकती नजर आ रही है। चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने अपने करीबियों को मंदिर में खास जगह और जिम्मेदारी दे रखी थी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के भतीजे चंदन राय का नाम भी इस मामले में निकलकर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, SIT की जांच में सामने आ रहा है कि चंदन राय अयोध्या में किराये के मकान में रहता था। बाद में अयोध्या में जमीन की खरीद-बिक्री शुरू हुई तो वह इस मसले में सक्रिय हो गया। साल 2021 से लेकर 2024 के बीच चंदन राय अयोध्या में जमीन के खरीद-फरोख्त में शामिल हुआ। हालांकि संघ का मानना है कि चंपत राय और चंदन राय के बीच कोई रिश्ता नहीं है, लेकिन इस बात में कोई मत विभाजन नहीं है कि चंदन, चंपत राय का खास आदमी रहा है। आरोप है कि उसने अयोध्या में सर्किल रेट से 17 गुना ज्यादा दाम में कई बीघा जमीन भी हड़प रखी है। सूत्रों के मुताबिक, SIT ने जमीन के सारे दस्तावेज अपने पास रख लिए हैं और मामले की जांच जारी है।
गोपाल राव का भतीजा सोमेश आनंद भी इस मामले में फंसा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, सोमेश आनंद कर्नाटक का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार, सोमेश आनंद कई बार कुछ सामान लेकर अयोध्या से कर्नाटक जाता था और खाली हाथ लौटता था। आरोप है कि राम मंदिर चंदा चोरी में सोमेश आनंद का नाम भी है। हालांकि, SIT की जांच अभी जारी है, लेकिन जांच जल्द ही पूर्ण होने वाली है। सोमेश पर आरोप है कि उसने 40 प्रतिशत की कमीशन मांग रखी थी।
विश्व हिंदू परिषद के नेता चंपत राय के बेहद करीबियों में से एक टिन्नू यादव भी हैं। रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के भतीजे मनीष का नाम भी इस मामले में निकलकर आ रहा है। SIT की जांच में सामने आया है कि चोरी के लिए किसी खास कड़ी का टूटना जरूरी था। वहीं, मनीष की तैनाती चढ़ावे के पैसे गिनने वाले कमरे (स्ट्रॉन्ग रूम) के पास थी। बिना किसी कड़ी के टूटे चोरी संभव नहीं हो सकती है, इसलिए चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव के भतीजे मनीष के ऊपर भी आरोप लग रहे हैं। वहीं, टिन्नू यादव के पुश्तैनी घर से SIT ने लगभग 36 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा भी इस मामले में उलझते नजर आ रहे हैं। डॉ. अनिल मिश्रा भी चंपत राय के बहुत करीबी माने जाते हैं। बता दें कि अनिल मिश्रा पेशे से डॉक्टर रहे हैं। होम्योपैथिक डॉक्टर के रूप में कई सालों तक सेवा देने के साथ इनका जुड़ाव आरएसएस से भी रहा है। आरएसएस में रहते हुए इन्होंने 2017-2020 तक अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह के रूप में भी कार्य किया है।
राम मंदिर में हुई चोरी ने डॉ. अनिल मिश्रा को भी सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। डॉ. अनिल मिश्रा की सिफारिश पर ही अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा को चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में शामिल किया गया। जानकारी के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा ने इस पद का फायदा उठाते हुए बहुत सारा पैसा इधर-उधर कर दिया। वहीं, अनुकल्प मिश्रा ने अपनी नियुक्ति के महज 6 महीने के भीतर लवकुश मिश्रा को भी टीम में शामिल करवा लिया। इसके बाद लवकुश मिश्रा ने भी बहुत सारा चढ़ावा इधर-उधर कर दिया।
SIT ने जब जांच-पड़ताल शुरू की तो हैरान करने वाली बातें सामने निकलकर आईं। SIT की जांच में सामने आया कि लवकुश मिश्रा ने लगभग 12 लाख रुपए गोबर के उपलों में छुपाकर रखे थे। SIT अपनी पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को जल्द ही सौंप सकती है एवं चौंकाने वाली खबरें सामने निकलकर आ सकती हैं।
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