हरियाणा के फरीदाबाद (छांयसा थाना) में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एडिशनल SHO प्रदीप को 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
यह पूरा मामला 13 फरवरी 2026 को अटाली गांव के मोड़ पर हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा था। हादसे के दोनों पक्ष (घायल रोहित और चालक मनीष) आपस में समझौता कर चुके थे, लेकिन एसआई प्रदीप केस को रफा-दफा करने के बदले मनीष पर 1 लाख रुपये का दबाव बना रहे थे।
क्या छोटे अधिकारियों द्वारा ली जाने वाली रिश्वत ऊपर तक पहुँचती है। ऐसे मामले न केवल प्रशासनिक सुधारों को नाकाम करते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस के प्रति आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करते हैं।
देश में भ्रष्टाचार ने अच्छे से पैर जमा लिया है। एक तरफ देश में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए तमाम प्रशासनिक खामियों को ढूंढा जा रहा है। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन ही भ्रष्टाचार में लिप्त नजर आ रही है। हरियाणा के फरीदाबाद में सब इंस्पेक्टर को ACB ने रिश्वत लेते समय रंगे हाथों पकड़ लिया। यह मामला जब से प्रकाश में आया है, लोगों ने पुलिस के भरोसे को दोयम नजरों से देखना शुरू कर दिया है।
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प्रशासन में भ्रष्टाचार का खेल जारी है। फरीदाबाद के छांयसा थाने के एडिशनल एसएचओ एसआइ प्रदीप को ACB ने 40 हजार रुपए रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़ लिया। एडिशनल एसएचओ एसआइ प्रदीप पिछले काफी समय से सड़क हादसे का एक मामला देख रहे थे। इसी मामले में लेनी देनी करते समय उनको लेने के देने पड़ गए।
बता दें कि फरीदाबाद (Faridabad) के छांयसा थाना क्षेत्र के अटाली गांव के मोड़ पर 13 फरवरी 2026 को एक सड़क हादसा हुआ था। हादसे में रोहित नाम का युवक और उसके मामा को गंभीर चोट आई थी। घायल पक्ष ने इस मामले की शिकायत फरीदाबाद के छांयसा थाना में करवाई थी। शिकायत मनीष नामक चालक के खिलाफ हुआ था। चूंकि दोनों पक्ष एक ही ग्राम सभा के रहने वाले थे, उन्होंने मामले को आपस में लगभग सुलझा लिया था।
जानकारी के मुताबिक एसआई प्रदीप (SI Pradeep) इस मामले के केस को रफा-दफा करने के लिए मनीष पर लगभग एक लाख रुपए की धनराशि का दबाव बना रहे थे। रोहित के चचेरे भाई संजय ने इस मामले की शिकायत ACB के पास की थी। 16 मार्च 2026 की शाम लगभग 6 बजे के समय, एसआई प्रदीप को थाने (Police Station) से ही ACB ने 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते वक्त गिरफ्तार कर लिया। संजय के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
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एक तरफ भ्रष्टाचार (Corruption) को खत्म करने लिए सरकार अलग-अलग तरीके अपना रही है। प्रशासनिक कार्रवाई तुरंत हो सके इसके लिए हर सुविधा से अफसरों को लैस किया जा रहा है। लेकिन इस तरीके के मामले सरकार की पूरी कोशिश को नाकाम कर देती है। अगर अफसर इतनी आसानी से इस तरीके के भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं तो क्या हो सकता है? क्या ऐसे लोगों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त होता है जिससे ये लोग इस तरीके के कार्यों को अंजाम देते हैं? नीचे के पुलिस अधिकारी अगर रिश्वत लेते हैं तो क्या यह पैसा ऊपर भी पहुंचता है? सवाल जनता है, क्योंकि जनता सरकार चुनती है।
साल 2025 में तेलंगाना में ACB ने डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मूड किशन के घर छापा मारा था तो करोड़ों के अवैध संपत्ति सामने आए थे। इस मामले की जांच अभी भी जारी है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मूड किशन के अलग-अलग ठिकानों से जब्त की गई संपत्ति की कीमत लगभग 12.72 करोड़ रुपये बताई गई। हालांकि बढ़ते समय के साथ कीमत को 300 करोड़ के लगभग बताया जा रहा है। इस तरीके के मामले पुलिस के ऊपर जनता के भरोसे को कम कर देते हैं।
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