दिल्ली के शाही महलों में एक ऐसा बादशाह भी हुआ, जिसकी पहचान तलवार की धार से ज्यादा उसके रंगीन शौकों से बनी। मुगल सम्राट मुहम्मद शाह 'रंगीला' (Muhammad Shah Rangeela) का नाम इतिहास में अपनी अनोखी जीवनशैली के लिए दर्ज है। कहा जाता है कि उसे संगीत, नृत्य, महफिलों, शायरी और मनोरंजन से इतना लगाव था कि राजकाज अक्सर पीछे छूट जाता था। महिलाओं जैसे भव्य वस्त्र पहनने और मुर्गों की लड़ाई देखने के उसके शौक ने उसे बाकी मुगल शासकों से अलग बना दिया। एक तरफ वह कला और संस्कृति का संरक्षक था, तो दूसरी तरफ उसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया।
मुहम्मद शाह 'रंगीला' (Muhammad Shah Rangeela) का असली नाम रोशन अख्तर था। महज 17 साल की उम्र में 1719 में वह मुगल साम्राज्य की गद्दी पर बैठा और लगभग तीन दशकों तक शासन किया। लेकिन उसे इतिहास में एक महान विजेता या कुशल प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि अपनी रंगीन मिजाजी और विलासितापूर्ण जीवनशैली के लिए ज्यादा याद किया जाता है। दरअसल, संगीत, नृत्य, शायरी, महफिलें और दरबारी मनोरंजन उसके सबसे पसंदीदा शौक थे। कला और संस्कृति के प्रति उसके प्रेम के कारण उसके शासनकाल में उर्दू भाषा और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को भी नया संरक्षण मिला। यही वजह थी कि लोगों ने उसे "रंगीला" (Rangeela) कहना शुरू कर दिया। इतिहास में उसके बारे में कई दिलचस्प किस्से भी मिलते हैं। कुछ कथनों के अनुसार उसे कभी-कभी रेशमी और महिलाओं जैसे भव्य वस्त्र पहनने का भी शौक था। हालांकि इन दावों को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं, लेकिन इस बात पर लगभग सभी सहमत हैं कि मुहम्मद शाह का जीवन बेहद रंगीन, ऐशो-आराम से भरा और अपने समय के अन्य शासकों से काफी अलग था।
मुहम्मद शाह "रंगीला" के दरबार में सिर्फ राजनीति नहीं, तमाशा भी चलता था। उसे कबूतरबाजी, पशु-पक्षियों की प्रतियोगिताएं और खासकर मुर्गों की लड़ाई देखने का बड़ा शौक बताया जाता है। कहा जाता है कि शाही महफिलों में संगीत, नृत्य और शायरी के साथ ऐसे खेल भी मनोरंजन का हिस्सा बनते थे, जहां बादशाह अपने पसंदीदा मुर्गों की जीत पर खुश होता और दरबारी देर रात तक जश्न मनाते। उस दौर के कई राजाओं और नवाबों की तरह मुहम्मद शाह (Muhammad Shah) भी इन रंगीन आयोजनों का आनंद लेने वाला शासक माना जाता है। लेकिन यही रंगीन दुनिया धीरे-धीरे मुगल सत्ता पर भारी पड़ने लगी। जब दरबार महफिलों और मनोरंजन में डूबा था, तब साम्राज्य के सूबेदार ताकतवर होते जा रहे थे, कर वसूली कमजोर पड़ रही थी और दिल्ली की पकड़ दूर-दराज के इलाकों पर ढीली होती जा रही थी। इतिहासकार मानते हैं कि कला और संस्कृति को संरक्षण देने के बावजूद मुहम्मद शाह प्रशासन पर वैसा ध्यान नहीं दे पाया, जिसकी उस समय जरूरत थी। नतीजा यह हुआ कि मुगल साम्राज्य का बाहरी वैभव तो कायम रहा, लेकिन भीतर से उसकी नींव दरकने लगी और आगे चलकर यही कमजोरी बड़े संकटों की वजह बनी।
साल 1739 में मुहम्मद शाह "रंगीला" के शासनकाल में एक ऐसी घटना हुई जिसने मुगल साम्राज्य की ताकत और प्रतिष्ठा को गहरा झटका दिया। फ़ारस के शक्तिशाली शासक नादिर शाह ने भारत पर हमला कर दिया और करनाल के युद्ध में मुगल सेना को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद नादिर शाह विजेता की तरह दिल्ली पहुंचा, जहां उसने ऐसी लूटपाट मचाई जिसकी गूंज वर्षों तक सुनाई देती रही। कहा जाता है कि दिल्ली की सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल था और हजारों लोगों की जान चली गई। नादिर शाह अपने साथ मुगलों की सबसे अनमोल धरोहरें दुनिया प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा और शानदार मयूर सिंहासन भी ले गया। इस हमले ने न सिर्फ मुगल खजाने को खाली कर दिया, बल्कि दुनिया के सामने यह भी साबित कर दिया कि कभी अजेय माना जाने वाला मुगल साम्राज्य अब कमजोर पड़ चुका है। इतिहासकार इसे मुगल सत्ता के पतन की शुरुआत मानते हैं।
मुहम्मद शाह 'रंगीला' भारतीय इतिहास का एक ऐसा किरदार है जिसे कुछ लोग कला और संस्कृति का संरक्षक मानते हैं, तो कुछ लोग मुगल साम्राज्य के पतन का जिम्मेदार शासक। महिलाओं के कपड़े पहनने से लेकर मुर्गों की लड़ाई देखने तक, उसके शौक आज भी इतिहास प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। लेकिन एक बात तय है उसका जीवन जितना रंगीन था, उसका शासनकाल उतना ही विवादों और ऐतिहासिक घटनाओं से भरा हुआ था। [SP]