बॉलीवुड की चमक-दमक भरी दुनिया बाहर से जितनी ग्लैमरस दिखती है, अंदर से उतनी ही जटिल और चुनौतीपूर्ण भी होती है। यहां हर दिन सफलता, दबाव और लाइमलाइट के बीच कलाकारों को खुद को संभालना पड़ता है। ऐसे में कुछ सितारे ऐसे भी रहे, जिन्होंने नशे की लत जैसी गंभीर समस्या का सामना किया और उससे बाहर निकलकर न सिर्फ अपनी जिंदगी संभाली, बल्कि लोगों के सामने अपनी कहानी खुलकर रखी। संजय दत्त से लेकर रणबीर कपूर तक, इन सितारों की सच्चाई यह दिखाती है कि कमजोरी स्वीकार करना ही असली ताकत है। तो आईए जानते हैं कि बॉलीवुड के ऐसे कौन-कौन से सितारे रहे हैं जिन्हें ड्रग्स की आदत थी।
संजय दत्त (Sanjay Dutt) का नाम बॉलीवुड में नशे की लत से उबरने की सबसे चर्चित और प्रेरणादायक कहानियों में लिया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्हें ड्रग्स की आदत लगभग 1980 के आसपास, यानी महज 16–17 साल की उम्र में लग गई थी, जब वे फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने की तैयारी कर रहे थे। यह आदत धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि वे दिन में कई बार नशा किए बिना रह नहीं पाते थे। हालात तब और बिगड़े जब उनके परिवार को एहसास हुआ कि वे पूरी तरह इस लत में डूब चुके हैं। इसके बाद उन्हें 1984 में अमेरिका के एक रिहैब सेंटर भेजा गया, जहां उन्होंने लगभग 2 साल तक इलाज कराया। संजय दत्त ने खुद बताया है कि उस दौरान कई बार ऐसा लगा कि वे हार मान लें, लेकिन उन्होंने खुद को मजबूत रखा। रिहैब से लौटने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को पूरी तरह बदलने का फैसला किया वर्कआउट, अनुशासन और फिल्मों पर फोकस करके उन्होंने खुद को फिर से खड़ा किया।
रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) ने भी बिना झिझक अपने जीवन के उस हिस्से के बारे में खुलकर बात की है, जिसके बारे में अक्सर लोग बोलने से बचते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें ड्रग्स की आदत लगभग 2000–2001 के आसपास, यानी अपनी कॉलेज लाइफ (टीनएज/यंग एज) के दौरान लगी थी, जब वे पढ़ाई के लिए विदेश में थे। उस समय यह उनके लिए एक “फेज” जैसा था, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि यह रास्ता खतरनाक हो सकता है। रणबीर ने एक इंटरव्यू में यह भी बताया कि एक समय पर वे सिगरेट और अन्य आदतों में फंस गए थे, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे खुद पर कंट्रोल करना सीखा। उनका मानना है कि स्टारडम के साथ आने वाला दबाव और अकेलापन कई बार इंसान को गलत दिशा में ले जा सकता है। लेकिन खास बात यह है कि उन्होंने समय रहते खुद को संभाल लिया और पूरी तरह अपने करियर पर ध्यान केंद्रित किया।
मशहूर रैपर हनी सिंह (Honey Singh) की कहानी नशे की लत और उससे उबरने की एक मजबूत मिसाल है। अपने करियर के पीक (लगभग 2012–2014) के दौरान, जब उनके गाने हर पार्टी और क्लब की जान हुआ करते थे, उसी समय वे अंदर ही अंदर एक गंभीर संघर्ष से गुजर रहे थे। इसी दौर में उन्हें धीरे-धीरे शराब और ड्रग्स की लत लग गई, जो बढ़ते-बढ़ते उनकी जिंदगी पर हावी हो गई। हालत इतनी बिगड़ गई कि साल 2014 के आसपास उन्हें अचानक इंडस्ट्री से दूरी बनानी पड़ी।
बाद में हनी सिंह ने खुलासा किया कि वे सिर्फ नशे की लत से ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं जैसे एंग्जायटी और बाइपोलर डिसऑर्डर से भी जूझ रहे थे। यह समय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन इलाज, परिवार के सपोर्ट और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला।
फरदीन खान (Fardeen Khan) की कहानी भी बॉलीवुड के उन सितारों में गिनी जाती है, जिन्होंने अपनी गलती को छुपाने के बजाय उसे स्वीकार किया। साल 2001 में जब उन्हें ड्रग्स केस में गिरफ्तार किया गया, तो यह खबर इंडस्ट्री और उनके फैंस के लिए बड़ा झटका थी। उस समय उनका करियर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, लेकिन इस एक घटना ने सब कुछ बदल दिया।
हालांकि, फरदीन ने इस मुश्किल दौर से भागने के बजाय उसका सामना किया। उन्होंने कोर्ट के निर्देश पर रिहैब प्रोग्राम जॉइन किया और खुद को सुधारने की दिशा में काम किया। उन्होंने यह भी माना कि यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी, जिसने उन्हें अंदर से झकझोर दिया। इस घटना के बाद उन्होंने खुद को न सिर्फ नशे से दूर किया, बल्कि एक नई सोच के साथ जिंदगी को देखने लगे।
मनीषा कोइराला (Manisha Koirala) की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संघर्ष, गिरावट और फिर शानदार वापसी की प्रेरणादायक कहानी है। अपने करियर के शुरुआती सफल दौर (1990s) के बाद, खासकर 2000 के आसपास, वे धीरे-धीरे नशे और गलत लाइफस्टाइल की ओर बढ़ने लगीं। शराब और असंतुलित जीवनशैली का असर उनके स्वास्थ्य और प्रोफेशन दोनों पर साफ नजर आने लगा, जिससे उनका करियर भी प्रभावित हुआ। लेकिन उनकी जिंदगी का असली मोड़ साल 2012 में आया, जब उन्हें ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) जैसी गंभीर बीमारी का पता चला। यह खबर उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। इसके बाद उन्होंने लगभग 2–3 साल तक इस बीमारी से कड़ा संघर्ष किया और इलाज के लिए (New York City) में कीमोथेरेपी सहित कई ट्रीटमेंट लिए।
इस कठिन दौर ने उन्हें जिंदगी की असली कीमत समझाई। मनीषा ने खुद स्वीकार किया कि इस बीमारी के बाद उन्होंने नशे जैसी सभी बुरी आदतों से हमेशा के लिए दूरी बना ली। इलाज के दौरान और उसके बाद उन्होंने योग, मेडिटेशन और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाया, जिससे वे धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो सकीं।
प्रतीक बब्बर (Pratik Babbar) की कहानी बॉलीवुड की सबसे इमोशनल और रियल कहानियों में से एक मानी जाती है। उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया है कि वे बहुत कम उम्र में, लगभग 13–14 साल की उम्र (करीब 1999–2000) में ही ड्रग्स और नशे की लत में फंस गए थे। उनकी मां स्मिता पाटिल (Smita Patil) का निधन 1986 में, उनके जन्म के कुछ ही दिनों बाद हो गया था, जिससे उनका बचपन अकेलेपन और भावनात्मक संघर्ष में बीता। इसी खालीपन और दर्द ने उन्हें धीरे-धीरे गलत रास्ते की ओर धकेल दिया।
हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें कई बार रिहैब सेंटर जाना पड़ा। प्रतीक ने यह भी स्वीकार किया है कि नशे की वजह से उनका करियर बुरी तरह प्रभावित हुआ और वे कई बड़े मौके खो बैठे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लंबे संघर्ष, इलाज और अपनी इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और नशे से दूरी बना ली। आज प्रतीक बब्बर अपनी फिटनेस, ईमानदारी और खुलकर अपनी कहानी शेयर करने के लिए जाने जाते हैं। [SP/MK]