राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार अभिनेता रहे हैं। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर में 180-183 फिल्में कीं, जिनमें 101 फिल्मों में एकल नायक के रूप में काम किया। अपने काम के ज़रिए उन्होंने लोगों के दिलों में इतनी जगह बना ली कि प्रशंसक उन्हें काका कहकर बुलाया करते थे। यही नहीं, खन्ना ने लगातार 1969 और 1971 के बीच अपनी 15 सोलो लीड फिल्मों से जबरदस्त रिकॉर्ड बनाया। आइए जानें सुपरस्टार की कहानी।
राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर, पंजाब (अब हरियाणा) में हुआ था। इनका परिवार भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त भारत आया था। उनके जैविक माता-पिता लाला हीरानंद और चंद्रानी खन्ना थे। लेकिन उनके लालन-पालन करने वाले माता-पिता चुन्नी लाल खन्ना और लीलावती खन्ना थे। राजेश खन्ना मुंबई के सेंट सेबेस्टियन गोअन हाई स्कूल में पढ़ाई करते थे। उनको बचपन से ही एक्टिंग का बड़ा शौक रहा है। वे अपने स्कूल के दिनों में कई नाटक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया करते थे।
खन्ना (Rajesh khanna) ने साल 1962 में धर्मवीर भारती के नाटक 'अंधा युग' में एक घायल सैनिक का किरदार निभाया था। उस नाटक से खन्ना ने मुख्य अतिथि को प्रभावित किया। उन्होंने खन्ना को फिल्मों में काम करने की राय दी। 1965 में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर द्वारा आयोजित ऑल इंडिया टैलेंट हंट में 10,000 प्रतिभागियों में से चुने गए आठ फाइनलिस्टों में से राजेश खन्ना विजेता बने। उन्होंने अपने करियर की पहली फिल्म 1966 में 'आखिरी खत' में काम किया राजेश खन्ना की 1969 की 'आराधना' (Aradhana) रोमांटिक फिल्म ने उनको रातों-रात बॉलीवुड का सुपरस्टार अभिनेता बना दिया। उन्होंने 180 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है, जिसमें से उनकी आखिरी फिल्म 'रियासत' (Riyasat) है जो 18 जुलाई 2014 को रिलीज हुई थी। बता दें, यह फिल्म उनके निधन (18 जुलाई 2012) के ठीक दो साल बाद रिलीज हुई थी।
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वहीं, 1970 के दशक के दौरान राजेश खन्ना का फैंडम इतना बढ़ गया कि लोग उनके घर के नाम से उनको बुलाने लगे। महिलाओं और लड़कियों की दीवानगी राजेश खन्ना के प्रति इस हद तक बढ़ गई कि वे उनको अपने खून से प्रेम पत्र लिखती थीं। यही नहीं, कुछ फीमेल फैंस उनकी तस्वीर को ही अपना पति मानकर उनसे शादी कर लेती थीं।
वेटरन म्यूजिक कंपोजर आनंदजी ने विक्की लालवानी के पॉडकास्ट पर राजेश खन्ना को लेकर कई बातें बताईं। उन्होंने बताया कि कामीयाबी के बाद उनके हाव-भाव बदल गए थे। वो फेम पाने के बाद घमंडी हो गए थे। उन्होंने आगे कहा, "मैंने राजेश (Rajesh khanna) को शुरुआती समय में बहुत सपोर्ट किया। उन्हें कितने ही प्रोड्यूसर्स को रेफर किया, उनका नाम सुझाया। लेकिन वो फेम के बाद खुद को बड़ा समझने लगे थे और जब कोई व्यक्ति खुद को बड़ा समझे या सोचे 'मुझे सब आता है', तो तब से ही उसका बुरा वक्त शुरू हो जाता है।" ऐसा ही कुछ खन्ना के साथ हुआ।
राजेश खन्ना (Rajesh khanna) ने पॉलिटिक्स का रास्ता अपने दोस्त राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के कहने पर चुना। उन्होंने मीडिया संग बातचीत के दौरान बताया कि राजीव गांधी और वो इंदिरा गांधी के निधन के बाद बहुत अच्छे मित्र बन गए थे। इसके कारण वह कांग्रेस के लिए कैंपेनिंग करते थे। फिर 170 से ज्यादा फिल्में करने के बाद राजीव ने उनको राजनीति में आने के लिए आग्रह किया, लेकिन उन्होंने तब यह कहकर टाल दिया कि यह काम उनका नहीं है, वह इस क्षेत्र से नहीं हैं। राजीव गांधी के फिर दोबारा कहने पर वह मना नहीं कर पाए और आखिरकार राजनीति में कदम रखा। वहीं उन्होंने 1992 के नई दिल्ली उपचुनाव में बहुमत हासिल कर संसद पहुंचे और 1996 तक सांसद के रूप में जनता की सेवा की।(VR/MK)
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