हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई सितारों की किस्मत अचानक बदली, लेकिन एक अभिनेत्री की कहानी तो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। ना कोई बड़ा ऑडिशन, ना फोटोशूट और ना ही लंबी स्क्रीन टेस्ट की लाइन… बस एक मुलाकात और सीधे फिल्म का ऑफर! कहा जाता है कि जब उस लड़की ने पहली बार देव आनंद को देखा तो वह खुशी से जोर से चिल्ला उठी। उसकी मासूमियत और अलग अंदाज़ ने देव आनंद का ध्यान खींच लिया। वहीं से शुरू हुई उस लड़की की फिल्मी यात्रा, जिसने आगे चलकर बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई। तो आईए जानते हैं बॉलीवुड की उसे एक अभिनेत्री के बारे में जिनकी किस्मत देव आनंद ने बदली।
यह किस्सा 1970 के दशक का बताया जाता है, जब देव आनंद अपनी नई फिल्म के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। उस समय वह अपनी फिल्मों में नए कलाकारों को मौका देने के लिए भी मशहूर थे। एक दिन उनकी मुलाकात एक युवा लड़की से हुई, जो देव आनंद की बहुत बड़ी फैन थी। जैसे ही उसने देव आनंद (Dev Anand) को सामने देखा, वह उत्साह में चीख पड़ी। उसकी वही मासूम प्रतिक्रिया और आत्मविश्वास भरा अंदाज़ देव आनंद को इतना पसंद आया कि उन्होंने बिना किसी औपचारिक ऑडिशन के उसे फिल्म ऑफर कर दी। वह लड़की थीं जरीना वहाब।
कपिल शर्मा शो में जब जरीना वहाब आई थी तो उन्होंने उनके करियर की पहली फिल्म मिलने का किस्सा सबके साथ शेयर किया। उस दौर में जरीना वहाब मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बना रही थीं, लेकिन फिल्मों में उन्हें बड़ा मौका नहीं मिला था। देव आनंद ने उनमें एक अलग तरह की स्क्रीन प्रेजेंस देखी। कहा जाता है कि उन्होंने तुरंत तय कर लिया कि यही लड़की उनकी फिल्म के लिए बिल्कुल सही रहेगी। इसके बाद जरीना वहाब ने अपने करिअर में 'चितचोर', 'सितारा', 'गोपाल कृष्ण' और नानी स्टारर 'दशहरा' सहित कई फिल्मों में अपनी काबिलियत साबित की।
इश्क इश्क इश्क (Ishk Ishk Ishk) साल 1974 में रिलीज़ हुई वह फिल्म थी, जिसने ज़रीना वहाब (Zarina Wahab) को हिंदी सिनेमा में पहली बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म का निर्देशन देव साहब (Dev Anand) ने किया था, और इसमें ज़रीना ने अपनी सहज अदाकारी से दर्शकों का ध्यान खींचा। ज़रीना वहाब का जन्म 17 जुलाई 1959 को विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) में हुआ था। अभिनय में रुचि के कारण उन्होंने फिल्म और टेलीविजन संस्थान (Film and Television Institute of India) से प्रशिक्षण लिया और इसके बाद फिल्मी दुनिया में कदम रखा।
हालांकि उनकी पहली फिल्म इश्क इश्क इश्क थी, लेकिन उन्हें असली लोकप्रियता चितचोर, घरौंदा, अनपढ़ और सावन को आने दो जैसी फिल्मों से मिली। अपनी सादगी और मजबूत अभिनय के दम पर उन्होंने 1970 और 80 के दशक में अलग पहचान बनाई। फिल्मों के अलावा ज़रीना ने टेलीविजन पर भी लंबा सफर तय किया है। वह महाभारत (Mahabharat), अम्मा (Amma), मेरी आवाज ही पहचान है (Meri Awaz Hi Pehchaan Hai) और दिल बेकरार (Dil Bekaraar) जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुकी हैं। आज भी वह फिल्मों, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और अपने अनुभव से नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित कर रही हैं। [SP]