47 साल पहले किशोर कुमार ने जिस गाने को कहा था 'ना', उसी ने बाद में उन्हें बना दिया अमर! जानें फिल्म 'गोलमाल' का अनसुना किस्सा

अपनी अनोखी आवाज़ और अंदाज़ के लिए मशहूर किशोर कुमार कभी-कभी गानों को लेकर काफी चुनिंदा हुआ करते थे। कहा जाता है कि एक ऐसा गीत, जो आज हर किसी के दिल में बसता है, उसे उन्होंने पहले गाने से मना कर दिया था।
किशोर कुमार (Kishore Kumar)
किशोर कुमार (Kishore Kumar)Wikimedia Commons
Published on
Updated on
2 min read

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गाने हैं, जो आज अमर माने जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इनमें से कुछ गानों को शुरुआत में खुद बड़े कलाकारों ने ही ठुकरा दिया था। ऐसे ही एक दिलचस्प किस्से का रिश्ता जुड़ा है महान गायक किशोर कुमार (Kishore Kumar) से। अपनी अनोखी आवाज़ और अंदाज़ के लिए मशहूर किशोर कुमार कभी-कभी गानों को लेकर काफी चुनिंदा हुआ करते थे। कहा जाता है कि एक ऐसा गीत, जो आज हर किसी के दिल में बसता है, उसे उन्होंने पहले गाने से मना कर दिया था। लेकिन बाद में जब हालात बदले, तो उसी गाने को उन्होंने अपनी आवाज़ दी और फिर वही गीत इतिहास बन गया। यह कहानी सिर्फ एक गाने की नहीं, बल्कि एक कलाकार के फैसले, समझ और बदलाव की भी है, जो इसे और खास बनाती है।

इस मशहूर गीत को ठुकरा दिया था किशोर दा ने

यह मशहूर गीत था “आने वाला पल जाने वाला है”, जो फिल्म गोलमाल (Golmaal) का हिस्सा था। इस गाने को लिखा था मशहूर गीतकार गुलज़ार (Gulzar) ने और संगीत दिया था आर डी बर्मन (R. D. Burman) ने। यह गाना 1979 में रिलीज़ हुई फिल्म गोलमाल के लिए बनाया गया था। शुरुआत में जब यह गाना किशोर कुमार (Kishore Kumar) के पास गया, तो उन्होंने इसे गाने से मना कर दिया था। वजह यह थी कि गाने के बोल बहुत दार्शनिक और धीमे थे, और उन्हें लगा कि यह आम दर्शकों को तुरंत कनेक्ट नहीं कर पाएगा, और उन्होंने गाने से ही मना कर दिया।

Also Read : मधुबाला ने गुस्से में की थी किशोर कुमार से शादी

कैसे माने किशोर कुमार?

आर डी बर्मन (R. D. Burman) और गुलज़ार (Gulzar) साहब को इस गाने पर पूरा भरोसा था। बर्मन और किशोर दा की दोस्ती काफी पक्की थी, उन्होंने बाद में किशोर कुमार को मनाया और उनको समझाया कि ये गीत तुम्हारे लिए है बना है मेरे दोस्त, तुम ही इसे गाओगे तब अच्छा रहेगा। साथ ही गाने के कुछ हिस्सों की प्रस्तुति में हल्का बदलाव किया। खासतौर पर इसके भाव और गायकी के अंदाज़ को थोड़ा और सहज बनाया गया। इसके बाद किशोर कुमार मान गए और उन्होंने इसे रिकॉर्ड किया।

लोगों को खूब पसंद आई किशोर कुमार की आवाज़

जब यह गाना रिलीज़ हुआ, तो यह तुरंत लोगों के दिलों में बस गया। इसकी सादगी, गहराई और किशोर कुमार की आवाज़ ने इसे अमर बना दिया। आज भी यह गाना समय के बहाव और जिंदगी की सच्चाई को बेहद खूबसूरती से बयान करता है। दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने को कभी “धीमा” और “कम असरदार” समझकर ठुकराया गया था, वही आगे चलकर बॉलीवुड के सबसे यादगार गानों में शामिल हो गया।

किशोर कुमार (Kishore Kumar)
अगर पुराने गानों के शौकीन हैं तो ये 10 गाने जरूर सुनिए… किशोर कुमार की आवाज़ का असली जादू
logo
www.newsgram.in