लता मंगेशकर की बहन आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल 2026 को हो गया। आशा भोसले ने मराठी फिल्म माझा बाल में सबसे पहला गाना गाया था। साल 1948 में हिंदी फिल्म चुनरिया में आशा ने गीत गाया था जिसके बोल थे सावन आया... ।  X
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दादा साहब फाल्के से नेशनल अवॉर्ड तक: जानें कैसा रहा आशा भोसले का 8 दशकों का सुरीला सफर

लता मंगेशकर की बहन आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल 2026 को हो गया। 8 सितंबर, 1933 को पंडित दीनानाथ के घर में आशा भोसले का जन्म हुआ।

Author : Pradeep Yadav

लता मंगेशकर की बहन आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल 2026 को हो गया। प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री और अन्य लोगों ने इस दुखद अवसर पर अलग-अलग तरीके से अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। बड़ी बहन लता मंगेशकर से बहुत कुछ सीखने के बाद गीत संगीत की दुनिया में आशा भोसले ने कदम रखा था। 

कैसा रहा आशा भोसले का जीवन सफर ?

8 सितंबर, 1933 को पंडित दीनानाथ के घर में आशा भोसले का जन्म हुआ। महाराष्ट्र में जन्मी आशा भोसले जब 9 साल की थी तभी पिता का देहांत हो गया था। बचपन में पिता का साया हट जाने के बाद बड़ी बहन लता मंगेशकर ने पूरा ध्यान रखा और संगीत की दुनिया में कदम रखने तक साथ दिया। आशा भोसले ने मराठी फिल्म माझा बाल में सबसे पहला गाना गाया था। साल 1948 में हिंदी फिल्म चुनरिया में आशा ने गीत गाया था जिसके बोल थे सावन आया... । इस गीत से उनको अलग पहचान मिली। इसके बाद हिन्दी सिनेमा जगत में आशा भोसले ने लगातार कीर्तिमान सथापित किया और संगीत की दुनिया में अलग छाप छोड़ गईं।

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शादी और संघर्ष !

आशा भोसले जब लगभग 16 साल की थी तो उनको लता मंगेशकर के पर्सनल सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से प्यार हो गया। मोहब्बत के रिश्ते को नया नाम देने के लिए उन्होंने गणपतराव भोसले से शादी करने का फैसला किया। अपने मोहब्बत को पाने के लिए आशा ने परिवार के खिलाफ बगावत कर दिया क्योंकि परिवार वाले इस शादी के लिए तैयार नहीं थे। लता मंगेशकर भी इस शादी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। इतना विरोध का सामना करने के बाद उन्होंने गणपतराव भोसले को अपना जीवनसाथी चुन लिया। ससुराल में भी उनको विरोध का सामना करना पड़ा। ससुराल में बहुत दिनों तक सबसे उनकी बन न सकी। यही कारण रहा कि उनको 1960 के दशक में ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। ससुराल वालों ने जब उनको घर से निकाला तो वह दो बच्चों (हेमंत और वर्षा) की माँ थी और उनके पेट मे उनका तीसरा बच्चा आनंद पल रहा था। 

मंगेशकर परिवार में दोबारा आने पर बड़ी बहन लता मंगेशकर ने उनको गले लगाया और सभी गलतियों को भूलकर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने के लिए समझाया और साथ दिया। 

दूसरी शादी लोगों के लिए बनी मिसाल !

आशा ने गणपतराव भोसले से अलग होने के बाद जिंदगी को नए सिरे से जीना शुरू कर दिया था। बहुत सारे गीत के माध्यम से धीरे-धीरे जिंदगी में सुधार हुआ। फिर उनके जीवन में आर.डी. बर्मन ने प्रवेश किया जिन्हे पंचम दा भी कहते हैं। पंचम दा आशा से लगभग 6 साल छोटे थे। दोनों एक दूसरे की तरफ प्रेम के डोर से खींचे चले आ रहे थे। वक्त बदला और दोनों ने 1980 के दशक में शादी कर लिया। पंचम दा की पहली पत्नी उनसे अलग हो चुकी थी। उन्हे भी अकेलापन सताने लगा था। ऐसे में उनको भी एक जीवनसाथी की जरूरत थी। दोनों की शादी को लेकर समाज में बहुत सारी गलत अफवाहें उड़ाई गईं और तंज कसा गया क्योंकि रूढ़िवादी सामाजिक परंपराओं के विपरीत जाकर आशा ने अपने से 6 साल छोटे उम्र वाले शख्स से शादी किया था। पंचम दा को यह रिश्ता मंजूर था इसलिए रूढ़िवादी सामाजिक परम्पराएं उनके सामने ज्यादा समय तक बाधा नहीं बन सकी। 

आशा भोसले की उपलब्धियां 

आशा भोसले के मेहनत ने उनको सफलता के शिखर तक पहुंचा दिया। भारत सरकार ने उनको पद्म विभूषण (2008), पद्म भूषण (2007), पद्म श्री (1997) जैसे उच्च सम्मान से सम्मानित किया है। इसके अलावा आशा भोसले को 1981 और 1986 में दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) मिल चुका है। उन्होंने 7 बार बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर का पुरस्कार जीता है। स्टूडियो में सर्वाधिक गीत रिकार्ड करने लिए  गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (2011) में भी उनका नाम दर्ज है। साल 2001 में उनको लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिल चुका है। साल 2000 में आशा भोसले को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

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