भारत में किसी भी फिल्म को रिलीज़ से पहले Central Board of Film Certification (CBFC) से सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है। अगर फिल्म में धार्मिक, राजनीतिक या यौन विषय संवेदनशील तरीके से दिखाए जाएं, तो उस पर बैन या स्टे लग सकता है।
Water, Black Friday और Hawayein जैसी फिल्मों को रिलीज़ से पहले विरोध और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ा। बाद में कोर्ट या संपादन के बाद इन्हें रिलीज़ की अनुमति मिली।
The Pink Mirror, Parzania और Kama Sutra: A Tale of Love जैसी फिल्मों को संवेदनशील कंटेंट के कारण बैन या सीमित रिलीज़ झेलनी पड़ी।
बॉलीवुड में हर तरह की फिल्में बन चुकीं है जिसमें समाज की गहरी सच्चाई को दिखाई गई है। लेकिन जब ऐसी कोई फिल्म आती है जिस से समाज की सच्चाई सामने आने से किसी खास धर्म और समुदाय की मान्यताओं को ठेस पहुंच सकती है तो ऐसी फिल्मों को रिलीज़ होने से ही रोक दिया जाता है। आपको बता दें कि भारत में कोई भी फिल्म को रिलीज़ करने से पहले Central Board of Film Certification (CBFC) से सर्टिफिकेट लेना ज़रूरी होता है। अगर फिल्म में राजनीतिक, धार्मिक, सेक्सुअल या हिंसक विषय संवेदनशील तरीके से दिखाए गए हों, तो कभी-कभी रिलीज़ से पहले बैन या स्टे की नौबत आ जाती है। कुछ ऐसी ही 7 चर्चित बॉलीवुड फ़िल्में हैं जिन्हें रिलीज़ से पहले रोका गया या बैन (7 popular Bollywood films that were banned before their release) किया गया था लेकिन बाद में कुछ एडिटिंग या कुछ संवेदनशील पार्ट को हटा कर ही कोर्ट के आदेश के बाद रिलीज़ की गई।
यह फिल्म साल 2000 में भारत में शूट होनी शुरू हुई थी। इसकी कहानी 1930 के दशक की हिंदू विधवाओं की कठिन ज़िंदगी पर आधारित है। जब वाराणसी में इसकी शूटिंग शुरू हुई, तब कुछ धार्मिक संगठनों ने आरोप लगाया कि फिल्म हिंदू परंपराओं को गलत तरीके से दिखा रही है। विरोध इतना बढ़ गया कि फिल्म के सेट तोड़ दिए गए और शूटिंग भी रोकनी पड़ी। इसी कारण फिल्म को रिलीज़ से पहले ही रोक दिया गया और प्रोजेक्ट कई सालों तक बंद रहा। इस फिल्म की निर्देशक दीपा मेहता (Deepa Mehta) थी। वहीं सीमा बिसवास (Seema Biswas), लिसा राय (Lisa Ray) और जॉन अब्राहम (John Abraham) लीड रोल में शामिल थे। बाद में फिल्म की शूटिंग सीक्रेट रूप से श्रीलंका में पूरी की गई। कई सालों की देरी और विवाद के बाद यह फिल्म आखिरकार भारत में 9 मार्च 2007 को रिलीज़ हुई।
यह फिल्म 1993 के मुंबई बम धमाकों की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया था। मुख्य कलाकारों में के के मेनन, पवन मल्होत्रा और आदित्य श्रीवास्तव शामिल थे। यह फिल्म 2005 में रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन उसी समय 1993 धमाकों का मामला अदालत में चल रहा था। कुछ आरोपियों ने कोर्ट में याचिका दायर की कि फिल्म से मुकदमे पर असर पड़ सकता है। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने जनवरी 2005 में फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगा दी। करीब दो साल तक फिल्म पर स्टे लगा रहा। जब केस का फैसला आ गया, तब सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म रिलीज़ करने की अनुमति दी। आखिरकार यह फिल्म भारत में 9 फरवरी 2007 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई।
यह फिल्म 1984 के सिख विरोधी दंगों पर बनी है। इसका निर्देशन अम्मतोजे मान ने किया था। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में बब्बू मान, अम्मतोजे मान और माही गिल नजर आए। फिल्म 2003 में रिलीज़ होने वाली थी, तब पंजाब सरकार ने इसे राज्य में बैन कर दिया। सरकार का कहना था कि फिल्म का विषय बहुत संवेदनशील है और इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। फिल्म में 1984 के दंगों की घटनाओं को सीधे और भावनात्मक तरीके से दिखाया गया था, और इसी कारण विरोध हुआ। बाद में अदालत में मामला गया और कुछ शर्तों के साथ फिल्म को अन्य जगहों पर रिलीज़ की अनुमति मिली। अंततः यह फिल्म 2003 में ही रिलीज़ हुई।
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यह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जिसका निर्देशन राकेश शर्मा ने किया था। यह फिल्म 2002 के गुजरात दंगों पर आधारित है और दंगों के दौरान हुए सांप्रदायिक तनाव और राजनीति को दिखाती है। जब यह फिल्म 2004 में रिलीज़ होने वाली थी, तब Central Board of Film Certification (CBFC) ने इसे सर्टिफिकेट देने से ही मना कर दिया। बोर्ड का कहना था कि फिल्म बहुत संवेदनशील है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए इसे रिलीज़ से पहले ही रोक दिया गया। यह एक डॉक्यूमेंट्री थी, इसलिए इसमें कोई बड़े फिल्मी सितारे नहीं थे। इसमें असली लोगों के इंटरव्यू और वास्तविक घटनाओं के दृश्य दिखाए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि विरोध के बावजूद फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना मिली। बाद में अपील के बाद फिल्म को सर्टिफिकेट मिला और यह आखिरकार अक्टूबर 2004 में भारत में रिलीज़ हुई।
यह फिल्म 2003 में बनी एक हिंदी फिल्म है, जिसका निर्देशन श्रीधर रंगायन ने किया था। यह भारत की पहली फिल्मों में से एक थी जिसमें खुले तौर पर समलैंगिक और ट्रांसजेंडर किरदारों की कहानी दिखाई गई। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में एडविन फर्नांडिस, रुपाली गांगुली और सुधांशु पांडे नजर आए। जब यह फिल्म 2003 में रिलीज़ होने वाली थी, तब Central Board of Film Certification (CBFC) ने इसे “अश्लील” और “भारतीय संस्कृति के खिलाफ” बताकर सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया। यही कारण था कि फिल्म भारत में रिलीज़ से पहले ही बैन हो गई। दिलचस्प बात यह है कि भारत में बैन होने के बावजूद इस फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाया गया और सराहना मिली। यह फिल्म भारत में आधिकारिक रूप से थिएटर में रिलीज़ नहीं हो पाई।
यह फिल्म 2002 के गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसका निर्देशन राहुल ढोलकिया ने किया था। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में नसीरुद्दीन शाह, सारिका और कोरीन नेमेक नजर आए। यह फिल्म एक पारसी परिवार की सच्ची घटना से प्रेरित है, जिसमें दंगों के दौरान उनका बेटा लापता हो जाता है। जब फिल्म 2007 में रिलीज़ होने वाली थी, तब गुजरात के कई सिनेमाघरों ने इसे दिखाने से मना कर दिया। आधिकारिक तौर पर सरकार ने बैन नहीं लगाया, लेकिन विरोध और सुरक्षा कारणों से राज्य में फिल्म रिलीज़ नहीं हो सकी। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिरकार यह फिल्म भारत में 26 जनवरी 2007 को रिलीज़ हुई, लेकिन गुजरात में सीमित प्रदर्शन हुआ।
यह फिल्म 1996 में बनी एक ऐतिहासिक-रोमांटिक ड्रामा है, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध निर्देशक मीरा नायर ने किया था। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में इंदिरा वर्मा, सरिता चौधरी, रमन टीकाराम और नवीन एंड्रयूज नजर आए। जब यह फिल्म भारत में 1996 में रिलीज़ होने वाली थी, तब Central Board of Film Certification (CBFC) ने इसमें मौजूद खुले यौन दृश्यों और नग्नता को आपत्तिजनक माना। बोर्ड ने कहा कि फिल्म भारतीय दर्शकों के लिए उपयुक्त नहीं है, इसलिए इसे सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया गया और भारत में रिलीज़ से पहले ही प्रभावी रूप से बैन कर दिया गया। [SP/MK]