

मुगल काल से लेकर आधुनिक दौर तक इस्लामी शासन और उससे जुड़ी हिंसा व सामाजिक असमानताओं पर सवाल उठते रहे हैं।
अयान हिरसी अली के बयान इस्लाम को लेकर वैश्विक स्तर पर चल रही वैचारिक बहस को फिर सामने लाते हैं।
तमाम मतभेदों के बावजूद भारत धार्मिक सहअस्तित्व और इंसानियत को धर्म से ऊपर रखने का उदाहरण पेश करता है।
इतिहास में इस्लामी शासन का दौर एक लंबा और जटिल समय रहा है। भारत तो इसका जीता जागता उदहारण रहा है। कहा जाता है कि 1526 ईस्वी में मुगल भारत में आए थे। उसी साल बाबर ने पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी। मुगलों के भारत में आने के बाद अनेकों त्रासदियों के किस्से सुनने को मिल जाते हैं।
युद्धों के दौरान लूट, जबरन धर्म परिवर्तन और महिलाओं-बच्चों पर हिंसा जैसी घटनाओं का उल्लेख इतिहास की किताबों में मिलता है। किसानों और कमजोर वर्गों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ा, जिससे समाज में डर और असमानता बढ़ी। कश्मीरी पंडितों पर जुल्म बढ़ा, जबरन धर्म परिवर्तन करवाए गए। सत्ता को बनाए रखने के लिए भारी कर लगाए गए। किसानों और कमजोर वर्गों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ा, जिससे समाज में डर और असमानता बढ़ी।
आज के समय में आलम तो यह है कि इस्लाम को लेकर ये भी बातें उठने लगी हैं कि ये धर्म शांति का प्रतिक नहीं है। ये हम नहीं अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) कह रही हैं, जो एक पूर्व राजनेता और रूढ़िवादी विचारक हैं।
दुनिया में इस्लाम को लेकर कई तरह की धारणाएं हैं। एक धारणा यह है कि ईसाई धर्म के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म इस्लाम शांति का संदेश देता है। क़ुरान में ईश्वर “शांति के घर” की बात करता है और इंसान को शांति भरी दुनिया बनाने का आह्वान करता है, ताकि अंत में शाश्वत शांति मिल सके लेकिन अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती हैं। 2 फ़रवरी 2026 को ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उप-प्रधानमंत्री जॉन एंडरसन के साथ हुए, एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बहस पर अपनी राय रखी। एंडरसन के साथ बातचीत में उन्होंने इस्लाम को लेकर एक अलग और विरोधी नजरिया पेश किया।
शुरुआती बातचीत में एंडरसन ने कहा कि लोग अक्सर इस्लाम को दो हिस्सों में बांटकर देखते हैं, "आधुनिक इस्लाम और चरमपंथी इस्लाम। इस्लाम को सिर्फ एक शांतिपूर्ण धर्म कहना कोई आसान या सीधी बात नहीं है।" इस पर हिरसी ने यह मानने से इनकार किया कि इस्लाम शांति का धर्म है और कहा, “इस्लाम विजय का धर्म है।” वहीं, इस इंटरव्यू के अंत में हिरसी ने चेतावनी भी दी कि भले ही लोग इस सच्चाई से आंखें मूंद लें, लेकिन यह चिंता बनी रहेगी। उन्होंने कहा, “आप जितनी देर चाहें इसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं, लेकिन यह एक हकीकत है।”
बता दें कि आज से करीब एक दशक पहले अप्रैल 2015 में यही बात कही थी और वो आज भी अपने उस बयान पर कायम हैं।
अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) एक लेखिका हैं और उनका बयान ऐसे समय में आया है, जब 14 दिसंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर एक आतंकवादी हमला हुआ था। हमला करने वाले अपराधी पिता-पुत्र थे। दोनों अपराधियों के नाम साजिद अकरम और नावीद अकरम हैं। पिता की मौत मौकाए वारदात पर ही हो गई थी।
अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) की बात करें तो उन्होंने Infidel (2007) और Heretic: Why Islam Needs a Reformation Now (2015) जैसी बेस्टसेलर किताबें लिखी हैं। वह सोमालिया में जन्मी एक डच सामाजिक कार्यकर्ता हैं और बाल विवाह तथा महिला जननांग विकृति (FGM) जैसी प्रथाओं की खुलकर आलोचना करती रही हैं।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) पहले स्लिम थीं। उनका जन्म सोमालिया के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था और बचपन में उन्होंने इस्लाम का पालन किया। उनका जन्म 13 नवंबर 1969 को हुआ था। बाद में उन्होंने इस्लाम छोड़ दिया, कुछ समय तक नास्तिक रहीं और फिर 2023 में ईसाई धर्म अपना लिया। उनका कहना था कि नास्तिकता अब उन्हें पर्याप्त “नैतिक मार्गदर्शन” नहीं दे पा रही थी।
अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) के बयान के बाद इन उदाहरणों पर भी गौर करना जरूरी है।
अफगानिस्तान: तालिबान और ISIS जैसे संगठनों ने दशकों तक बम धमाके, हत्या और जबरन शासन किया।
पाकिस्तान: TTP, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के संगठनों ने कई बार स्कूलों, मस्जिदों और सेना पर हमले किए हैं। 7 फ़रवरी 2026 की ही बात है, जब इस्लामाबाद में आतंकियों ने मस्जिद में बम फेंक दिया था।
सीरिया और इराक: ISIS ने हजारों लोगों की हत्या की, महिलाओं को गुलाम बनाया और शहरों पर कब्ज़ा किया।
भारत (कश्मीर और बड़े शहर): कश्मीर में पहलगाम जैसे आतंकी हमले, 26/11 मुंबई हमला जैसे बड़े आतंकी हमले। ऐसे हमले पाकिस्तान की ओर से करवाए गए थे
नाइजीरिया और अफ्रीका: बोको हराम ने कई गांव उजाड़े, बच्चों का अपहरण किया और नरसंहार किया।
फ्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम, अमेरिका: पेरिस, लंदन, ब्रसेल्स में आतंकी हमले, कई निर्दोष नागरिक मारे गए। वहीं, अमेरिका का 9/11 हमला हर किसी को याद ही हैं।
इंडोनेशिया और फिलीपींस: जेमाह इस्लामिया और अबू सय्याफ जैसे संगठनों ने बम धमाके किए।
हालांकि, ये पूरी तरह से कह देना कि इस्लाम कट्टरपंथ फैलता है, ये कहना गलत है। भारत में भले ही हिंदू और मुसलमान के बीच कई बातों को लेकर असमानताएं हों लेकिन खासियत यह है कि यहाँ हर धर्म के लोग एक दूसरे त्योहारों में भी शरीक होते हैं। फिर चाहे वो गणेश चतुर्थी हो या बसंत पंचमी के दिन निजामुद्दीन दरगाह पर मनाया जाने वाला सूफी संत का त्यौहार।
भारत वो देश हैं जहाँ एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक-राष्ट्रपति को पूरा देश प्रेम करता है। क्रिकेट के खेल में भी जब टीम इंडिया से मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी खेलते हैं, तो लोग धर्म देखकर उनके लिए जीत की दुआ नहीं करते हैं। यही भारत की असली पहचान है, जहाँ इंसान की काबिलियत और इंसानियत, धर्म से कहीं ऊपर रखी जाती है।