देश के अन्नदाताओं का क्या होगा? मोदी सरकार ने मारी पलटी! अमेरिका के लिए खोले कृषि क्षेत्र के दरवाजे

सोमवार यानी 2 फ़रवरी 2026 को व्हाइट हाउस की ओर से यह जानकारी दी गई कि अमेरिका, भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताने के बाद, इससे जुड़े 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाएगा।
तस्वीर में नरेंद्र मोदी-डोनाल्ड ट्रंप और उदास किसान
भारत द्वारा रूसी तेल खरीद रोकने पर अमेरिका ने 25% टैरिफ घटाने का ऐलान किया, लेकिन अमेरिकी कृषि मंत्री के बयान से यह विवाद खड़ा हो गया कि क्या भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोल दिया है। AI Generated
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Summary
  • ट्रेड डील के बाद नया विवाद

  • किसानों के हितों पर सवाल

  • कृषि व्यापार पहले से मौजूद

सोमवार यानी 2 फ़रवरी 2026 को व्हाइट हाउस की ओर से यह जानकारी दी गई कि अमेरिका, भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताने के बाद, इससे जुड़े 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले पारस्परिक टैरिफ को तुरंत 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। उन्होंने इसे ऊर्जा सहयोग और व्यापक भू-राजनीतिक लक्ष्यों से जुड़े द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव बताया।

इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से फोन पर बातचीत भी हुई। इस बातचीत में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। इनमें व्यापार समेत अन्य मुद्दे शामिल रहे। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध और आपसी मित्रता के तहत भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है।

हालांकि, इतना सब तो ठीक था, लेकिन इसी बीच एक और बड़ा बवाल मच गया है। मानों ऐसा लग रहा है, मोदी सरकार ने बहुत बड़ी पलटी मारी है और भारत के किसानों को ठगने का काम किया है। क्या है पूरा मामला, आइये समझते हैं।

भारत में अमेरिका के लिए खुले कृषि के दरवाजे!

आखिरकार भारत-अमेरिका के बीच बात बन ही गई। इस ट्रेड डील से अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस (Secretary Brooke Rollins) काफी गदगद हैं। उनका कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी किसानों को बड़ा फायदा होगा, क्योंकि अमेरिकी कृषि उत्‍पादों को भारत का विशाल बाजार मिलेगा। अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में एक्सपोर्ट होगा। हालांकि, ये बयान अभी सिर्फ अमेरिका की तरफ से दिए गए हैं लेकिन भारत की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

तस्वीर में अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस का ट्वीट
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने कहा कि भारत–अमेरिका समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका को फायदा होगा। उन्होंने इसे 1.3 बिलियन डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करने की दिशा में अमेरिका की बड़ी जीत बताया। X

3 फ़रवरी 2026 को अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस (Secretary Brooke Rollins) ने X अकाउंट (पूर्व में ट्विटर) पर इस समझौते को लेकर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि POTUS आपका धन्यवाद। एक बार फिर हमारे अमेरिकी किसानों के लिए वितरित करने के लिए। अमेरिका-भारत के बीच हुए नए समझौते से भारत के बड़े बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात होगा, कीमतों में वृद्धि होगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी बढ़ेगी।

2024 में, भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आज का सौदा इस घाटे को कम करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। यह अमेरिका की पहली जीत है।

बता दें कि पहले भारत सरकार ने यह ऐलान किया था कि वो अमेरिका के लिए अपना कृषि और डेयरी क्षेत्र नहीं खोलेंगे और इसी को लेकर ट्रेड डील होने में परेशानी हो रही थी लेकिन अमेरिका की तरफ से आए इस बयान के बाद कहीं ना कहीं देश के किसानों को चिंता जरूर सत्ता रही होगी।

क्या अमेरिका के आगे नरेंद्र मोदी झुक गए?

गौर करने वाली बात है कि पिछले साल मई 2025 में जब ऑपरेशन सिंदूर (Opreation Sindoor) हुआ था, उसके बाद से ही अमेरिका और भारत के रिश्तों में खटास देखी जा रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति दिन प्रतिदिन भारत पर टैरिफ लगाने की घोषणा किये जा रहे थे। भारत पर कुल 50% टैरिफ लग चुका था। जब इसकी घोषणा अमेरिका की ओर से हुई थी, तब 7 अगस्त 2025 को पीएम नरेंद्र मोदी का भी बयान सामने आया था।

उन्होंने कहा था कि भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि जानता हूँ, मुझे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अब ऐसे में जब अमेरिका की तरफ से यह कहा गया है कि उनके कृषि सामान भारत में बिकेंगे, तो सवाल उठना लाजमी है कि क्या कीमत चुकाने की बात करने वाले पीएम मोदी ने अमेरिका से समझौता कर लिया है?

क्या भारत-अमेरिका के बीच कभी नहीं हुआ है कृषि व्यापर?

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि अमेरिका के कृषि सामान भारत के बाजार में कभी नहीं बिके हैं। ये सच है कि भारत ने अब तक अमेरिका को अपने ज़्यादातर कृषि और खासकर डेयरी उत्पाद भारत में बेचने की इजाज़त नहीं दी है।

अमेरिका के डेयरी सामान जैसे:- चीज (Cheese), बटर (Butter) और दूध (Milk) को बेचने की इजाज़त भारत सरकार की ओर से कभी नहीं दी गई है। हालांकि, कृषि उत्पादन की चीजें जैसे:- अखरोट, सेब, दाल और कुछ Processed Food को कड़ी शर्तों और सीमित मात्रा के साथ भारत में बेचने की अनुमति मिली है।

बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक 2019 में US से भारत को कृषि से जुड़े माल का कुल एक्सपोर्ट 18-19 हजार करोड़ का रहा। 2023 में US से भारत आयात 15-16 हजार करोड़, 2024-25 में यह आंकड़ा 53,000 करोड़ तक पहुंचा था, जिसमे मरीन प्रोडक्ट्स (जैसे झींगा), मसाले, बासमती चावल, डेयरी, प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स शामिल हैं। जनवरी-जून 2025 में भारत ने US से कृषि सामान लगभग 14–15 हजार करोड़ का आयात किया, जो पिछले साल के इसी समय से करीब 49% ज़्यादा था।

ऐसे में यह कहना गलत होगा कि दोनों देशों के बीच कभी कृषि को लेकर व्यापर नहीं हुआ है। हाँ, पूरी तरह से बाजार भारत सरकार ने नहीं खोला है। जो भी व्यापर है, वो जरूरत के हिसाब से है।

तस्वीर में नरेंद्र मोदी-डोनाल्ड ट्रंप और उदास किसान
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