'ब्राम्हण है मारो इसे...', कपड़े फाड़ने और गला दबाने की कोशिश, DU नॉर्थ कैंपस में महिला पत्रकार के साथ अभद्रता !
दिल्ली यूनिवर्सिटी नॉर्थ कैंपस में UGC के जाति-आधारित नियमों को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार रुचि तिवारी पर कथित हमला और मारपीट की घटना सामने आई।
आरोप है कि भीड़ ने उनके सरनेम को लेकर निशाना बनाया, धक्का-मुक्की, कपड़े फाड़ने और गला दबाने की कोशिश की; पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें बचाया।
घटना के बाद छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए, जबकि UGC के नए नियमों और उनके विरोध को लेकर देशभर में तनाव और प्रदर्शन जारी हैं।
हिंदू समुदाय के पुराणों में ऐसा कहा गया है कि कलियुग में लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में झगड़ने लगेंगे और परिवार, समाज व रिश्तों में प्रेम कम होता जाएगा। लोगों के भीतर स्वार्थ, अहंकार, लोभ बढ़ेगा और यही विनाश का कारण बनेगा। वर्तमान समय की स्तिथि को देखें, तो मानों ऐसा लगता है कि कलयुग अपने चरम सीमा पर है।
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज के समय में शिक्षा संस्थान एक लड़ाई का अखाड़ा बन चुका है जहाँ से आपस में मार पिटाई खबर सामने आ रही हैं। आलम तो ऐसा है कि अब महिलाएं भी इसका शिकार हो रही हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जातिवाद के चक्कर में अब महिलाओं पर भी हमले होंगे? आइये समझते हैं पूरा मामला।
महिला पत्रकार के साथ मारपीट
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉर्थ कैम्पस अखाड़े में तब्दील हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहाँ UGC के जाति आधारित नियमों के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा था जहाँ विद्यार्थियों के कुछ भीड़ ने महिला पत्रकार रुचि तिवारी (Ruchi Tiwari) पर जानलेवा हमला कर दिया। हमला करने का कारण जो सामने आया है, वो है पत्रकार का कुलनाम (Surname) जो तिवारी है।
ये वर्ग जनरल कैटेगरी में आता है और इस समय भारत में इस वर्ग के लोगों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन उग्र है। आरोप है कि भीड़ ने रुचि को निशाना बनाया और उनके साथ मारपीट की। यहाँ तक की उनके कपड़े फाड़ने के साथ गला दबाने की भी कोशिश की। बड़ी मुश्किल से मौके पर मौजूद पुलिस ने महिला को बचाया और आरोपियों को हिरासत में लिया।
रोंगटे खड़े कर देने वाला है वीडियो
सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला है क्योंकि वीडियो में आप देख सकते हैं कि कई पुरुष और महिलाओं ने रूचि तिवारी (Ruchi Tiwari) को घेर रखा है। प्रदर्शनकारियों को जैसे ही पता चला कि रूचि का कुलनाम (Surname) तिवारी है, भीड़ उग्र हो गई। वीडियो में ऐसा कहते आप सुन सकते हैं कि यह ब्राम्हण है, इसे पकड़ो और मारो, तभी इसे सबक मिलेगा। इसके साथ ही वीडियो में यह भी सुना जा सकता है कि यहाँ कोई कुछ मत बोलना, वरना काटकर फेंक देंगे।
रूचि तिवारी ने सुनाई आपबीती
वहीं, जिस प्रकार से दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में रूचि तिवारी (Ruchi Tiwari) के साथ सलूक हुआ, उससे वो काफी सदमें में हैं। उन्होंने एक वीडियो के जरिये बयान जारी करते हुए पूरी दास्ताँ भी सुनाई। उन्होंने बताया कि वो वहां एक रिपोर्टर से बात कर रहीं थीं। तभी 100-150 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया, गला दबाया, कपड़े तक फाड़ दिए। रूचि ने यह भी कहा कि भीड़ चिल्लाकर यह भी कह रही थी कि इसे निर्वस्त्र कर दो।
इसके साथ ही जब उनके साथियों ने उसे बचाने की कोशिश की, तब उनके साथ भी मारपररत हुई और उल्टा उनके ऊपर ही महिलाओं से बदतमीजी करने का झूठा आरोप लगा दिया गया। रूचि का कहना है कि ये कैसा नारीवाद है जहाँ उन्हें बचाने के लिए एक भी व्यक्ति आगे नहीं आया।
ABVP-AISA ने एक दूसरे पर लगाया आरोप
इस घटना के बाद ABVP-AISA ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलना शुरू कर दिया। AISA जिसे लेफ्ट छात्र संगठन भी कहा जाता है, उन्होंने इसका आरोप ABVP पर लगा दिया। उन्होंने कहा कि इसके पीछे सारा खेल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का है। उनके कार्यकर्ताओं ने महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की।
वहीं, ABVP की तरफ से इस आरोप को ख़ारिज किया गया। राइट छात्र संगठन की ओर से कहा गया कि लेफ्ट के कुछ छात्रों को सवाल पसंद नहीं आया, जिसके बाद उन्होंने महिला पत्रकार से मारपीट की। AISA अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है, इसलिए झूठे आरोप और हिंसा का सहारा ले रही है।
छात्र क्यों कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन?
दरअसल, 13 जनवरी 2026 को UGC ने एक नया नियम लागू किया। इसका नाम है - 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026'. UGC के नए नियम के मुताबिक इससे SC/ST और OBC वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोका जाएगा लेकिन सवर्ण समाज ने इस नियम को एकतरफा बताया था, जिसके बाद काफी विरोध हुआ था। मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो न्यायालय ने 29 जनवरी 2026 को इन नियमों पर रोक लगा दी। अब इसपर सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी। हालांकि, अब इन नियमों को लागू करने के चक्कर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है।

