स्मृति शेष : 'गंगा मइया' से 'उमरिया कइली तोहरे नाम' तक, जब लता मंगेशकर की आवाज में घुली भोजपुरी की मिठास

भारत रत्न लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आज पुण्यतिथि है। लता जी ने हिंदी और मराठी के अलावा भोजपुरी सिनेमा को भी अपनी मधुर आवाज से सजाया। लता जी ने हिंदी और मराठी के अलावा भोजपुरी सिनेमा को भी अपनी मधुर आवाज से सजाया।
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को सफेद साडी में देखा जा सकता है।
भारत रत्न लता मंगेशकर की आज पुण्यतिथि है। लता जी ने हिंदी और मराठी के अलावा भोजपुरी सिनेमा को भी अपनी मधुर आवाज से सजाया।IANS
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स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, मगर हिंदी, मराठी समेत कई अन्य भाषाओं में गाए उनके गाने आज भी उनके खालीपन को भरने की कोशिश करते हैं। स्वर कोकिला की आज पुण्यतिथि (Death Anniversary) है। लता जी ने हिंदी और मराठी के अलावा भोजपुरी सिनेमा को भी अपनी मधुर आवाज से सजाया।

भोजपुरी फिल्मों (Bhojpuri Films) में उनके गाए गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं। उन्होंने भोजपुरी के शुरुआती दौर में अपनी आवाज देकर इस भाषा के संगीत को नई पहचान दी। इन गीतों में भक्ति, प्रेम और लोक संस्कृति की मिठास घुली हुई है। लता मंगेशकर के गाए भोजपुरी गानों की लिस्ट में 'हे गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' से 'उमरिया कइली तोहरे नाम' जैसे कई गाने मिल जाएंगे।

गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो :- यह साल 1963 में आई भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' का टाइटल सॉन्ग है। कुंदन कुमार के निर्देशन में बनी फिल्म में कुमकुम, असीम कुमार और नजीर हुसैन मुख्य भूमिकाओं में थे। विधवा पुनर्विवाह की कहानी पर आधारित फिल्म के गाने में लता मंगेशकर गंगा मइया से प्रार्थना करती हैं। उन्होंने भावना को इतनी सुंदरता से व्यक्त किया कि यह गीत भोजपुरी संस्कृति का हिस्सा बन गया। गाने को संगीत चित्रगुप्त ने दिया और बोल शैलेंद्र के लिखे थे।

लाली लाली होठवा से बरसे ललईया :- यह रोमांटिक गाना साल 1963 में रिलीज (Release) हुई फिल्म 'लागी नहीं छूटे राम' का है। फिल्म का निर्देशन कुंदन कुमार ने ही किया था। मुख्य कलाकार कुमकुम और असीम कुमार थे, साथ ही नजीर हुसैन भी थे। फिल्म प्रेम और समर्पण की कहानी पर आधारित थी। लता मंगेशकर ने अपनी मीठी आवाज में इस गाने को इतना आकर्षक बनाया कि यह भोजपुरी प्रेम गीतों में सदाबहार बना रहा। संगीत चित्रगुप्त का था। यह फिल्म भोजपुरी की शुरुआती सुपरहिट (Superhit) फिल्मों में शुमार है।

लुक छिप बदरा में :- यह गाना भी पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' से है। निर्देशक कुंदन कुमार की फिल्म में यह गाना रोमांटिक और छिप-छिप खेलने वाली भावना से भरा है। लता मंगेशकर की मधुर आवाज ने गीत को बेहद खूबसूरत बना दिया। इस गाने में संगीत चित्रगुप्त ने दिया था। जबकि, लिरिक्स शैलेंद्र ने लिखे थे। इस गाने ने फिल्म की सफलता में बड़ा योगदान दिया और भोजपुरी संगीत की शुरुआत को यादगार बनाया।

उमरिया कइली तोहरे नाम :- यह लता मंगेशकर के भोजपुरी करियर का पहला गाना माना जाता है। यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी सुना जाता है। गाने में समर्पण और जीवन को किसी के नाम करने की भावना है। लता जी ने इसे अपनी भावपूर्ण आवाज से बेहद खूबसूरत अंदाज में मार्मिक बनाया कि सुनने वाले भावुक हो जाते हैं। यह गाना भोजपुरी फिल्मों के शुरुआती दौर का हिस्सा है।

(PO)

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