निर्मला सीतारमण के बजट में मिडिल क्लास को क्या-क्या मिला? बदलेगी किस्मत या बढ़ेगा टैक्स का बोझ

1 फरवरी 2026 को संसद के पटल पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार के काम काज का लेखा जोखा पेश किया, जिसे आम भाषा में बजट कहा जाता है।
बजट की तस्वीर
1 फरवरी 2026 को संसद के पटल पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार के काम काज का लेखा जोखा पेश किया, जिसे आम भाषा में बजट कहा जाता है। इस बजट में कई तरह की घोषणाएं हैं। मोबाईल उपकरण से जुड़ी चीजें सस्ती करने का ऐलान हुआ है, तो सेमी-हाइस्पीड ट्रेन चलाने की भी बात हुई है AI Generated
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Summary
  • हेल्थ और रोजगार में राहत

  • इनकम टैक्स में बड़ी राहत नहीं

  • सीनियर सिटीजन और किसानों को निराशा

1 फरवरी 2026 को संसद के पटल पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सरकार के काम काज का लेखा जोखा पेश किया, जिसे आम भाषा में बजट कहा जाता है। इस बजट में कई तरह की घोषणाएं हैं। मोबाईल उपकरण से जुड़ी चीजें सस्ती करने का ऐलान हुआ है, तो सेमी-हाइस्पीड ट्रेन चलाने की भी बात हुई है लेकिन इसके इतर बजट जब भी आता है, तब-तब एक सवाल सबके मन में यही आता है और ये सवाल सरकार से पूछा भी जाता है कि आखिर मिडिल क्लास को क्या मिला?

एक मिडिल क्लास परिवार इस उम्मीद में रहता है कि बजट से उसकी जेब पर ज्यादा असर ना पड़े। तो चलिए ऐसे में समझते हैं कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा पेश किये गए इस बजट से मिडिल क्लास परिवार को राहत मिलेगी या टैक्स का बोझ बढ़ेगा।

दवाएं सस्ती होंगी

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने भाषण की शुरुआत में ही एक मिडिल क्लास परिवार को बड़ी सौगात दी। करीब 17 कैंसर की दवाओं पर शुल्क छूट (duty exemption) देने का ऐलान किया। अब इससे कैंसर की दवाएं सस्ती होंगी। साथ ही सरकार ने शुगर की बीमारी को राष्ट्रीय स्तर की परेशानी मानना शुरू कर दिया है।

ऐसे में इस बीमारी की दवा भी अब आम जनता को सस्ती मिलेंगी। साथ ही भारत सरकार ने सात अन्य दुर्लभ बीमारियों की दवाओं का निजी आयात शुल्क-मुक्त करने की घोषणा की है।

रोजगार के अवसर पैदा होंगे

बजट के दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने ऐलान किया कि पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक किया जाएगा। साथ ही पर्यटन, रेलवे और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के लिए आवंटन किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

सरकार ने टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी विशेष ध्यान दिया है। इसके लिए सरकार 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेज में क्रिएटर लैब की शुरुआत करेगी, इससे करीब 10 लाख नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।

इनकम टैक्स में राहत

सैलरीधारको पर भारत सरकार मेहरबान होते दिखी है। सरकार ने बस इतना ही किया कि नए टैक्स स्लैब (Tax Slab) में कोई बदलाव नहीं किया। पुरानी पॉलिसी में निरंतरता बनाए रखी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के इस ऐलान से कहीं ना कहीं मिडिल क्लास परिवार को राहत मिली होगी।

पहले 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय टैक्स से मुक्त थी, भारत सरकार ने उसे बरकरार रखा है। साथ ही छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई स्कीम का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे टैक्स अनुपालन आसान होगा और इससे माध्यम वर्ग को थोड़ी रहत भी मिली है।

वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि आईटीआर (ITR)-1 और आईटीआर (ITR)-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इससे लाखों वेतनभोगी और छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, ये कोई बहुत ज्यादा राहत भी नहीं है क्योंकि कहीं ना कहीं मिडिल क्लास परिवार इससे भी ज्यादा राहत की उम्मीद कर रहा था।

सीनियर सिटीजन को भी निराशा

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के बजट से सीनियर सिटीजन को राहत मिलती नहीं दिख रही है, खासकर वो लोग जो मिडिल क्लास परिवार से हैं। सीनियर सिटीजन (वैसे लोग जिनकी उम्र 60 से ऊपर है) उन्हें रेलवे किराए में छूट, बीमा योजनाओं में राहत और टीडीएस लिमिट बढ़ने जैसी उम्मीदें थीं लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बजट में नए रेल कॉरिडोर का ऐलान हुआ है लेकिन इससे सीनियर सिटीजन को कोई फायदा होता नज़र नहीं आ रहा है।

किसानों को क्या मिला?

किसान देश का अन्नदाता है और उसे उम्मीद थी कि बजट से उसे राहत मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्हें उम्मीद थी कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) पीएम किसान सम्मान निधि को 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करेंगी। MSP को लेकर बड़े ऐलान करेंगी लेकिन इस बजट में दोनों मोर्चों पर ग्रामीण और किसान वर्ग को कोई राहत नहीं मिली है।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि मिडिल क्लास को बजट से बहुत ज्यादा उम्मीद थी लेकिन ना तो इस बजट से राहत मिली और ना ही कोई बड़ा तोहफा। मिडिल क्लास बिचौलिया बनकर ही रह गया। ना फायदा ना नुकसान।

बजट की तस्वीर
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