अक्सर जब दुनिया में हिंदू आबादी की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले भारत का नाम आता है। लेकिन यह जानकर कई लोगों को हैरानी होगी कि भारत के बाहर भी ऐसे कई देश हैं जहाँ लाखों नहीं बल्कि करोड़ों हिंदू रहते हैं। सूरीनाम, त्रिनिदाद, टोबैगो जैसे देशों में तो 37%- 42% लोग हिंदू ही है जो 1834 में भारत से इन वेस्ट इंडीज के देशों में मजदूर बन कर गए थें। दिलचस्प बात यह है कि इन देशों के अलावा कई मुस्लिम बहुल देश भी हैं, जहां हिंदू समुदाय के लोग सदियों से अपनी परंपराओं, मंदिरों और त्योहारों के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं।
दरअसल, इतिहास में भारत का कई देशों के साथ व्यापार, संस्कृति और धार्मिक संबंध रहे हैं। कभी प्राचीन हिंदू-बौद्ध साम्राज्यों का प्रभाव रहा, तो कभी भारत के विभाजन और बाद में हुए माइग्रेशन के कारण लोग दूसरे देशों में जाकर बस गए। यही वजह है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे देशों में बड़ी संख्या में हिंदू निवास करते हैं। कहीं उनकी आबादी करोड़ों में है, तो कहीं कुल जनसंख्या में उनका अच्छा-खासा प्रतिशत देखने को मिलता है। अब सवाल यह है कि इन देशों में हिंदुओं की संख्या कितनी है, उनका प्रतिशत कितना है और वे वहाँ कब और कैसे बसे। आइए एक एक कर इसका जवाब ढूंढ़ते हैं।
बांग्लादेश (Bangladesh) एक मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहाँ आज भी बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। वर्तमान समय में बांग्लादेश की कुल आबादी लगभग 17 करोड़ के आसपास है, जिसमें लगभग 1.3 से 1.4 करोड़ हिंदू रहते हैं। यानी कुल आबादी का करीब 8–9% हिस्सा हिंदू समुदाय का है। जब 1947 में Partition of India हुआ और पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) भारत से अलग हुआ, तब वहाँ हिंदुओं की आबादी लगभग 28–30% थी। उस समय पूर्वी पाकिस्तान में करीब 2.2 से 2.5 करोड़ हिंदू रहते थे। लेकिन विभाजन के बाद कई दंगों और असुरक्षा के कारण बड़ी संख्या में हिंदू भारत के पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम की ओर आ गए।
इसके बाद 1971 में जब बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हुआ, तब वहाँ हिंदुओं की आबादी घटकर लगभग 13–14% रह गई थी। युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगियों द्वारा हिंदू समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। अनुमान है कि लाखों हिंदू शरणार्थी बनकर भारत आए। आज भी समय-समय पर मंदिरों पर हमले, जमीन कब्जाने और साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। हालांकि इसके बावजूद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय अपनी परंपराएँ, त्योहार और संस्कृति को आज भी बनाए हुए है।
पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहाँ आज भी हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। वर्तमान समय में पाकिस्तान की कुल आबादी लगभग 24–25 करोड़ है, जिनमें करीब 40–45 लाख हिंदू रहते हैं। यानी कुल आबादी का लगभग 1.8–2% हिस्सा हिंदू समुदाय का है। पाकिस्तान में ज़्यादातर हिंदू सिंध प्रांत में रहते हैं। जब 1947 में Partition हुआ और भारत का विभाजन करके पाकिस्तान बनाया गया, तब पश्चिमी पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान) में हिंदुओं की आबादी लगभग 12–15% के आसपास थी। विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर दंगे और हिंसा हुई, जिसके कारण लाखों हिंदू और सिख भारत की ओर पलायन कर गए।
समय के साथ पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कम होती गई। कई हिंदू परिवार भारत में बस गए, जबकि कुछ वहीं रहकर व्यापार, खेती और छोटे कामों में लगे रहे। पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को कई बार भेदभाव और हमलों का सामना करना पड़ता है। मंदिरों पर हमले, जबरन धर्म परिवर्तन और जमीन कब्जाने जैसी घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान के हिंदू आज भी अपनी परंपराओं और त्योहारों को मनाते हुए वहाँ रह रहे हैं।
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है, फिर भी यहाँ लगभग 40- 45 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी का करीब 1- 2% हैं। इसका कारण प्राचीन इतिहास है। कई सदियों पहले यहाँ हिंदू-बौद्ध साम्राज्य थे और भारत से व्यापार तथा संस्कृति का गहरा प्रभाव पड़ा था। आज भी इंडोनेशिया के बाली द्वीप में अधिकांश लोग हिंदू धर्म को मानते हैं और वहाँ के मंदिर, त्योहार और रीति-रिवाज भारतीय संस्कृति से मिलते-जुलते हैं।
मलेशिया एक मुस्लिम-बहुल देश है, लेकिन यहाँ हिंदू धर्म मानने वाले लोगों की बड़ी आबादी रहती है। 2020 के आँकड़ों के अनुसार मलेशिया में लगभग 19–20 लाख हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 6% हैं। यहाँ के अधिकतर हिंदू भारतीय मूल (खासकर तमिल) के हैं। हिंदू लोगों का मलेशिया पहुँचना मुख्य रूप से ब्रिटिश उपनिवेश काल (19वीं–20वीं सदी) में हुआ। उस समय ब्रिटिश सरकार भारत के दक्षिणी राज्यों से मजदूरों को रबर बागानों, टिन खदानों और खेती में काम कराने के लिए मलाया (आज का मलेशिया) लेकर आई थी। कई मजदूर स्थायी रूप से वहीं बस गए और बाद में अपने परिवारों को भी बुला लिया।
आज मलेशिया के कई शहरों जैसे कुआलालंपुर, पेनांग और सेलांगोर में हिंदू मंदिर, सांस्कृतिक संस्थाएँ और भारतीय परंपराएँ देखने को मिलती हैं। इस तरह ऐतिहासिक प्रवासन और औपनिवेशिक मजदूरी व्यवस्था के कारण यहाँ एक बड़ा हिंदू समुदाय विकसित हुआ।
कतर भी एक मुस्लिम-बहुल खाड़ी देश है, लेकिन यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी कामगार रहते हैं जिनमें हिंदू भी शामिल हैं। अनुमान के अनुसार कतर में लगभग 3–4 लाख हिंदू रहते हैं, जिनमें अधिकतर भारतीय और नेपाली प्रवासी मजदूर तथा पेशेवर कर्मचारी हैं। कतर में हिंदू समुदाय का विकास मुख्य रूप से 1970 के बाद तेल और गैस उद्योग के विस्तार के कारण हुआ। जब देश में निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़े, तब भारत, नेपाल और दक्षिण एशिया से लाखों लोग रोजगार के लिए यहाँ आए। इनमें इंजीनियर, आईटी पेशेवर, दुकानदार और निर्माण श्रमिक शामिल हैं।
आज कतर की कुल आबादी में बड़ी संख्या प्रवासी लोगों की है, इसलिए हिंदू समुदाय भी मुख्य रूप से कामकाजी प्रवासी समुदाय के रूप में मौजूद है। हालांकि यहाँ भारत की तरह बड़े मंदिर कम हैं, लेकिन भारतीय समुदाय घर या सामुदायिक सभाओं में पूजा-पाठ और त्योहार मनाता है, जैसे दीवाली और नवरात्रि।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक इस्लामी देश है, लेकिन यहाँ बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार यहाँ लगभग 11–12 लाख हिंदू हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 6–15% तक हो सकते हैं।
यहाँ के अधिकांश हिंदू भारतीय और नेपाली प्रवासी हैं। उनका यहाँ पहुँचना मुख्य रूप से व्यापार और रोजगार के कारण हुआ। 20वीं सदी की शुरुआत में कुछ भारतीय व्यापारी खाड़ी के तटीय शहरों जैसे दुबई और शारजाह में व्यापार करने आए थे। बाद में 1970 के दशक के बाद तेल उद्योग के विकास और तेज आर्थिक वृद्धि के कारण लाखों भारतीय मजदूर, इंजीनियर, डॉक्टर और व्यापारी यहाँ काम करने के लिए आने लगे। आज दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में हिंदू मंदिर, सांस्कृतिक संगठन और भारतीय त्योहार जैसे दीवाली और होली भी मनाए जाते हैं। हाल के वर्षों में अबू धाबी में एक भव्य हिंदू मंदिर भी बनाया गया है, जो वहाँ के भारतीय समुदाय की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, यह साफ होता है कि हिंदू धर्म केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें दुनिया के कई देशों तक फैली हुई हैं। अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं, व्यापारिक संबंधों, सांस्कृतिक प्रभाव और लोगों के प्रवास की वजह से आज भी कई देशों में हिंदू समुदाय बड़ी संख्या में रहता है। खास बात यह है कि अलग देश और अलग परिस्थितियों के बावजूद ये लोग अपनी परंपराओं, त्योहारों और संस्कृति को आज भी पूरी श्रद्धा और गर्व के साथ निभा रहे हैं। यही कारण है कि हिंदू संस्कृति की झलक आज दुनिया के कई कोनों में देखने को मिलती है। [SP/MK]