पाकिस्तान में बाल विवाह को लेकर बढ़ती चिंता, किशोरियों से छीना जा रहा बचपन IANS
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पाकिस्तान में बाल विवाह को लेकर बढ़ती चिंता, किशोरियों से छीना जा रहा बचपन

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रमुख संगठन 'पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की आवाज़' ने पंजाब प्रांत में बाल विवाह की लगातार जारी प्रथा पर गंभीर चिंता जताई है।

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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रमुख संगठन 'पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की आवाज़' ने पंजाब प्रांत में बाल विवाह की लगातार जारी प्रथा पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि भेदभावपूर्ण कानून और सामाजिक परंपराएं अब भी हजारों लड़कियों से उनका बचपन, शिक्षा और बुनियादी अधिकार छीन रही हैं।

संगठन ने पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब प्रांत में 15 प्रतिशत बच्चों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले कर दी जाती है। वीओपीएम ने इसे “चुराया गया बचपन” करार देते हुए कहा कि कम उम्र की लड़कियों को स्कूलों से निकालकर जबरन विवाह के लिए मजबूर किया जा रहा है।

अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान का कानूनी ढांचा लंबे समय से लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता रहा है। संगठन के अनुसार, लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कियों के लिए 16 वर्ष निर्धारित करना “संस्थागत असमानता” को सामान्य बनाने जैसा है।

कानूनी सुरक्षा उपायों की कमी पर चिंता जताते हुए वीओपीएम ने कहा कि कानूनों का मूल उद्देश्य कमजोर वर्गों की रक्षा करना होता है, लेकिन यहां संवेदनशीलता और न्याय को नजरअंदाज किया जा रहा है।

संगठन ने कहा, “हम खुद को यह समझाकर संतुष्ट कर लेते हैं कि अन्याय हमारे दरवाजे तक नहीं पहुंचा, इसलिए वह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हम इतने अलग-थलग हो चुके हैं कि दुष्कर्म, मातृ मृत्यु और हिंसा जैसे अपराधों के चक्र को जारी रहने दें?”

वीओपीएम ने कहा कि पाकिस्तान में सुधारों का विरोध करने वाले लोग सीधे तौर पर बाल विवाह का समर्थन नहीं करते, बल्कि धार्मिक तर्क देकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।

संगठन के मुताबिक, “सबसे बड़ा डर यह है कि सवाल उठाने वालों को ईशनिंदा का आरोपी ठहरा दिया जाता है। ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान’ के नाम पर कई लोग सुधारों को ही खतरा मानने लगते हैं।”

वीओपीएम ने कहा कि यह बहस “धर्म बनाम कानून” की नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी की है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान के कानूनों में मौजूद खामियां शोषण को बढ़ावा देती हैं और कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाने वालों को संरक्षण देती हैं।

संगठन ने कहा कि भेदभावपूर्ण कानूनी प्रावधान बाल विवाह से होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसान की वास्तविकता को नजरअंदाज करते हैं, जिसके दुष्प्रभाव जीवनभर बने रहते हैं।

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)