विघारानी ने वकालत की पढ़ाई श्री जगद्गुरु रेणुकाचार्य कॉलेज ऑफ लॉ से की है। वो कई साल वकील और एक्टिविस्ट के तौर पर काम कर चुकी हैं। साल 2020 में विघारानी बीजेपी में शामिल हुई थीं और उन्होंने यूथ ब्रिगेड की उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया। इसके बाद वह 2024 में नाम तमिलर काची पार्टी में शामिल हुईं, जो कि निर्देशक और एक्टर सीमान की पार्टी है। 2024 में विघारानी ने नाम तमिझार कात्ची के टिकट पर लोकसभा चुनाव कृष्णागिरी सीट से लड़ा था। 2026 में मेट्टूर सीट से चुनाव लड़ रही हैं।  X
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026

तमिलनाडु चुनाव में गूंज रहा है कुख्यात वीरप्पन का नाम ! पत्नी और बेटी इन सीटों से चुनावी मैदान में, जानिए पूरा मामला

तमिलनाडु में कुख्यात वीरप्पन डाकू की चर्चा तेज हो गई है। वीरप्पन का परिवार चुनावी रण में कूद चुका है। साल 2004 में पति वीरप्पन के मर जाने के बाद मुतुलक्ष्मी ने मेत्तूर (Mettur) विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। लेकिन चुनाव में आशाजनक सफलता हाथ नहीं आई और हार का सामना करना पड़ा था।

Author : Pradeep Yadav

तमिलनाडु में चुनावी पारा चरम पर है। सियासी दलों के बीच खींचतान जारी है। डीएमके और एआईडीएमके के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। इस चुनाव के बीच तमिलनाडु में कुख्यात वीरप्पन डाकू की चर्चा तेज हो गई है। वीरप्पन का परिवार चुनावी रण में कूद चुका है। आइए समझते हैं कि वीरप्पन का परिवार चर्चा में क्यों हैं

वीरप्पन का परिवार चुनावी मैदान में !

दरअसल, वीरप्पन की पत्नी मुतुलक्ष्मी और बेटी विघारानी तमिलनाडु चुनाव में खड़ी हैं। वीरप्पन की बेटी विघारानी मेट्टूर सीट से चुनाव लड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मुतुलक्ष्मी कृष्णागिरी से तामिलागा वाझवुरिमाई काची सीट पर उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हैं। वीरप्पन की पत्नी और बेटी दोनों तमिलर काची पार्टी से चुनाव में उतरी हैं। 

बता दें कि विघारानी ने वकालत की पढ़ाई श्री जगद्गुरु रेणुकाचार्य कॉलेज ऑफ लॉ (Shri Jagadguru Renukacharya College of Law) से की है। वो कई साल वकील और एक्टिविस्ट के तौर पर काम कर चुकी हैं। साल 2020 में विघारानी बीजेपी में शामिल हुई थीं और उन्होंने यूथ ब्रिगेड की उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया। इसके बाद वह 2024 में नाम तमिलर काची पार्टी में शामिल हुईं, जो कि निर्देशक और एक्टर सीमान की पार्टी है। 2024 में विघारानी ने नाम तमिझार कात्ची (Naam Tamilar Katchi - NTK) के टिकट पर लोकसभा चुनाव कृष्णागिरी सीट से लड़ा था। राजनीति से पहले उन्होंने कई साल वकील और एक्टिविस्ट के तौर पर काम किया। विघारानी आदिवासियों और दलितों के अधिकारों के लिए काम करती रहती हैं। 

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कौन थे वीरप्पन ?

18 जनवरी, 1952 को कर्नाटक के चामराजनगर जिला में गोपीनाथम गाँव में हुआ था। वीरप्पन का परिवार बहुत गरीब था। अभाव से भरी जिंदगी को चुनौती देने के लिए वीरप्पन ने बड़ा होकर अपराध की दुनिया में कदम रखा। वीरप्पन शुरू में हाथी दांत का व्यापार करता था। लेकिन बाद में उसपर प्रतिबंध लगने की वजह से अच्छी सफलता नहीं मिली। इसके बाद वीरप्पन ने चंदन की लकड़ी को अपने जुर्म की दुनिया का आधार बनाया। कई सारे रिपोर्ट्स के मुताबिक वीरप्पन ने महज 17 साल में वनरक्षक की हत्या कर दी थी। 1970 के दशक में अपने जीवन में विरप्पन ने वनरक्षक की हत्या करके महज कुछ ही समय में अपराध की दुनिया में एक साम्राज्य खड़ा कर दिया था। पुलिस और वीरप्पन के बीच बहुत बार संघर्ष हुए। तमिलनाडु पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बहुत दिनों तक वीरप्पन के पीछे पड़ी हुई थी। 18 अक्टूबर, 2004 वीरप्पन के जीवन का अंतिम दिन था क्योंकि वीरप्पन को पुलिस ने बड़ी चालाकी से घेर लिया था। वीरप्पन के साथ सेथुकुली गोविंदन, चंद्र गौड़ और एलुमलई भी पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। 

साल 2004 में पति वीरप्पन के मर जाने के बाद मुतुलक्ष्मी ने मेत्तूर (Mettur) विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। लेकिन चुनाव में आशाजनक सफलता हाथ नहीं आई और हार का सामना करना पड़ा था। 2026 के चुनाव में मुतुलक्ष्मी ने कृष्णागिरी सीट से दावेदारी कर दिया है और प्रचार भी जोर-शोर से हो रहा है।

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