TVK को 100 से अधिक सीटों की बढ़त से 4 मई 2026 की तारीख राज्य की राजनीति का टर्निंग प्वाइंट बन गया है। स्टालिन बहुमत से दूर हैं, डीएमके दफ्तर में सन्नाटा है  IANS
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026

तमिलनाडु : थलपति विजय की TVK को 100+ सीटों की बढ़त, जानिए किसके साथ करेंगे गठबंधन

तमिलनाडु की आधी सदी पुरानी डीएमके-एआईएडीएमके की द्विध्रुवीय राजनीति को थलपति विजय की TVK ने तोड़ा, 100 से अधिक सीटों की बढ़त के साथ सत्ता की चाबी अब संभावित गठबंधनों और नए मुख्यमंत्री चेहरे पर टिकी

Author : Pradeep Yadav

  • तमिलनाडु में पाँच दशकों से डीएमके-एआईएडीएमके के बीच चल रहे द्विध्रुवीय समीकरण को थलपति विजय ने इस चुनाव में तोड़ दिया। TVK को 100 से अधिक सीटों की बढ़त से 4 मई 2026 की तारीख राज्य की राजनीति का टर्निंग प्वाइंट बन गया है। स्टालिन बहुमत से दूर हैं, डीएमके दफ्तर में सन्नाटा है और अब सरकार गठन के लिए कांग्रेस, एआईएडीएमके व अन्य दलों के साथ संभावित गठबंधनों पर अटकलें तेज हो गई हैं।

पाँच राज्यों के चुनावी नतीजों ने सबको चौंका दिया है। इसी बीच तमिलनाडु से बड़ी खबर निकलकर आ रही है कि थलपति विजय स्टालिन को कड़ी टक्कर देते हुए काफी आगे निकल चुके हैं। उनके घर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। वहीं डीएमके के पार्टी कार्यालय पर सन्नाटा छाया हुआ है।

विजय को मिल रही बढ़त !

4 मई 2026 की तारीख तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ ला रहा है। विजय थलपति ने स्टालिन को कड़ी टक्कर दी है।डाक मतपत्रों समेत सभी 75,064 मतदान केंद्रों के वोटों की गिनती पूरे राज्य में 62 निर्धारित मतगणना केंद्रों पर जारी रही। लगभग 1.25 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात थे और मतगणना केंद्रों व हॉलों में प्रवेश की अनुमति प्राप्त सभी अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के लिए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र अनिवार्य किया गया था।

कैसे बदल गया तमिलनाडु का समीकरण ?

तमिलनाडु में पिछले पांच दशक से एआईएडीएमके और डीएमके के बीच राजनीतिक घमासान चल रहा था। इस बार तमिलनाडु की राजनीति में विजय थलपति ने अलग धुरी की तरह काम किया। इस चुनाव में थलपति ने तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दे दी। विजय ने साफ कहा था कि बीजेपी उनकी विचारधारात्मक विरोधी है। डीएमके के खिलाफ जो विरोध था, उसका फायदा विजय की पार्टी TVK को मिला। यही कारण रहा कि भाजपा जैसी पार्टी को तमिलनाडु में उतना फायदा नहीं मिल सका जितना कि उम्मीद जताई जा रही थी। कुछ सीटों को छोड़कर परिणाम लगभग पूरी तरीके से आ चुका है लेकिन इस बार के चुनाव में स्टालिन को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ है।

बहुमत हासिल न होने पर कैसे बनेगी सरकार ?

तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 118 है। किसी भी दल को बहुमत न मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री की कुर्सी किसके हाथ लगेगी, यह बड़ा सवाल है। अगर विजय थलपति को सबसे अधिक सीट मिल रही है, तो सवाल ये भी है कि गठबंधन के लिए कौन-कौन सी संभावनाएं हो सकती है। ज्ञात हो कि थलपति ने पार्टी बनाते वक्त ये साफ कर दिया था कि बीजेपी के साथ वैचारिक लड़ाई जारी रहेगी। हाल ही में उन्होंने पूरी कांग्रेस पर यह बयान दिया था कि तमिलनाडु कांग्रेस डीएमके के हाथ में है, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि विजय कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सकते हैं।

दूसरी तरफ ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि एआईएडीएमके के लोग भी विजय से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। अगर बीजेपी का साथ छोड़कर एआईएडीएमके विजय के साथ गठबंधन करता है तो सियासत का नया समीकरण बन सकता है। वहीं डीएमके से भी विजय के संबंध अच्छे हैं लेकिन काम करने के तरीके को लेकर दोनों में असहमति है। विजय की पार्टी TVK 100 से ऊपर सीट जीत रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का चेहरा TVK से ही बनाया जा सकता है। देखना यह है कि विजय खुद मुख्यमंत्री बनते हैं या फिर अपने पार्टी के किसी कार्यकर्ता को सीएम का चेहरा बनाएंगे, क्योंकि विजय अभी तक चौंकाने वाले फैसले बहुत बार ले चुके हैं। हालांकि दो सीटों से चुनाव लड़ना यह साबित करता है कि तमिलनाडु की राजनीति को लेकर वह बेहद गंभीर हैं।

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डीएमके कैसे पीछे छूट गई ?

तमिलनाडु में हिन्दी और हिन्दू विरोध की राजनीति के जरिये सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही डीएमके के नेता एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन को एक तो सत्ता विरोधी लहर और दूसरा सनातन विरोधी उनकी पार्टी की विचारधारा ने जनता के दिल से उतार दिया। बता दें कि तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन ने इस बार पूरा चुनावी अभियान 'हिन्दी' विरोध और 'द्रविड़ पहचान' पर केंद्रित कर दिया था। जो वहां की जनता को पसंद नहीं आया। वैसे 'हिन्दी विरोध' तमिलनाडु की राजनीति का नया मुद्दा नहीं है। राज्य में भाषा और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति लंबे समय से चल रही है। डीएमके तो इसी विचारधारा के साथ राज्य की राजनीति में आई ही थी। लेकिन इस बार डीएमके का हिन्दी विरोध वाला मुद्दा नहीं चल पाया। यहीं विजय को मौका मिल गया।

जानकारी के लिए बता दें कि TVK प्रमुख विजय की पार्टी को विजय दिलाने में प्रशांत किशोर ने भी अप्रत्यक्ष तौर पर मदद की है। विजय अपने इस चुनाव में बिहार के प्रशांत किशोर से सलाह मशवरा करते रहे। विजय ने फरवरी 2025 में पार्टी का एक कार्यक्रम महाबलीपुरम में रखा था। प्रशांत किशोर ने विजय के साथ मंच भी साझा किया था। इससे साबित होता है कि दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं और प्रशांत ने एक सलाहकार के तौर पर विजय को समय-समय पर सलाह भी दिया है।

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