2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु की सियासत में हार-जीत का अंतर बेहद कम रहा है। राज्य की 39 सीटें ऐसी थीं, जहाँ जीत-हार का अंतर 5,000 वोटों से भी कम था। इसमें से 8 सीटों पर तो यह अंतर 1,000 वोटों से भी कम रहा, जो यह दर्शाता है कि मामूली सा स्विंग भी सत्ता पलट सकता है।
तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच जुबानी जंग जारी है। सीएम स्टालिन ने तमिलनाडु की कुर्सी एक बार पुनः जीतने के लिए सारे योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ बीजेपी ने एआईएडीएमके के सहारे तमिलनाडु में कुर्सी पर कब्जा करने की रणनीति बना ली है। तमिलनाडु चुनाव-2026 के चुनावी चर्चा में एक नया मोड़ आ गया है। पिछले बार के चुनावी आंकड़ों ने डीएमके के लिए चिंता का विषय खड़ा कर दिया है।
तमिलनाडु में दो दलों के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। 2021 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों को ध्यान से देखें तो ये नतीजे इशारा करते हैं कि कुछ सीटों पर डीएमके और एआईडीएमके के वोट प्रतिशत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। तमिलनाडु चुनाव 2021 में विपक्षी NDA गठबंधन को कुल 75 सीटों पर जीत मिली थी और वह बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से 43 सीट दूर था। हैरानी की बात है कि राज्य की 39 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत हार का अंतर 5000 से भी कम वोटों का था।
दरअसल 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 8 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर 1000 वोट से भी कम था। इनमें से 5 सीटों पर डीएमके वाले SPA को जीत मिली और NDA को तीन सीटों पर जीत मिली थी। 11 सीटें ऐसी थीं जहां जीत और हार का अंतर लगभग 1000 से 2000 वोटों का था। इन 11 सीटों में से 7 सीटों पर SPA और 4 सीटों पर NDA को जीत मिली थी। वहीं 5 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर लगभग 2 से 3 हजार वोटों के बीच था। इसमें से 3 पर SPA और 2 पर NDA को जीत मिली थी। इसके अलावा 3 से 4 हजार के अंतर वाली कुल 7 सीटों में से एनडीए को 4 और SPA को तीन सीटों पर जीत मिली थी। इसी तरह 8 सीटें ऐसी थीं जिन पर हार और जीत का अंतर 4 से 5 हजार वोटों के बीच था। इनमें से 5 पर SPA तो 3 सीटों पर NDA को जीत मिली थी।
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तमिलनाडु चुनाव 2026 में तीसरे फ्रंट के रूप में थलापति विजय ने अपनी पार्टी TVK को उतारा है। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि TVK इन दोनों गठबंधन एनडीए और SPA के वोटरों में सेंध लगा सकते हैं। इस हिसाब से पिछली बार जिन सीटों पर जीत और हार का सामना करना पड़ा था उन सीटों पर पार्टियों के जीत हार में बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। यह बिल्कुल निश्चित तौर पर कहना गलत होगा कि पिछले चुनाव में जिन पार्टियों ने जिन सीटों पर जीत हासिल की थी वे पुनः उसी सीट को जीत पाएंगी।जिन सीटों पर जीत हार के बहुत मामूली अंतर था वहाँ इसका प्रभाव ज्यादा पड़ सकता है।
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