केरल के पर्यटन विभाग की मानव संसाधन विकास शाखा, केरल इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल स्टडीज (केआईटीटीएस), ने अंतर-राज्यीय सहयोग को नई दिशा देते हुए तमिलनाडु के पर्यटन अधिकारियों के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम केरल के टिकाऊ और नवोन्मेषी पर्यटन मॉडलों पर केंद्रित है, जिनकी देश-विदेश में सराहना की जाती रही है।
इस पहल का उद्देश्य दक्षिण भारत में पर्यटन क्षेत्र को अधिक सशक्त, समन्वित और प्रतिस्पर्धी बनाना है। पर्यटन एवं लोक निर्माण मंत्री पीए मोहम्मद रियास ने तिरुवनंतपुरम स्थित केआईटीटीएस परिसर से इस कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन किया। कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के राज्य और जिला स्तर पर कार्यरत 60 पर्यटन सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। दो चरणों में आयोजित इस प्रशिक्षण का पहला सत्र बुधवार से शुरू हुआ, जबकि दूसरा सत्र 10 से 12 मार्च तक आयोजित किया जाएगा।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मंत्री रियास ने दक्षिण भारत में पर्यटन की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केरल अपने सफल मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सामूहिक विकास को बढ़ावा मिल सके और पूरे क्षेत्र को इसका लाभ हो। सहयोगात्मक दृष्टिकोण से ही सतत और जिम्मेदार पर्यटन को मजबूती मिल सकती है।
पर्यटन सचिव के. बिजू ने क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और संस्थागत क्षमता निर्माण के लिए केआईटीटीएस की भूमिका की सराहना की। इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में केरल की विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘जिम्मेदार पर्यटन’ (आरटी) पहलों, टिकाऊ गंतव्य प्रबंधन, प्रभावी ब्रांडिंग और प्रचार रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया है। इन मॉडलों का उद्देश्य पर्यटन विकास को पर्यावरणीय संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को नीतिगत ढांचों और कार्यान्वयन तंत्रों का व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाएगा, जिन्होंने केरल को समुदाय-आधारित और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील पर्यटन विकास का एक उदाहरण बनाया है।
विशेषज्ञ सत्रों, केस स्टडी और संवादात्मक चर्चाओं के माध्यम से अधिकारियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। यह पहल अगस्त 2025 में हुई उन चर्चाओं पर आधारित है, जब केआईटीटीएस के एक प्रतिनिधिमंडल ने चेन्नई में तमिलनाडु पर्यटन विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर कौशल विकास, मानव संसाधन प्रशिक्षण और पर्यटक गाइड प्रमाणन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया था। आगे चलकर इस सहयोग के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रस्ताव है कि तमिलनाडु के जिला कलेक्टर केरल के जिला पर्यटन संवर्धन परिषद (डीटीपीसी) मॉडल और ‘डेस्टिनेशन चैलेंज’ ढांचे का अध्ययन करने के लिए केरल का दौरा करेंगे। अधिकारियों ने इस पहल को संरचित “पर्यटन कूटनीति” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जिसका लक्ष्य साझा विशेषज्ञता और संस्थागत साझेदारी के माध्यम से दक्षिण भारत में एक लचीला, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। [SP]