राहुल गांधी ने केरल चुनाव-2026 में रबर की किसानी करने वालों से वादा किया है। कांग्रेस की सरकार (यूडीएफ सरकार) बनने पर रबर के किसानों को 250 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य दिलाया जाएगा। राहुल गांधी के इस बयान ने केरल की सियासत में खलबली मचा दिया है। X
केरल विधानसभा चुनाव 2026

केरल चुनाव 2026: राहुल गांधी का बड़ा दांव, रबर किसानों को इतने रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य का वादा, सियासत में मचा घमासान

रबर की गिरती कीमतों और घटते उत्पादन के बीच राहुल गांधी का समर्थन मूल्य दांव, ईसाई बहुल रबर बेल्ट में परंपरागत वोट बैंक साधने की कांग्रेस की कोशिशें तेज

Author : Pradeep Yadav

केरल में हर साल लगभग 6 लाख टन से ज्यादा रबर का उत्पादन होता है। रबर का उत्पादन करने वाले किसान गरीबी में जी रहे हैं। राहुल गांधी ने केरल चुनाव-2026 में रबर की किसानी करने वालों से वादा किया है। वादे के मुताबिक, कांग्रेस की सरकार (यूडीएफ सरकार) बनने पर रबर के किसानों को 250 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य दिलाया जाएगा। राहुल गांधी के इस बयान ने केरल की सियासत में खलबली मचा दिया है।

रबर किसानों पर से विशेष वादा क्यों ? 

केरल में रबर उत्पादन करने वाले किसानों का वोट बहुत अधिक मात्रा में है। इन किसानों का वोट साधने हेतु राजनीतिक दलों में खींचतान जारी है। इसी क्रम में राजनीतिक दलों द्वारा अलग-अलग लोकलुभावन वादों की बरसात की जा रही है। राहुल गांधी ने भी कांग्रेस के परंपरागत वोट को बरकरार रखने के लिए रबर के किसानों से वादा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि केरल में यूडीएफ की सरकार बनी तो केरल के रबर किसानों को 250 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य दिया जाएगा। इस बयान से सियासी पारा अब हाई हो चुका है। केरल के जिस इलाके से राहुल गांधी ने यह बयान दिया है वहां ईसाई लोगों की संख्या बहुत अधिक है।

केरल के तटीय इलाकों में कैथोलिक ईसाइयों की संख्या अधिक मात्रा में है। लगभग 20 लाख लोगों की आजीविका का आधार रबर की खेती है। इन परिवारों के वोट को साधने में हर दलों द्वारा भरपूर कोशिश किया जा रहा है। 10 साल से सत्ता से बाहर यूडीएफ को जीत दिलाने के लिए राहुल गांधी ने यह बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि 2016 में लेफ्ट ने वादा किया था कि रबर की कीमत 250 करेंगे। 2026 में ये लोग 200 रुपये दे रहे हैं। मैं वादा करता हूं कि यूडीएफ सरकार बनी तो पहली कैबिनेट मीटिंग में रबर का दाम 250 रुपये प्रति किलो किया जाएगा और आने वाले समय में इसे और भी बढ़ाया जा सकता है। 

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क्या हाल है रबर की खेती का ?

केरल में रबर की खेती करने वालों की हालत अच्छी नहीं है। किसानों को मिलने वाला औसत दाम 170 रुपये से भी कम है। बता दें कि रबर का एक नया पेड़ लगाने पर उसमें से रबर कम से कम 5 से 7 साल बाद निकलना शुरू होता है। इतने समय तक कोई कमाई नहीं हो होती। एक पेड़ से जब रबर निकलना शुरू होता है तो 25 से 40 साल तक रबर निकालता रहता है लेकिन जो पेड़  पुराने हो जाते हैं उनसे रबर नहीं निकलता है। 

सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है कि रबर बोर्ड का बजट साल 2021-22 में 190 करोड़ था और इसको 2025-26 में बढ़ाकर 360.31 करोड़ रुपये कर दिया गया लेकिन रबर उत्पादन में लगातार कमी देखी जा रही है।  2013-14 में जो उत्पादन 1629 किलो प्रति हेक्टेयर था वह 2023-24 में घटकर 1485 किलो प्रति हेक्टेयर हो गया। यह दिखाता है कि रबर उत्पादन से किसानों का मोह भंग हो रहा है और घरेलू स्तर पर रबर की मांग पूरी नहीं हो हो रही है। नतीजतन भारत में रबर आयात करना पड़ता है। 

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में चर्च ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही थी। बीजेपी को इसका फायदा मिलते दिखाई दिया। इस बार केरल चुनाव 2026 में यूडीएफ ने अपने परंपरागत वोट को फिर से खींचने के लिए चाल दी है। देखना यह है कि इसका फायदा कांग्रेस को मिलता है या नहीं। 

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