दिल्ली के ओखला फेज-2 से सामने आया एक बड़ा खुलासा हर उस परिवार के लिए चिंता का विषय है, जो रोजमर्रा में बोर्नविटा, मैगी, हॉर्लिक्स और दूसरे नामी ब्रांड्स के खाद्य उत्पाद खरीदता है। 2 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो की मौजूदगी में दिल्ली पुलिस, FSSAI और अन्य एजेंसियों ने ओखला इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री पर छापेमारी की। जांच में पता चला कि यहां नामी कंपनियों के नकली रैपर तैयार किए जा रहे थे, एक्सपायरी डेट बदली जा रही थी और फर्जी लेबल लगाकर उत्पादों को बाजार में बेचा जा रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस धोखाधड़ी का सबसे बड़ा निशाना बच्चे और आम उपभोक्ता थे। तो आइए थोड़े विस्तार से इस नकली बाजार को समझते हैं ।
यह संयुक्त कार्रवाई दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-II में स्थित 'M/s Westened Corporation Pvt. Ltd.' नाम की फैक्ट्री पर की गई। इस रेड में दिल्ली पुलिस के अलावा बदरपुर के सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM), भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और 'मिशन मुक्ति' नाम का NGO भी शामिल था। जांच के दौरान फैक्ट्री से 20 लाख रुपये से अधिक मूल्य का नकली और एक्सपायर्ड खाद्य सामान बरामद किया गया। अधिकारियों ने ऐसी मशीनें भी जब्त कीं जिनसे पैकेजिंग पर नई एक्सपायरी डेट छापी जाती थी, नकली लेबल तैयार किए जाते थे और सीलिंग का काम किया जाता था। जांच में फैक्ट्री के मालिक के रूप में दर्शन सिंह सचदेवा की पहचान हुई। शुरुआती जांच के मुताबिक, यह नेटवर्क लंबे समय से नकली उत्पादों को बाजार तक पहुंचा रहा था।
जांच में कई लोकप्रिय और भरोसेमंद ब्रांड्स के नाम सामने आए, जिनके नाम का गलत इस्तेमाल कर नकली सामान तैयार किया जा रहा था।
फूड और हेल्थ ड्रिंक्स: बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, मैगी नूडल्स और शुद्ध घी।
चॉकलेट और स्नैक्स: फेरेरो रोशे (Ferrero Rocher), न्यूटेला (Nutella) और किटकैट (KitKat)।
बेवरेजेस: थम्स अप, फैंटा और पेपर बोट जूस।
स्किनकेयर प्रोडक्ट्स: सेरावी (CeraVe) के ब्यूटी और कॉस्मेटिक उत्पाद।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी असली जैसे दिखने वाले डिब्बों और पैकेटों पर खुद से छपे हुए फर्जी न्यूट्रिशन लेबल, नकली बैच नंबर, बारकोड और नई एक्सपायरी डेट चिपकाते थे। इसके बाद इन उत्पादों को बाजार के साथ-साथ बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तक भी सप्लाई किया जाता था। पहली नजर में पैकेजिंग इतनी असली लगती थी कि आम ग्राहक के लिए नकली और असली में फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता था।
Also Read : चंपत राय से लेकर बड़े अफसरों तक... राम मंदिर विवाद में घिरी BJP, क्या बच जाएंगी 'बड़ी मछलियां'?
मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर, दक्षिण-पूर्व जिला (South East) के डीसीपी और दिल्ली के फूड सेफ्टी विभाग के कमिश्नर को नोटिस जारी किया। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले में एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है। NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, "बच्चों के पसंदीदा फूड्स के साथ ऐसी धोखाधड़ी देश के बच्चों पर एक सीधा हमला है।" आयोग का मानना है कि यह मामला सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
बोर्नविटा, हॉर्लिक्स और मैगी जैसे उत्पाद सबसे ज्यादा बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। यदि इनमें एक्सपायर्ड या घटिया गुणवत्ता का सामान मिलाया जाए, तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट संबंधी गंभीर समस्याएं, लिवर और किडनी पर असर, संक्रमण और लंबे समय में अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ किसी कंपनी के ब्रांड की नकल करने का मामला नहीं है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार के साथ गंभीर खिलवाड़ है। ऐसे रैकेट उपभोक्ताओं का भरोसा भी तोड़ते हैं और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाने में इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। यह मामला हर उपभोक्ता के लिए एक बड़ी चेतावनी है। किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय उसकी सील, पैकेजिंग, बारकोड, प्रिंटिंग की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट को ध्यान से जांचना बेहद जरूरी है। साथ ही, ऐसे नकली कारोबार पर रोक लगाने के लिए FSSAI, पुलिस और अन्य एजेंसियों की लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई ही लोगों की सेहत और भरोसे की सबसे बड़ी सुरक्षा बन सकती है।