'बिहार में बहार है, क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार है', ये स्लोगन बिहार में खूब गूंजता है। अब लगता है नीतीश सरकार फुल एक्शन मूड में हैं। बिहार सरकार गुंडा बैंक और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी तेज करने जा रही है।  X & AI Genereted
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7 दिन में 3 करोड़ का चूना! बिहार में माइक्रो फाइनांस कंपनियों का स्कैम, जानें क्या है पूरा मामला

'बिहार में बहार है, क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार है', ये स्लोगन बिहार में खूब गूंजता है। अब लगता है नीतीश सरकार फुल एक्शन मूड में हैं।

Author : Mayank Kumar
Reviewed By : Ritik Singh

  • माइक्रो फाइनेंस के नाम पर करोड़ों की ठगी

  • महिलाएं सबसे ज्यादा शिकार

  • सरगना सुरेंद्र प्रसाद फरार, प्रशासन पर सवाल

'बिहार (Bihar) में बहार है, क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार है', ये स्लोगन बिहार में खूब गूंजता है। अब लगता है नीतीश सरकार फुल एक्शन मूड में हैं। बिहार सरकार गुंडा बैंक और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी तेज करने जा रही है। हालांकि, सरकार कोई एक्शन ले, उससे पहले ही कई माइक्रो फाइनेंस कंपनियां लोगों से मोटी रकम वसूलकर फरार हो रही हैं। मुंगेर, बांका और सहरसा जिलों से बीते 7 दिन में 3 करोड़ रुपए की ठगी हो चुकी है। इन मामलों को लेकर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसी कंपनियां ग्राहकों के साथ लेन-देन में मनमानी करती थीं। ब्याज के दरों में कोई नियम तय नहीं होता था और जरूरतमंद लोगों की मजबूरी को देखते हुए ब्याज कभी बढ़ा दिया जाता था तो कभी घटा दिया जाता था। इसके साथ ही बकाया रकम की वसूली के लिए इन कंपनियों द्वारा आपराधिक तत्वों की मदद ली जाती थी।

गांव-देहात के इलाकों में इन गुंडों का लोगों के बीच इतना खौफ था कि कई बार लोग डर और मानसिक दबाव में आकर आत्मघाती कदम तक उठा लेते थे। सरकार अब ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई के मूड में है।

खुलेआम कंपनियों की मनमानी

हैरानी की बात है कि ये कंपनियां नियमों की खुलकर धज्जियाँ उड़ा रही हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के मुताबिक माइक्रो फाइनेंस कंपनियों को सीमित राशि का ऋण उपलब्ध कराना होता है, लेकिन हकीकत में ये कंपनियां खाता खोलने, स्वरोजगार शुरू कराने और जरूरी उपकरण देने के नाम पर लोगों से अतिरिक्त पैसे ऐंठ लेती हैं।

मुंगेर, बांका और सहरसा जिलों में उत्सव और सोनगिरी प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों ने खास तौर पर महिलाओं को बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई। आरोप लगा कि भारी रकम इकट्ठा करने के बाद ये कंपनियां अचानक रातोंरात फरार हो गईं।

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पुलिस के पास नहीं कोई जानकारी

गौरतलब है कि ये कंपनियां अलग-अलग इलाकों में किराए के मकान लेकर अस्थायी दफ्तर खोलती थीं लेकिन इन कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड पुलिस के पास मौजूद नहीं है। बांका में केंद्रीय विद्यालय के पास सोनगिरी माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने अपना दफ्तर बनाया था, जहां से लोगों से बड़ी रकम वसूली गई। इनमें अधिकतर महिलाएं शामिल थी। पैसे जुटाने के बाद कंपनी से जुड़े सभी कर्मचारी अचानक रातोंरात गायब हो गए।

इसी तरह मुंगेर के हवेली खड़गपुर इलाके में उत्सव माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने कार्यालय खोलकर महिलाओं को स्वरोजगार के नाम पर जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। लेकिन यहाँ भी पैसा लेने के बाद वहां के कर्मचारी भी फरार हो गए।

सहरसा जिले के बनगांव में भी उत्सव माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मियों पर सैकड़ों महिलाओं से ठगी करने के आरोप हैं। ठगी की शिकार महिलाएं अब अपनी जमा रकम वापस पाने के लिए पुलिस थानों के चक्कर दिन रात काट रही हैं, लेकिन पुलिस के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कंपनी से जुड़े लोगों की कोई ठोस जानकरी उनके पास नहीं है। ऐसे में पुलिस भी यहाँ विवश दिख रही है।

सरगना सुरेंद्र की हो रही तलाश

बता दें कि इस पूरे नेटवर्क का सरगना बक्सर का रहने वाला सुरेंद्र प्रसाद (Surendra Prasad) बताया जा रहा है। वह अपने सहयोगियों के साथ खड़गपुर क्षेत्र में सक्रिय था और घर-घर जाकर लोन दिलाने का भरोसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता रहा, लेकिन काफी समय तक इसकी किसी को भनक नहीं लगी। पुलिस को इसकी तलाश है। मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर इलाके में पिछले करीब 14 दिनों से माइक्रो फाइनेंस के नाम पर ठगी का सिलसिला चल रहा था। समूह ऋण और घरेलू उपयोग के सामान उपलब्ध कराने का लालच देकर लोगों से पैसे वसूले जा रहे थे।

वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी सुरेंद्र प्रसाद ने कंटिया बाजार में एक मकान किराए पर लेकर वहां कथित रूप से माइक्रो फाइनेंस कंपनी का फर्जी कार्यालय खोला था। अब इस मामले की सच्चाई और ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना की जिम्मेदारी पुलिस के ऊपर है।

इस घटना ने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार किसी भी फाइनेंस कंपनी या कार्यालय को शुरू करने से पहले इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को देना जरूरी होता है। तो अब ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सुरेंद्र प्रसाद ने इस कार्यालय को खोलने की कोई जानकारी दी थी या नहीं। अगर सूचना नहीं दी गई थी, तो इतने दिनों तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा और पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। फिलहाल पुलिस माइक्रो फाइनेंस कंपनी के संचालक सुरेंद्र प्रसाद की तलाश में जुटी हुई है।