असम विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुका है और जलुकबारी सीट से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार छठी बार विधायक बने हैं। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89434 मतों से हराया है। जलुकबारी सीट असम की सबसे चर्चित सीट है, क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। साथ ही, यह सीट लंबे समय से राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाली सीट मानी जाती है। जलुकबारी ने असम को कई बड़े नेता दिए हैं और यहां की चुनावी कहानी गुरु-शिष्य की दिलचस्प राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से भी जुड़ी रही है।
कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले में आने वाली जलुकबारी सीट गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह 1967 से अस्तित्व में एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है। गुवाहाटी शहर का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा माने जाने वाले इस इलाके की पहचान शिक्षा केंद्र, तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार और राजनीतिक महत्व के कारण है।
जलुकबारी सीट पर अब तक 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इस दौरान कांग्रेस ने सबसे ज्यादा पांच बार जीत दर्ज की है। भारतीय जनता पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो-दो बार सफलता मिली, जबकि जनता पार्टी, नतुन असम गण परिषद और असम गण परिषद ने एक-एक बार यह सीट जीती।
हालांकि, आंकड़ों से ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि इस सीट पर चार दशक से ज्यादा समय तक दो नेताओं- भृगु कुमार फुकन और हिमंता बिस्वा सरमा का प्रभाव बना रहा है। असम की राजनीति में भृगु कुमार फुकन को हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है, लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए और चुनावी मुकाबले तक पहुंच गए।
1985 में भृगु कुमार फुकन ने पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जलुकबारी सीट जीती थी। उस समय वे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के महासचिव थे। असम आंदोलन और बाद में हुए ऐतिहासिक असम समझौते में उनकी अहम भूमिका रही।
इसके बाद वे पहली असम गण परिषद सरकार में गृह मंत्री बने। बाद में राजनीतिक मतभेदों के कारण उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और 1991 में फिर चुनाव जीता। 1996 में एजीपी के टिकट पर उन्होंने लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इसी चुनाव में उन्होंने (निवर्तमान) कांग्रेस उम्मीदवार और अपने पूर्व शिष्य हिमंता बिस्वा सरमा को हराया था।
2001 में हिमंता बिस्वा सरमा ने जोरदार वापसी करते हुए जलुकबारी सीट जीत ली और अपने राजनीतिक गुरु भृगु फुकन को मात दी। यहीं से इस सीट पर उनके लगातार वर्चस्व की शुरुआत हुई। उन्होंने 2001, 2006 और 2011 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद 2016 और 2021 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते और अब 2026 में अपनी जीत को बरकरार रखा।
2021 में उन्होंने कांग्रेस के रोमेन चंद्र बोरठाकुर को एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। इससे पहले 2016 में भी उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी।
बता दें कि जलुकबारी सीट पर मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2026 के चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची में 2,06,314 वोटर दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 2024 में यह संख्या 2,04,137 थी। यह सीट तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्र के रूप में उभरी है, इसलिए यहां नए वोटरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
इस सीट का सामाजिक ढांचा मिश्रित है। यहां हिंदू, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और मध्यम वर्गीय शहरी मतदाता बड़ी संख्या में हैं। पुराने आंकड़ों के अनुसार, मुस्लिम मतदाता यहां प्रभावशाली समूहों में रहे हैं, जबकि एससी और एसटी वोटर भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। शहरी और ग्रामीण वोटरों का संतुलन भी इस सीट को खास बनाता है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरी विस्तार हुआ है।
जलुकबारी में मतदान प्रतिशत आमतौर पर अच्छा रहा है। पिछले कई चुनावों में यहां वोटिंग 75 से 85 प्रतिशत के बीच रही है, जो इस सीट की राजनीतिक जागरूकता को दिखाता है। यह गुवाहाटी शहर का प्रवेश द्वार माना जाता है। गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम इंजीनियरिंग कॉलेज समेत कई प्रमुख संस्थान इसी क्षेत्र के आसपास हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे, एयरपोर्ट और सरायघाट पुल से बेहतर कनेक्टिविटी ने इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से और मजबूत बनाया है। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)