अयोध्या का भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) न केवल करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की अटूट आस्था का केंद्र है, बल्कि यह देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। हर दिन यहाँ लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में मंदिर प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कुछ गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े हुए हैं। जून 2026 में सामने आए मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में गबन के कथित मामले ने देश भर में हलचल तेज कर दी है, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। यह पहला मौका नहीं है जब अयोध्या में वित्तीय लेन-देन को लेकर विवाद हुआ हो इससे पहले साल 2021 में भी एक जमीन खरीद सौदे को लेकर तीखे सवाल उठे थे, जिसमें ₹2 करोड़ की भूमि को महज कुछ मिनटों में ₹18.5 करोड़ में ट्रस्ट द्वारा खरीदने के आरोप लगे थे। इसके अतिरिक्त, मार्च 2025 में भी प्राचीन मंदिर की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने का एक मामला सामने आ चुका है। इन लगातार सामने आ रहे विवादों और वर्तमान जांच ने अब मंदिर की व्यवस्थाओं को कानूनी और सामाजिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
जून 2026 में अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले नकद चढ़ावे और सोने-चांदी के आभूषणों में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया। इस वित्तीय अनियमितता की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। एसआईटी की शुरुआती जांच और छापेमारी के बाद मंदिर के नोट-गिनती दल (Cash Counting Staff) और रिकॉर्ड रूम से जुड़े कई लोग सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ गए हैं। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि मंदिर की दान राशि को सुनियोजित तरीके से गायब किया गया है।
इस मामले में मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम सामने आए हैं और उन पर संदेह के पुख्ता कारण बताए जा रहे हैं:
अयोध्या के स्थानीय निवासी टिन्नू यादव (Tinnu Yadav) की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में अच्छी पैठ मानी जाती है, हालांकि वे खुद को एक साधारण पृष्ठभूमि वाले छोटे व्यवसायी और पूर्व ऑटो चालक के रूप में पेश करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर भव्य राम मंदिर निर्माण और श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने के बाद, उनकी आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित उछाल आया है; जांच के दौरान उनके पास अयोध्या और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में करोड़ों रुपये के हॉस्टल, आलीशान रेस्टोरेंट और कई बेनामी जमीनों के दस्तावेज मिले हैं। एसआईटी (SIT) को उन पर सबसे बड़ा संदेह उनकी घोषित आय के सीमित स्रोतों और वर्तमान की आलीशान जीवनशैली में जमीन-आसमान का अंतर देखकर हुआ है, क्योंकि इतने कम समय में प्राइम लोकेशंस पर इतनी व्यावसायिक संपत्तियां खड़ी करने का वे कोई ठोस या वैध टैक्स रिकॉर्ड (ITR) पेश नहीं कर पाए हैं।
मुख्य संदिग्ध टिन्नू यादव के सगे भतीजे मनीष यादव (Manish Yadav) को अपने चाचा के रसूख और संपर्कों के चलते मंदिर प्रबंधन द्वारा नोटों की गिनती करने वाले विशेष दल (Cash Counting Staff) में शामिल होने का मौका मिला था। हालिया छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने इनके पास से कथित तौर पर ₹36 लाख की भारी-भरकम नकद राशि बरामद की है, और इनके बैंक खातों में भी पिछले कुछ महीनों में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन पाए गए हैं। एसआईटी (SIT) को उन पर सबसे बड़ा संदेह इसलिए है क्योंकि मंदिर के गर्भगृह से रोजाना आने वाले कैश को गिनने की जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी और जांच एजेंसी का मानना है कि वे अपने चाचा के इशारे पर गिनती के दौरान कैश की बड़ी खेप को कूट रचित तरीके से बाहर भेज रहे थे, जिसका पुख्ता प्रमाण यह है कि वे बरामद ₹36 लाख के वैध स्रोत का कोई सबूत नहीं दे सके हैं।
मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में एक बेहद भरोसेमंद पद पर तैनात के.डी. तिवारी का मुख्य काम श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए जाने वाले सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों का वजन करना, उनकी शुद्धता जांचना और उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड बुक में दर्ज करना था। जांच के अनुसार, उन्होंने पिछले दो से तीन वर्षों के भीतर अपने और अपने करीबियों के नाम पर करोड़ों रुपये की बेनामी कृषि और व्यावसायिक जमीनें खरीदी हैं। एसआईटी (SIT) को उन पर यह संदेह है कि वे मंदिर में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों के वास्तविक वजन को रिकॉर्ड में कम दिखाकर (जैसे 1 किलो को 800 ग्राम दर्ज करना) बचे हुए हिस्से को बाजार में खपा देते थे, और इसी अवैध कमाई से उन्होंने इन संपत्तियों का अंबार खड़ा किया है, जिसका उनकी तय सैलरी या वैध आय से कोई मुकाबला नहीं है।
बेहद साधारण पृष्ठभूमि वाले लवकुश मिश्रा (Lovekush Mishra) कुछ समय पहले तक अयोध्या में एक सामान्य कार मैकेनिक के रूप में काम करते थे, जिन्हें बाद में कुछ रसूखदार लोगों की सिफारिश पर मंदिर के नोट-गिनती दल में संविदा या दैनिक आधार पर रख लिया गया था। हाल ही में हुई छापेमारी के दौरान एसआईटी (SIT) को उनके घर से ₹10 लाख नकद (Cash) बरामद हुए हैं, और एक साधारण मैकेनिक की हैसियत से इतर उनके पास से कुछ कीमती इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और भारी निवेश के दस्तावेज भी मिले हैं। एसआईटी को उन पर सबसे बड़ा संदेह इसलिए है क्योंकि एक कार मैकेनिक से अचानक नोट गिनने वाले स्टाफ में शामिल होने के तुरंत बाद उनके घर से इतनी बड़ी नकदी मिलना स्वाभाविक नहीं है; जांच एजेंसी का मानना है कि उन्हें इस पूरे रैकेट में कैश को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाने या छिपाने के बदले 'कमीशन' के रूप में यह रकम मिलती थी।
अनुकल्प मिश्रा मंदिर के आंतरिक वित्तीय कार्यों और प्रबंधन से जुड़े एक कर्मचारी बताए जाते हैं। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि उनके पास अयोध्या शहर में एक नया आलीशान मकान है, जबकि उनके पैतृक गांव में एक बड़ा और आधुनिक सुविधाओं से लैस फार्महाउस भी मौजूद है। एसआईटी को संदेह है कि एक संविदा या निश्चित वेतनभोगी कर्मचारी के लिए अयोध्या जैसे महंगे रियल एस्टेट बाजार में मकान बनाना और फार्महाउस का स्वामित्व रखना उनकी घोषित आय के मुकाबले वित्तीय विसंगति की ओर संकेत कर सकता है। इसी कारण जांच एजेंसी उनकी संपत्तियों के अधिग्रहण की समयावधि का मिलान मंदिर के दान में कथित हेराफेरी से जुड़े घटनाक्रमों के साथ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दोनों के बीच कोई संबंध है या नहीं।
राजेश पाठक, करुण और ऋतिक सिंह (Rajesh Pathak, Karun, Ritik Singh) मंदिर की कैश काउंटिंग टीम के सक्रिय सदस्य बताए जाते हैं, जो प्रतिदिन शिफ्टों में नकदी गिनने वाली मशीनों और लॉकरों की निगरानी का कार्य करते थे। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि इन तीनों तथा इनके परिवार के कुछ सदस्यों के बैंक खातों में पिछले कुछ समय में असामान्य रूप से बड़ी रकम जमा हुई है। एसआईटी के अनुसार डिजिटल सर्विलांस और वित्तीय ऑडिट के दौरान यह संकेत मिले कि इनके खातों में नियमित वेतन के अतिरिक्त भी कई अज्ञात स्रोतों से धनराशि ट्रांसफर की जा रही थी। इसी आधार पर जांच एजेंसी को संदेह है कि ये तीनों कथित मुख्य आरोपियों को नकदी की चोरी करने तथा उसे मंदिर परिसर से बाहर निकालने में तकनीकी और जमीनी स्तर पर सहायता प्रदान कर रहे थे। फिलहाल एसआईटी बैंक लेन-देन, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर इन संदेहों की पुष्टि करने का प्रयास कर रही है।
अब देखना ये दिलचस्प होगा कि एसआईटी का संदेश सच होता है या 2021 के ज़मीन मामले की तरह उन पर लगे अरोपों को भी रफा दफा कर दिया जाएगा| [SP]