भारत की धरती केवल ऋषि-मुनियों और देवताओं की कहानियों से ही नहीं, बल्कि राक्षसों की रोचक और रहस्यमयी कथाओं से भी भरी हुई है। आपने रामायण और महाभारत (Ramayana And Mahabharata) में कई शक्तिशाली राक्षसों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ शहर ऐसे भी हैं जिनके नाम इन्हीं राक्षसों से जुड़े हुए हैं? समय के साथ ये स्थान पवित्र तीर्थ या प्रसिद्ध शहर बन गए, पर इनके नाम के पीछे छिपी कहानियाँ आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। कहीं एक महान योद्धा राक्षस की तपस्या की गाथा है, तो कहीं एक अत्याचारी असुर के अंत की कहानी। तो आइए जानते हैं भारत के ऐसे 5 शहरों के बारे में, जिनके नाम राक्षसों से जुड़े माने जाते हैं (5 cities whose names are believed to be associated with demons)।
क्या आप जानतें है कि बिहार में स्थित गया जो बौद्ध गया के नाम से प्रचलित है दरअसल गयासुर नामक राक्षस पर पड़ा था? जी हां! गयासुर बहुत ही शक्तिशाली असुर था, लेकिन वह अत्याचारी बिल्कुल नहीं था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान विष्णु को प्रसन्न किया था। उसकी भक्ति से देवता चिंतित हो गए क्योंकि गयासुर इतना पवित्र हो गया था कि जो भी उसे देख लेता, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते। कथाओं के अनुसार देवताओं के अनुरोध पर भगवान विष्णु ने गयासुर से एक यज्ञ के लिए उसकी देह मांगी। गयासुर सहमत हो गया और धरती पर लेट गया। भगवान विष्णु ने उसके सीने पर अपना चरण रख दिया, जिससे वह स्थिर हो गया। मान्यता है कि वही स्थान आज विष्णुपद मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। इस तरह गया शहर का नाम गयासुर के नाम पर पड़ा और आज यह पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।
मैसूर का इतिहास सिर्फ राजमहलों और दशहरा उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें एक प्राचीन पौराणिक कथा से भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि इस शहर का पुराना नाम “महिषूर” था, जो महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर के नाम पर पड़ा। महिषासुर आधा भैंसा और आधा मानव रूप धारण करने वाला बलशाली दैत्य था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान पाया कि कोई देवता उसे नहीं मार सकेगा।
वरदान मिलते ही उसका स्वभाव बदल गया। उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर देवताओं को पराजित कर दिया। चारों ओर भय और अन्याय फैल गया। तब सभी देवताओं की शक्तियाँ मिलकर एक दिव्य शक्ति के रूप में प्रकट हुईं - देवी दुर्गा। देवी और महिषासुर के बीच कई दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ। अंत में देवी ने उसका वध कर संसार को भय से मुक्त किया। मान्यता है कि जिस स्थान पर यह युद्ध हुआ, वहीं आज का मैसूर बसा है। प्रसिद्ध दशहरा उत्सव इसी विजय की याद में आज भी भव्य रूप से मनाया जाता है।
पलवल हरियाणा का एक क्षेत्र है। पलवल का नाम पलंबासुर नामक दैत्य से जुड़ा माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पलंबासुर बहुत शक्तिशाली असुर था। एक समय उसने ब्रज क्षेत्र में आकर लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया था। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम ने उसका वध किया था। कथा के अनुसार पलंबासुर ने ग्वाल बालों के साथ खेलते समय छल से प्रवेश किया और बलराम को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। लेकिन बलराम ने उसकी चाल पहचान ली और उसे मार गिराया। माना जाता है कि जिस क्षेत्र में उसका अंत हुआ, वही स्थान आगे चलकर पलवल कहलाया। आज पलवल हरियाणा का एक महत्वपूर्ण शहर है, लेकिन इसकी पौराणिक कथा इसे और भी रोचक बना देती है।
जालंधर शहर का नाम पौराणिक असुर जालंधर के नाम पर माना जाता है। पुराणों के अनुसार जालंधर का जन्म भगवान शिव के तीसरे नेत्र से निकली अग्नि की चिंगारी से हुआ था, जो समुद्र में गिरकर एक बालक के रूप में प्रकट हुआ ।समुद्र देव ने उसका पालन-पोषण किया। बड़ा होकर वह अत्यंत शक्तिशाली, वीर और पराक्रमी बना। उसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) पतिव्रता और धर्मपरायण स्त्री थी। उसकी सतीत्व शक्ति के कारण जालंधर को कोई भी देवता पराजित नहीं कर पाता था।
शक्ति के घमंड में जालंधर ने देवताओं को युद्ध में हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। सभी देवता परेशान होकर भगवान विष्णु और शिव की शरण में गए। तब भगवान विष्णु ने लीला से वृंदा की तपस्या भंग की, जिससे जालंधर की रक्षा-शक्ति समाप्त हो गई। इसके बाद भगवान शिव ने भयंकर युद्ध में उसका वध किया। मान्यता है कि जहाँ यह घटना हुई, वही स्थान आगे चलकर जालंधर कहलाया।
तिरुचिरापल्ली का नाम एक शक्तिशाली राक्षस त्रिशिरासुर से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि उसके तीन सिर थे, इसलिए उसे “त्रि-शिरा” कहा जाता था। वह बहुत तपस्वी और बलशाली था। अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए उसने कठोर तपस्या की और देवताओं को चुनौती देने लगा। उसकी ताकत और घमंड दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया, जिससे देवता चिंतित हो उठे।
लोककथाओं के अनुसार त्रिशिरासुर ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया था। अंत में देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उससे भयंकर युद्ध किया। लंबे संघर्ष के बाद शिव जी ने उसका वध कर दिया और लोगों को उसके आतंक से मुक्त कराया। मान्यता है कि “तिरुचिरापल्ली” नाम “त्रिशिरा” शब्द से ही निकला है। यहाँ स्थित प्रसिद्ध रॉकफोर्ट मंदिर से भी यह कथा जोड़ी जाती है। आज यह शहर तमिलनाडु का महत्वपूर्ण धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र है, लेकिन इसकी पौराणिक कहानी इसे और भी रोचक बना देती है। [SP/MK]