पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने अपने पिता को ट्रांसपोर्ट टेंडर न मिलने की बौखलाहट में सरकारी अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा को बंधक बनाया।
आम आदमी पार्टी में भुल्लर कोई अकेला मामला नहीं है बल्कि 2022 से अब तक भ्रष्टाचार और अपराध के कई मामले सामने आए हैं। विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा पर बलात्कार का आरोप लगने के बाद उनका ऑस्ट्रेलिया भाग जाना ये साबित करता है कि जीरो टॉलरेंस का नारा केवल एक चुनावी जुमला बनकर रह गया है।
साल 2015 के कापसहेड़ा कांड में अपनों को हटाने के लिए बाउंसर्स का प्रयोग, दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ मारपीट और स्वाति मालीवाल जैसी महिला नेता के साथ मुख्यमंत्री आवास में हुई हिंसा ये दर्शाते हैं कि यह दल सदाचार का ढोंग रचकर सत्ता हथियाने का जरिया मात्र है।
पंजाब में लालजीत सिंह भुल्लर मामले से अब एक नया राजनीतिक मोड़ आ चुका है। पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन (PSWC) के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा ने 21 मार्च 2026 को आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो बनाया था। वीडियो में लालजीत सिंह भुल्लर को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना था कि लालजीत सिंह भुल्लर ने उनको बहुत प्रताड़ित किया था।
पंजाब में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर लालजीत सिंह भुल्लर ने राज्य के वेयर हाउस विभाग ने ट्रांसपोर्ट टेंडर निकाले। उस समय मंत्री भुल्लर ने अपने ही पिता के नाम से टेंडर के लिए आवेदन करवाया था लेकिन भुल्लर के पिता के पक्ष में टेंडर नहीं गया। यहाँ से कहानी की असली शुरुआत हुई है। गगनजीत सिंह रंधावा जो कि उसी विभाग का विभाग का जिला प्रबंधक था, को मंत्री भुल्लर के आवास पर बुलाया गया।
गगनजीत सिंह रंधावा के कनपटी पर पिस्तौल सटाकर उसके साथ जोर जबरदस्ती की गई। उसे दबाव में रखकर और परिवार का डर दिखाकर यह कबूल करवाया गया कि उसने टेंडर पास करने के लिए 10-10 लाख रुपए लिए हैं। इस कबूलनामे का वीडियो भी बना लिया गया। वीडियो में गगनजीत सिंह रंधावा से यह कहलवाया गया कि उसने 10 लाख रुपए की रिश्वत ली है।
लालजीत सिंह भुल्लर ने इसके बाद अलग-अलग समय पर गगनजीत सिंह रंधावा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। यह प्रताड़ना इतनी असहनीय हो गई कि उस आदमी के लिए जीना मुश्किल हो गया और उसने आत्महत्या कर ली।
यह भी पढ़ें : गगनदीप मौत मामले में तरसेम सिंह ने की सीबीआई जांच की मांग, पंजाब सरकार पर उठाए सवाल
साल 2022 में आम आदमी पार्टी सत्ता में आई। डॉ विजय सिंगला स्वस्थय मंत्री थे। विजय सिंगला ने दो महीने के भीतर एक शख्स से 16 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में मांग चुका था। हालांकि वह बाद में रंगे हाथों पकड़ा गया। भगवंत मान एक तरफ यह कहते हैं कि उनकी सरकार जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। दूसरी तरफ इस तरीके से भ्रष्टाचार का अड्डा पंजाब बनता जा रहा है।
भटिंडा ग्रामीण से विधायक अमित रतन कोटफट्टा ने एक सरपंच से रिश्वत मांगा कि उसके गाँव का विकास करना है। इस कार्य हेतु विधायक ने पाँच लाख रुपए रिश्वत मांगी। इस मामले में बाद में कोटफट्टा पर कार्रवाई हुई।
आम आदमी पार्टी का विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने महिला से रेप किया। उसे 7 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया। लेकिन वह आस्ट्रेलिया भागने में सफल रहा। अब वो कहते हैं कि भारत तभी वापस आएंगे जब उनको न्याय मिलेगा।
दिल्ली (Delhi) में जब साल 2015 में सरकार बनी तो कापसहेड़ में भी आम आदमी पार्टी (AAP) के स्तर को इस तरीके से समझ सकते हैं कि मात्र चार-पाँच लोगों को पार्टी से किनारे करने के लिए इन्होंने बॉउन्सर बुलाए थे। मैं इस घटना का प्रत्यक्ष दर्शी रहा हूँ। वहाँ पर भी इनका असली रूप समाज के सामने आया था। स्वाती मालिवाल का मामला पूरा समाज जनता है कि कैसे उनके साथ हिंसक झड़प हुई। एक महिला के प्रति आम आदमी पार्टी के असली नीयत को स्वाती मालीवाल मामले से समझा जा सकता है।
साल 2018 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी। उस समय दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को मुख्यमंत्री आवास में रात के 12 बजे बुलाकर उनके साथ बदसलूकी की गई। यह भारतीय राजनीति का एक काला अध्याय था जिसमें किसी शीर्ष स्तर के अधिकारी को इतने बुरी तरीके से हिंसक झड़प का सामना करना पड़ा था। इस घटना में उस समय के मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दोनों शामिल थे। इन दोनों के अलावा उनके निजी सहायक विभव कुमार और अन्य विधायक भी उस मारपीट के घटनाक्रम में शामिल थे।
इसी तरीके से दिल्ली की सतर्कता मंत्री (Vigilance Minister) आतिशी और सौरभ भारद्वाज के साथ साल 2022 में एक बैठक हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव नरेश कुमार के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें धमकी दी गई।
वहीं पंजाब में अमरगढ़ से विधायक जसवंत सिंह गज्जनमाजरा को प्रवर्तन निदेशालय ने 6 नवंबर 2023 को गिरफ्तार कर लिया था। जसवंत सिंह गज्जनमाजरा के ऊपर 41 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप था। जसवंत सिंह गज्जनमाजरा की कंपनी तारा कॉर्पोरेशन लिमिटेड इस धोखाधड़ी में शामिल थी। 5 नवंबर 2024 को जसवंत सिंह गज्जनमाजरा रिहा कर दिए गए।
पंजाब के जालंधर सेंट्रल से आम आदमी पार्टी के विधायक रमन अरोड़ा हैं। रमन अरोड़ा ने स्थानीय व्यापारियों को फर्जी नोटिस का हवाला देकर उनसे करोड़ों रुपए वसूले थे। बाद में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (Punjab Vigilance Bureau) ने कार्रवाई करते हुए 12 मई 2025 को रमन अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया ।
ये सारी कहानियाँ यह बयां करती हैं कि सदाचार का ढोंग रचने वाली आम आदमी पार्टी असल में जनता के साथ धोखा कर रही है। असल में इन सारे लोगों ने जनता को सिर्फ बेवकूफ बनाया है। सत्ता हासिल करने के नशे में इन लोगों ने देश का बँटाधार कर दिया है। ऐसे लोगों को जितनी जल्दी हो सके जेल में डालना चाहिए। राजनीति में आम आदमी पार्टी के आडंबर को जनता अब समझ चुकी है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर बनी पार्टी महज कुछ लोगों के कमाने का जरिया बनकर रह गई।
यह भी देखें :