सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर (सत्यानंद स्टोक्स) एक अमेरिकी मिशनरी थे, जो भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर यहीं बस गए। उन्होंने हिमाचल में 'सेब क्रांति' लाकर वहां की अर्थव्यवस्था बदल दी। वे एकमात्र अमेरिकी थे जिन्होंने गांधीजी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया और जेल गए। 1946 में उनके निधन तक उनका जीवन भारतीय किसानों और आजादी के प्रति समर्पित रहा।
Samuel evans stokes apple story : भारत के स्वततंत्रता संग्राम में महान नायकों की कमी नहीं थी। इनमें से कुछ लोग ऐसे थे जो मूल रूप से भारत के नहीं थे लेकिन आजादी की लड़ाई में बराबर के हिस्सेदार थे। आयरिश महिला एनी बेसेंट का नाम उन लोगों की सूची में है जो भारत में जन्म नहीं लिए लेकिन भारत की आजादी में बहुत योगदान दिए। इसी कड़ी में एक नाम और है जिसने भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई को मजबूत बनाया, वह नाम है सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर। अमेरिका से भारत आए सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर ने भारतीय कृषि के उन्नत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
1882 में अमेरिका के एक क्वेकर परिवार में सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर (Samuel evans stokes apple story) का जन्म हुआ। वे 1904 में एक युवा के रूप में भारत आए। भारत में रहने के बाद, वो भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बहुत बड़े प्रशंसक बन गए।
उन्होंने कुछ समय के लिए हिमाचल प्रदेश के शिमला की पहाड़ियों के सुबाथू में एक कुष्ठ रोग आश्रम में काम किया। बाद में वे एक ईसाई मिशनरी के घर में चले गए। उनकी पत्नी का नाम एग्नेस था जो एक ईसाई महिला थीं। अमेरिका में विलासितापूर्ण जीवन को छोड़कर, उन्होंने भारत में बसने, कृषि करने और स्थानीय लोगों के बीच रहने का निर्णय लिया। उन्होंने पहाड़ियों में रहने के दौरान संस्कृत और पहाड़ी बोली भी सीख लिया था।
हालांकि सैमुअल इवांस स्टोक्स (Samuel evans stokes apple story) एक धर्म प्रचारक के रूप में भारत आए थे, लेकिन भारतीय संस्कृति और रीति-रिवाजों ने उन पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि वो इसी संस्कृति में ढल गए। इसके बाद साल 1932 में उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया और अपना नाम बदलकर सत्यानंद स्टोक्स (Samuel evans stokes apple story) नाम कर दिया। उनकी पत्नी एग्नेस ने भी हिंदू धर्म अपना लिया और प्रियदेवी बन गईं। इन्होंने अपने बच्चों के भीतर भारतीय संस्कृति और परंपराओं के विचार को अंकुरित किया।
उन्होंने शिमला की पहाड़ियों में स्थित कोटगढ़ में अपनी पत्नी के गांव के पास खेती की जमीन खरीदी। वहां उन्होंने हारमनी हॉल नाम का एक घर बनवाया। उन्होंने सेब की खेती का प्रयोग शुरू किया और अमेरिका में स्टार्क ब्रदर्स द्वारा विकसित एक किस्म की पहचान की। हिमाचल प्रदेश की जलवायु उपयुक्त समझकर उन्होंने पौधे आयात किए।
इसके बाद उन्होंने अपनी ज़मीन पर सेब की खेती शुरू की। अपने संपर्कों के दम पर विदेशी बाज़ारों में सेब निर्यात करने में सफल रहे और अच्छी कमाई हो जाती थी। उन्होंने अन्य स्थानीय किसानों को भी सेब की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे धीरे-धीरे इस क्षेत्र में सेब क्रांति आ गई।
सेब की खेती के माध्यम से हिमालयी अर्थव्यवस्था को बदलने के उनके प्रयासों से उन्हें हिमालय का जॉनी एप्पलसीड की उपाधि मिली। आज भी हिमाचल प्रदेश भारत में सबसे अधिक सेब उत्पादन करने वाले राज्यों में से एक है, जो राष्ट्रीय उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। राज्य की अर्थव्यवस्था सेब की खेती पर बहुत अधिक निर्भर करती है, विशेष रूप से शिमला, कुल्लू और किन्नौर जैसे जिलों में।
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सैमुअल (Samuel evans stokes apple story) भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले एकमात्र अमेरिकी थे जिन्हें जेल भेजा गया। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन में भी भाग लिया, उनसे प्रेरणा लेकर खादी पहनी और ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन में भागीदारी के दौरान उन्हें 1921 में गिरफ्तार किया गया और लाहौर की जेल में कई महीने बिताने पड़े।
इतना करने के बाद भी सैमुअल इवांस स्टोक्स (Samuel evans stokes apple story) भारत की आजादी देखने के लिए जीवित नहीं रहे। सत्यानंद स्टोक्स का 1946 में एक बीमारी के बाद निधन हो गया, जो भारत को 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने से ठीक पहले का समय था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम और हिमाचल प्रदेश के कृषि क्षेत्र में उनके योगदान ने एक अमिट छाप छोड़ी है, जिससे राज्य को वह रूप मिला जो आज भारत की सेब राजधानी के रूप में जाना जाता है।
आज भी हिमाचल प्रदेश भारत के उन राज्यों में से एक है जहाँ कृषि लोगों की आय का प्रमुख स्रोत है। हिमाचल प्रदेश में कृषि में बागवानी और उससे संबंधित क्षेत्र शामिल हैं, और एक बड़ी कामकाजी आबादी खेती में लगी हुई है । सेब का अग्रणी उत्पादक होने के कारण यह राज्य सेब राज्य के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसी कारण हिमाचल प्रदेश को अक्सर ऐसे राज्य के उदाहरण के रूप में देखा जाता है जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपेक्षाकृत समृद्ध जीवन जीते हैं, कभी-कभी तो शहरी आबादी से भी आगे निकल जाते हैं। इस परिवर्तन का श्रेय अगर सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर (Samuel evans stokes apple story) को दिया जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
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