2016 में भारत-फ्रांस के बीच 36 विमानों का ₹59,000 करोड़ का सौदा हुआ, जिस पर कीमत और ऑफसेट पार्टनर को लेकर पहले से विवाद रहा है।
स्वामी ने दावा किया कि राफेल युद्ध के लिए उपयुक्त नहीं है, 5 विमान गिराए जाने की बात कही और डील में दबाव व बड़े नामों की भूमिका का संकेत दिया।
स्वामी ने मनोहर पर्रिकर के विरोध, अनिल अंबानी की भूमिका और शीर्ष नेतृत्व की संलिप्तता के संकेत देकर पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया।
भारत और फ्रांस के बीच 23 सितंबर 2016 को राफेल (Rafale) विमान को लेकर सौदा हुआ था। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 36 लड़ाकू विमानों की खरीद का रास्ता साफ हुआ था। तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) और उनके फ्रांसीसी समकक्ष जीन-यवेस ले ड्रियन ने ₹59,000 करोड़ के इस सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। 5 विमानों का पहला जत्था 29 जुलाई 2020 को अंबाला एयरबेस पहुंचा।
राफेल को लेकर पूरी दुनिया में काफी चर्चा है। पिछले साल 2025 में ऑप्रेशन सिंदूर के समय भी इस विमान की काफी चर्चा हुई थी। अब ये विमान एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। इसके पीछे वजह हैं, बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy), जिनका एक इंटरव्यू सामने आया है, जिसमें उन्होंने कई खुलासे किये हैं।
Molitics यूट्यूब चैनल के होस्ट नीरज झा के पॉडकास्ट में बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने राफेल विमान पर बड़ी बात कह दी। उन्होंने भारत के रक्षा सौदों, खासकर राफेल (Rafale) जेट्स, और बीजेपी के अंदर असहमति की आवाज़ों को दबाने के आरोपों पर बात की। बीजेपी नेता से यह सवाल हुआ कि कि क्या सच में भारत-पाक जंग में पांच राफेल गिराए गए थे?
इसपर उन्होंने कहा “मेरी निंदा करो, मेरा मजाक उड़ाओ। यह बहुत आसान होगा। लेकिन वे ऐसा नहीं करते, क्योंकि उन्हें पता है कि मैंने जो कहा है, वह कहीं से आया है। मेरा फोन टैप होता है। उन्हें पता है कि मुझे जानकारी किसने दी।” उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों का खुलासा करने में उन्होंने पहले कभी गलती नहीं की है।
बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने राफेल विमान को लेकर यह भी कहा कि ये युद्ध के लिए अनुपयुक्त है। उन्होंने कहा, “ज्यादातर ये विमान फ्रांस से हैं। राफेल सिर्फ अभ्यास के लिए ठीक है, युद्ध के लिए नहीं। यह असली लड़ाई में टिक नहीं सकता।”
उन्होंने स्विट्जरलैंड का उदाहरण दिया, जहां उनके मुताबिक फ्रांस से राफेल का डेमो मांगा गया था, लेकिन ट्रायल के बाद एक भी विमान नहीं खरीदा गया।स्वामी ने कहा कि उन्होंने खुद इस पर रिसर्च की है और इसके प्रदर्शन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राफेल (Rafale) को लेकर जब भारत-फ़्रांस के बीच समझौता हुआ था, तब देश के रक्षा मंत्री मनोहर परिकर (Manohar Parrikar) थे। परिकर को लेकर भी बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने बड़ा खुलासा किया। उनके मुताबिक परिकर इसके लिए तैयार ही नहीं थे। उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री के साथ हुए निजी बातचीत का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ''जब राफेल खरीदा जा रहा था, तब परिकर ने मुझसे रोते हुए कहा कि उनसे गलती हो गई। वह इस डील को आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। वह राष्ट्रीय राजनीति छोड़कर गोवा वापस चले गए। उन पर बहुत दबाव था।”
स्वामी ने यह भी बताया कि पर्रिकर इस पर एक किताब लिखना चाहते थे, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। बीजेपी नेता ने यह तक कह दिया कि पता नहीं उसके पेट में ऐसा क्या गया कि उसका निधन हो गया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह कोई आरोप है, तो इसपर बीजेपी नेता ने कहा कि वो कोई आरोप नहीं लगा रहे, बस उनके पास सबूत नहीं हैं। वो ये बात इसलिए बता रहे हैं क्योंकि परिकर को वो अच्छे से जानते थे। वो काफी परेशान भी थे।
भारत और फ़्रांस के बीच जो राफेल (Rafale) डील हुई थी, उसमें मुकेश अंबानी नहीं उनके भाई अनिल अंबानी शामिल थे। बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) कहते हैं कि मुकेश नहीं, उनके भाई अनिल इसमें शामिल थे। उनका कहना था कि मुकेश इसमें शामिल नहीं होते। लेकिन उनके भाई को इस डील से काफी फायदा मिला। विदित हो कि डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) अनिल अंबानी की एयरोस्पेस कंपनी है।
इसके बाद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) से यह भी सवाल हुआ कि इसका असली नियंत्रण किसके पास है, तो इसपर उन्होंने कहा सुप्रीम लीडर? कोई उनका नाम लेने की हिम्मत नहीं करता, लेकिन मोदी के बगैर यह डील नहीं हो सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि काकुभाई नाम का एक गुजराती व्यक्ति इस डील के अंदरूनी मामलों को संभाल रहा था, जो शायद फिक्सर या बैकचैनल ऑपरेटर था।
साथ ही उनसे यह भी सवाल हुआ कि क्या इसमें अमित शाह की भूमिका थी। इसपर जवाब आया कि उनका काम लोगों को ‘ठीक’ करना है। मोदी इस डील के केंद्र में थे, वहीं अमित शाह की भूमिका अलग थी। स्वामी ने कहा कि शाह डील नहीं संभालते। उनका काम लोगों को ठीक करना है। अगर कोई पत्रकार गलत व्यवहार करता है, तो वह सुनिश्चित करते हैं कि उसे चुप करा दिया जाए।
आपको बता दें कि राफेल (Rafale) पर विवाद कोई नया नहीं है बल्कि जब 2016 में 36 विमानों की खरीद की कीमत और ऑफसेट पार्टनर का चयन हुआ था, तभी से यह विवादों में है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने यूपीए के मुकाबले तीन गुना अधिक कीमत चुकाई और अनुभवी HAL को हटाकर रिलायंस डिफेंस को अनुचित लाभ पहुंचाया। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा, तो 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की मांग खारिज कर दी और प्रक्रिया को सही ठहराया।
सीएजी (CAG) रिपोर्ट ने भी इस सौदे को पिछले प्रस्ताव से सस्ता बताया। फिर ऑपरेशन सिंदूर के समय से यह विमान चर्चा में है। पाकिस्तान यह दावा करता है कि उसने राफेल को मार गिराया था जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी 8 विमान गिरने की बात करते हैं लेकिन वो नाम नहीं लेते हैं। वहीं, भारत सरकार ने हमेशा से इन दावों को ख़ारिज ही किया है।