आप लोगों ने गोलमाल 3 फिल्म जरूर देखी होगी जिसका एक MEME काफी वायरल होता है। ये MEME जॉनी लिवर से जुड़ा है, जिसका डायलॉग कुछ इस प्रकार है, 'मैं नहीं दिखाऊंगा', जी हाँ, वर्तमान समय में भारत की राजनीति भी लगता है कि कुछ ऐसी ही चल रही है। साल 2014 में बीजेपी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता में आई, ये कहकर कि हम कालाधन वापस लाएंगे, भ्रष्टाचार मिटाएंगे, जनता की सेवा करेंगे, लेकिन जब सरकार से यह सवाल कर दो कि क्या कालाधन वापस आया, भ्रष्टाचार मिटा, तो इसपर मोदी सरकार मौन हो जाती है, ये कुछ इसी MEME से मिलता जुलता है।
ऐसा ही एक मामला M CARES फंड को लेकर हैं, जिसकी जानकारी देने से सरकार साफ़ इंकार कर देती है। ये मामला एक बार फिर से चर्चा में है, क्या है मामला, आइये जानते हैं।
दरअसल, PM CARES फंड 27 मार्च 2020 को बनाया गया था। इसमें आने वाले सभी दान को टैक्स-फ्री कर दिया गया और इस फंड को FCRA के सभी नियमों से छूट दे दी गई। यानि यह PM CARES फंड बिना FCRA रजिस्ट्रेशन के जितना चाहे उतना विदेशी दान ले सकता था।
इसके साथ ही, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें कहा गया कि कंपनियां अपना CSR पैसा भी इस फंड में दे सकती हैं।Companies Act की सूची में यह बताया जाता है कि CSR फंड किन-किन फंड या संस्थाओं को दिया जा सकता है, और इसमें एक बिंदु ऐसा था जिसमें लिखा था कि सिर्फ PMNRF या केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए किसी अन्य राहत फंड को ही CSR फंड दिया जा सकता है।
वहीं, जब RTI के तहत दस्तावेज निकाले गए, तो उसमें साफ तौर पर यह लिखा था कि स्पष्टीकरण इस समझ के आधार पर जारी किया गया था कि यह फंड केंद्र सरकार ने बनाया है, इसलिए यह CSR फंड लेने के योग्य है।
अगर हम इस फंड को देखें, तो इसमें बहुत ज्यादा CSR का पैसा आया। यहां तक कि PSU कंपनियों का भी काफी CSR फंड इसमें आया। यह फंड 27 मार्च 2020 को बना और 31 मार्च 2020 तक, यानी सिर्फ 4 दिनों में, इसमें 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का दान जमा हो गया। अगले साल, यानी वित्त वर्ष 2020-21 में, इसमें और 7,000 करोड़ रुपये जमा हुए।
दिसंबर 2020 में Indian Express ने RTI के जरिए जानकारी निकाली, जिसमें सभी PSU कंपनियों को RTI भेजी गई थी। इससे पता चला कि करीब 100 PSU कंपनियों ने अपने CSR फंड से 2400 करोड़ रुपये PM CARES फंड में दिए। इतना ही नहीं, इन PSU कंपनियों ने सिर्फ CSR फंड ही नहीं दिया, बल्कि अपने कर्मचारियों की एक दिन की सैलरी भी दान की, जिससे कुल 155 करोड़ रुपये इस फंड में गए। यह पैसा सिर्फ देश के अंदर से ही नहीं आया था।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने भारतीय दूतावासों और हाई कमीशन के प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने कहा था कि सभी लोग PM CARES फंड का प्रचार करें ताकि विदेश से भी दान मिल सके। कमोडोर लोकेश बत्रा ने 27 भारतीय दूतावासों में RTI लगाई, जिसमें पता चला कि सभी ने अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए इस फंड का प्रचार किया था। यहां तक कि पाकिस्तान और चीन में स्थित भारतीय दूतावासों ने भी PM CARES फंड का प्रचार किया और दान देने की अपील की।
साल 2020 में कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी, तब PM CARES फंड की शुरुआत हुई थी। स्वयं पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वो इसमें दान दें ताकि गरीब तबके के लोगों तक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पहुँच सके। इसकी खासियत थी कि आप इसमें 10 रुपए भी दान कर सकते थे। 4 महीने के भीतर ही इसकी राशि 3000 करोड़ के पार चली गई थी।
2021 के अंत तक ये 10000 करोड़ के पार चली गई। फिर जब लोगों ने RTI के जरिये इसकी जानकारी मांगने की कोशिश की, कि पैसा कहाँ से आया और कहाँ खर्च हुआ, तो सरकार ने साफ जवाब देने से मना कर दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय से कहा कि PM CARES फंड से जुड़े सवाल संसद में नहीं उठाए जा सकते। हालांकि, दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने वेबसाइट पर इसका लेखा-जोखा जरूर डालना शुरू किया लेकिन इस बात से अब तक कोई संतुष्ट नहीं है। हालांकि, कई पत्रकार और RTI एक्टिविस्ट चतुर तरीके से जानकारी निकाल लेते हैं। वो सीधे PM CARES से पूछने के बजाय उन संस्थाओं से पूछते हैं, जो पैसा दे रही हैं।