8 जून 1967 को इजराइल ने अमेरिकी नेवी के जहाज USS Liberty पर हमला किया, जिसमें 35 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 170 से ज्यादा घायल हुए।
इजराइल ने इसे गलत पहचान की घटना बताया और माफी मांगी, अमेरिकी जांच में भी यही निष्कर्ष सामने आया।
घटना के दशकों बाद भी सवाल कायम हैं कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अमेरिका ने इजराइल के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की।
क्या आप सोच सकते हैं कि कोई देश अमेरिका (America) पर हमला करे और USA चुप बैठे और कोई जवाबी कार्यवाई ना करे। ऐसा हो सकता है क्या? जवाब है बिल्कुल नहीं। ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका में हमला किया, तो अंकल सैम ने पाकिस्तान में घुसकर उसे पकड़ा और मार डाला।
हालांकि, एक ऐसा भी देश है जिसने आज से 59 साल पहले अमेरिका के 35 सैनिकों को मार दिया था, और फिर भी US चुप रहा था। अंकल सैम यानी अमेरिका ने उस देश को माफ़ कर दिया ! जाँच जब हुई, तो कहा गया कि उस देश ने गलती से हमला कर दिया था। क्या है पूरी कहानी आइये समझते हैं।
इस समय मिडिल ईस्ट (Middle East) जंग के दौर से गुजर रहा है। इजराइल और अमेरिका (Israel & America) दनादन ईरान पर बम बरसा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों की दोस्ती देखने लायक होती है। ये एक तरह से जय-वीरू वाली दोस्ती है।
हालांकि, क्या आप जानते हैं, इस समय जो इजराइल-अमेरिका जो जिगरी दोस्त बने हुए हैं, एक समय पर इसी इजराइल ने अमेरिका पर हमला किया था और USA के 35 सैनिकों को मार दिया था। इजराइल ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नेवई की जहाज पर हमला किया था। इतिहास में इसे यूएसएस लिबर्टी घटना के नाम से जाना जाता है।
यह घटना 8 जून 1967 की है, जब अमेरिकी नेवी के जहाज पर हमला हुआ था। उस दौरान मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव का दौर चल रहा है। इजरायल (Israel) और मिस्र, जॉर्डन और सीरिया सहित कई अरब देशों के बीच एक छोटी सी जंग चल रही थी। अमेरिका इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं था लेकिन अपने नेवई के जरिये इस युद्ध पर नज़र जरूर बनाए हुए था।
इन्हीं में से एक जहाज था यूएसएस लिबर्टी (USS Liberty) जो इस जंग पर अपनी पैनी नज़र रखे हुए था। यह एक सिग्नल इंटेलिजेंस जहाज था जिसे पूर्वी भूमध्य सागर (Eastern Mediterranean Sea) में कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट करने का काम सौंपा गया था।
इन सारे घटनाक्रम के दौरान अमेरिका को इस बात की तनिक भी भनक नहीं थी कि इजराइल (Israel) उसपर हमला कर देगा। यूएसएस लिबर्टी (USS Liberty) जहाज 8 जून 1967 की दोपहर को सिनाई पेनिनसुला के पास इंटरनेशनल बॉर्डर पर सफर कर रहा था। इसके बाद इजरायली एयरक्राफ्ट ने इन जहाजों का चक्कर लगाया और अचानक ही हमला करना शुरू कर दिया। इजराइल के फाइटर जेट्स ने अमेरिका के जहाज पर कई बार हमले किये।
रॉकेट-मशीन गन सबसे फायरिंग की। इसके बाद इजरायली टॉरपीडो बोट्स भी इसमें शामिल हुआ, जिसने अमेरिका को बहुत नुकसान पहुँचाया। कई मिनट हमला झेलने के बाद अमेरिका का जहाज बुरी तरह ध्वस्त हो गया। जहाज में 40 फ़ीट चौड़ा छेद हो गया, जिसके कारण अंदर पानी भरने लगा। कहा जाता है कि इसमें करीब 35 सैनिक मारे गए थे और 170 से ज्यादा घायल हुए थे।
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जब ये घटनाक्रम खत्म हुआ, तो इसके बाद इजरायल (Israel) ने अमेरिका (America) को सिर्फ 'सॉरी' कहा। इस मामले को लेकर जाँच भी बैठी, जिसमे इजराइल से स्पष्टीकरण माँगा गया। इसके जवाब में इजरायली अधिकारियों ने कहा कि हमला गलत पहचान का मामला था। उनका कहना था कि उनकी सेना को लगा कि जहाज मिस्र का जहाज एल कुसेर था। वहां के अधिकारीयों ने स्पष्टीकरण में इसे दुखद दुर्घटना बताया।
इस जवाब के बाद अमेरिका की सरकार ने इसकी कई बार जाँच की लेकिन हर बार यही नतीजा आया कि हमला शायद युद्ध के समय की गलत पहचान का नतीजा था। वहीं, जो अधिकारी इस हमले में बच गए थे, उनका कहना था कि जहाज पर अमेरिकी झंडा लगा था और इजराइल को इसे पहचान लेना चाहिए था।
यह घटना दशकों से विवादों में रहा है लेकिन एक सवाल यह सबके मन में आता है कि इजराइल और अमेरिका एक दूसरे का कौन सा ऐसा राज जानते हैं, जिसकी वजह से दोनों एक दूसरे का हर मंच पर साथ देते हैं और इस घटनाक्रम के बाद भी अमेरिका ने इजराइल को कुछ नहीं कहा। यह सारी चीजें आज भी एक प्रश्नवाचक चिन्ह हैं।