गौतम अडानी का 1998 में अहमदाबाद में अपहरण हुआ, बंदूक की नोक पर किडनैप कर 15 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई, लेकिन उसी दिन रिहा कर दिया गया।
करीब 20 साल बाद कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण आरोपियों को बरी कर दिया, क्योंकि गवाह और ठोस प्रमाण पेश नहीं हो सके।
2008 के मुंबई आतंकी हमले के दौरान अडानी ताज होटल में फंसे थे, जहां उन्होंने बेसमेंट में रात बिताई और बाद में सुरक्षित बच निकले।
साल 2014 में सलमान खान की एक फिल्म आई थी, उसका नाम था 'किक।' इस फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी विलेन की भूमिका में थे और इसमें उनका एक डायलॉग है, 'मौत को छूकर टक से वापस आ गया।' ये डायलॉग गौतम अडानी (Gautam Adani) के जीवन पर सटीक बैठती है क्योंकि उनके जीवन में दो ऐसे मौके आए, जब उनके जान पर बन आई थी, लेकिन बावजूद इसके वो बच गए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि गौतम अडानी एक बार किडनैप हो चुके हैं और एक बार आतंकवादियों के बीच फंस चुके हैं। क्या है पूरा मामला, आइये समझते हैं।
गौतम अडानी (Gautam Adani) का जन्म 1962 में अहमदाबाद के एक गुजराती जैन परिवार में हुआ था। बचपन में उनका जीवन बहुत ही साधारण था लेकिन आगे चलकर वो भारत के सबसे प्रभावशाली व्यवसायियों में से एक बन गए हैं। फोर्ब्स और ब्लूमबर्ग के रियल-टाइम डेटा के अनुसार उनकी कुल सम्पति करीब 5-6 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वह भारत और एशिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं। ऊर्जा, कृषि, रियल एस्टेट और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में उनका व्यवसाय है। भारत का दूसरा सबसे अमीर व्यक्ति जिसके पास पैसे की कोई कमी नहीं है, आगे पीछे नौकर चाकर हैं, सुरक्षा के लिए सेक्युरिटी गार्ड्स तक हैं लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि ये व्यक्ति कभी किडनैप भी हो सकता है।
जी हाँ, ऐसा हुआ है। घटना साल 1998 की है, जब अहमदाबाद में उनका और उनके साथी शांतिलाल पटेल का अपहरण कर लिया गया। वो कर्णावती क्लब से निकल रहे थे कि उसी समय उनकी गाड़ी पर हमला हुआ और अडानी (Gautam Adani) का अपहरण हो गया। अपहरण करने वालों के नाम फजल-उर-रहमान (फजलू) और भोगीलाल दर्जी (मामा) थे। दोनों एक स्कूटर पर आए और बन्दुक की नोक पर उनको किडनैप कर लिया। उनकी रिहाई के बदले करीब 15 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। हालांकि, जिस दिन अडानी और उनके साथी पटेल को किडनैप किया गया था, उसी दिन दोनों को छोड़ भी दिया गया। इस घटना के बाद मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि ये उनके जीवन का दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से एक था।
इस घटना के करीब 20 साल के बाद 2018 में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश डी.पी. पटेल ने सबूतों की कमी के कारण आरोपियों के पक्ष में फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के वकील कुनाल एन शाह के अनुसार, अभियोजन पक्ष अपहरण या आरोपियों की भूमिका को साबित नहीं कर पाया, क्योंकि मुख्य गवाह मौजूद नहीं थे। शाह ने आगे बताया कि अडानी (Gautam Adani) को दो बार समन भेजा गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। इसके अलावा, जांच अधिकारियों सहित गवाह स्पष्ट रूप से यह नहीं बता सके कि वास्तव में क्या हुआ था। इस सहयोग की कमी के कारण आरोप खारिज हो गए।
इन आरोपियों में से एक था फजल-उर-रहमान, जो बिहार का रहने वाला था। वो गुजरात के सबसे खतरनाक उगाही करने वालों में से एक माना जाता था। इसका नाम डरवर्ल्ड के बड़े नामों में से एक था और इसकी तुलना भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से की जाती थी। फ़िलहाल रहमान अन्य मामलों में साबरमती सेंट्रल जेल में बंद हैं, जबकि भोगीलाल दर्जी जमानत पर बाहर हैं।
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1998 में हुए किडनैपिंग घटना के बाद गौतम अडानी (Gautam Adani) के जीवन में दूसरी बड़ी घटना साल 2008 में हुई। 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल में जब आतंकी हमला हुआ, तब इसी होटल में गौतम अडानी भी मौजूद थे। वो दुबई पोर्ट के CEO मोहम्मद शराफ के साथ बैठक के बाद वे निकलने की तैयारी कर रहे थे लेकिन तभी हमला शुरू हो गया।
मेहमानों को पहले होटल की रसोई में ले जाया गया और फिर बेसमेंट में शिफ्ट किया गया। अडानी ने पूरी रात बेसमेंट में बिताई और अगले दिन उन्हें बचा लिया गया। जब वो अहमदाबाद वापस लौटे, तो उन्होंने बताया कि मैंने मौत को सिर्फ 15 फीट की दूरी से देखा। बता दें कि मुंबई में जो पाकिस्तान से आए आतंकियों ने हमला किया था, उसमे करीब 166 लोग मारे गए थे, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।