लगभग 12 वर्ष बाद, कृष्ण कांत सेवदा (संजू) ने डॉ. मुनीश रायज़ादा को संदेश भेजकर अपना दर्द साझा किया। उन्होंने परमजीत और आशावंत जैसे निस्वार्थ कार्यकर्ताओं की अनदेखी और आम आदमी पार्टी में बढ़ते कदाचार पर दुख जताया। सेवदा ने कहा कि पारदर्शिता का सपना अधूरा रह गया और भ्रष्टाचार मुक्त भारत की उम्मीद अब धूमिल हो चुकी है। wikimedia commons
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पारदर्शिता पर बड़ा सवाल : आखिर केजरीवाल ने AAP के प्रथम कोषाध्यक्ष को क्यों हटाया ?

अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी पर अब उसके ही पुराने सहयोगी गंभीर सवाल उठा रहे हैं। भ्रष्टाचार विरोधी और पारदर्शिता के नाम पर बनी AAP में समय के साथ चंदे का हिसाब छिपने लगा, प्रथम कोषाध्यक्ष कृष्ण कांत सेवदा को चुपचाप हटाया गया, जिससे बहुत सारे सवाल और संदेह उत्पन्न होते हैं।

Author : Pradeep Yadav

अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी पर अब उसके ही पुराने सहयोगी गंभीर सवाल उठा रहे हैं। भ्रष्टाचार विरोधी और पारदर्शिता के वादों के साथ बनी AAP में समय के साथ चंदे का हिसाब छिपने लगा, प्रथम कोषाध्यक्ष कृष्ण कांत सेवदा को चुपचाप हटाया गया और राघव चड्ढा के आने के बाद वित्तीय पारदर्शिता लगभग समाप्त हो गई।

आम आदमी पार्टी से बहुत सारे नेता अब अलग होते जा रहे हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने समय-समय पर जो आरोप लगाया है, उसमें शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़ा हुआ है। अन्ना आंदोलन के नाम पर बनी इस पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार लग रहे हैं। पार्टी से अलग हुए नेताओं ने इसके बारे में एक नया खुलासा किया है।

5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकपाल बिल को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए। पूरे देश को लगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का सही वक्त आ चुका है। इसी समय अन्ना आंदोलन के बीच से कुछ लोगों ने पार्टी बनाने का निर्णय लिया। भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की मुहिम में NRI लोगों के समूह ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस समूह का नेतृत्व डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा कर रहे थे। सभी ने अपने-अपने क्षमता के अनुसार पार्टी के लिए काम करना शुरू किया। डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा सबसे पहले आम आदमी हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी को आर्थिक मदद पहुंचाई और ईमानदारी से पार्टी के लिए काम करते रहे। बाद में अरविन्द केजरीवाल और उनके बीच मतभेद हो गए और दोनों अलग हो गए।

क्या है नया खुलासा

दरअसल, 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकपाल बिल को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए। पूरे देश को लगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का सही वक्त आ चुका है और देश के बाहर से भी लोगों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उस समय की यूपीए सरकार को इस आंदोलन के माध्यम से झुकाने की कोशिश की गई। इसी बीच अन्ना आंदोलन के बीच से कुछ लोगों ने पार्टी बनाने का निर्णय लिया। उस समय राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव, शांति भूषण, अरविन्द केजरीवाल, कुमार विश्वास, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष आदि ने मिलकर आम आदमी पार्टी बनाई।

नई पार्टी को चलाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत पड़ी। पार्टी के भीतर यह सुनिश्चित हुआ किसी भी परिस्थिति में बड़े उद्योगपतियों से चंदा नहीं लिया जाएगा। आम जनता के पैसों से यह पार्टी खाड़ी की जाएगी और चंदे का पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाएगा। पार्टी के भीतर पारदर्शिता को देखते हुए बहुत सारे लोगों ने चंदा देना शुरू किया।

इसी बीच अमेरिका में रहने वाले भारतीय लोगों ने भी पार्टी को नैतिक आधार पर समर्थन देना शुरू किया। भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की मुहिम में NRI लोगों के समूह ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस समूह का नेतृत्व डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा कर रहे थे। सभी ने अपने-अपने क्षमता के अनुसार पार्टी के लिए काम करना शुरू किया। डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने सबसे पहले आम आदमी पार्टी को अपनी तरफ से आर्थिक मदद पहुंचाई (कुछ स्रोतों के मुताबिक लगभग 1 लाख रुपए) ताकि पार्टी को आर्थिक मजबूती मिल सके। ठीक इसी समय सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने एक करोड़ चंदा दे दिया। शांति भूषण से मिले चंदे की घोषणा करने के बदले में एक लाख रुपए देने वालों की पहचान को छिपा दिया गया। 

साल 2015 में कृष्ण कांत सेवदा की जगह 25 साल के युवा राघव चड्ढा को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। यहीं से असली खेल शुरू हुआ। AAP से अलग हुए नेताओं ने बताया है कि अरविन्द केजरीवल एक ऐसे आदमी को ढूंढ रहे थे जो सिर्फ उनके इशारों पर काम कर सके। राघव चड्ढा के कोषाध्यक्ष बनते ही पार्टी से चंदे के हिसाब को सार्वजनिक करना बंद कर दिया गया।

2015 में क्यों बदले गए  AAP के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष 

दरअसल, आम आदमी पार्टी की स्थापना के समय (26 नवंबर 2012) कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) को पहला राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। फरवरी 2015 में आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में 67 सीट पर जीत हासिल हुई। उस समय AAP के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष के नेतृत्व में मिला यह जनसमर्थन ऐतिहासिक था।

जीत मिलने के कुछ ही दिनों बाद मई 2015 में आम आदमी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) को उनके पद से मुक्त कर दिया गया। बड़े आश्चर्य और दुख की बात है कि कृष्ण कांत सेवदा ने इस मामले पर चुप्पी साध ली, उन्होंने केजरीवाल के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला और राजनीतिक विराम पर चले गए। इसके बाद उनका हाल चाल AAP के किसी नेता नहीं लिया। डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने लगातार तीन साल तक उनसे संपर्क साधने की कोशिश की और आग्रह करते रहे कि उनके साथ जो भी हुआ है, उसको जनता के समक्ष बोलें, लेकिन कृष्ण कांत सेवदा को न जाने किस चीज का भय था कि उन्होंने कभी भी अपना मुंह नहीं खोला। 

बता दें कि साल 2015 में ही कृष्ण कांत सेवदा की जगह 25 साल के युवा राघव चड्ढा को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। यहीं से असली खेल शुरू हुआ। AAP से अलग हुए नेताओं ने बताया है कि अरविन्द केजरीवल एक ऐसे आदमी को ढूंढ रहे थे जो सिर्फ उनके इशारों पर काम कर सके। राघव चड्ढा के कोषाध्यक्ष बनते ही पार्टी से चंदे के हिसाब को सार्वजनिक करना बंद कर दिया गया।

इसके बाद लगातार आम आदमी पार्टी दूसरे राज्यों में चुनाव जीतने के लिए हाथपाँव मारने लगी। चंदे का हिसाब प्रतिबंधित करना और पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 पूर्ण बहुमत से जीतना, दोनों बातें एक दूसरे की पूरक लगती हैं। बता दें कि वर्तमान भारतीय राजनीति में चुनाव लड़ना बहुत महंगा हो चुका है। ऐसे में कोई पार्टी स्थापना के महज 10 साल के भीतर दूसरे राज्यों में चुनाव जीतती है तो उसके चुनावी खर्च पर संदेह होना लाज़मी है।

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डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा अन्ना आंदोलन के सक्रिय सिपाही रहे हैं। किसी साक्षात्कार में उन्होंने AAP पर एक बयान दिया जिससे प्रभावित होकर लगभग 12 साल बाद कृष्ण कांत सेवदा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुनीश कुमार रायज़ादा को अपना एक संदेश भेजा है। इस संदेश में उन्होंने बताया है कि बड़े नेताओं को तरजीह देने के चक्कर में आम आदमी पार्टी जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को भूलती चली गई।

कृष्ण कांत सेवदा और डॉ रायज़ादा के बीच बातचीत का एक अंश 

डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा के किसी साक्षात्कार में दिए बयान से प्रभावित होकर लगभग 12 साल बाद कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुनीश कुमार रायज़ादा को अपना एक संदेश भेजा है। इस संदेश में उन्होंने बताया है कि बड़े नेताओं को तरजीह देने के चक्कर में आम आदमी पार्टी जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को भूलती चली गई। उनके अनुसार, आम आदमी पार्टी में परमजीत, आशावंत जैसे लोगों ने पार्टी को खड़ा करने में अपनी क्षमता के अनुसार पूरा योगदान दिया है। हालांकि परमजीत अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) आज भी उस NRI समूह को याद करते हैं और बताते हैं कि उन लोगों ने आम आदमी पार्टी के प्रति अद्वितीय योगदान दिया।  परंतु बड़े दुख की बात है कि आम आदमी पार्टी ऐसे लोगों को भूल गई। कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) बताते हैं कि पारदर्शिता का सपना लेकर आम आदमी पार्टी को बनाया गया था, जो अब तक साकार नहीं हो सका और लगता है कि यह कभी साकार भी नहीं हो सकता। भविष्य की तरफ इशारा करते हुए कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) कहते हैं कि इस बात का दुख है कि अपनी नई पीढ़ी को भ्रष्टाचार के त्रासदपूर्ण स्थितियों में छोड़ना पड़ रहा है। 

डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा को कृष्ण कांत सेवदा (Krishna Kant Sevada) ने जो संदेश भेजा है उसका एक अंश कुछ इस प्रकार है-”राम राम जी।

भाई, आज आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा आपका यह संदेश मुझ तक पहुंचा है। मैंने एक कार्यकर्ता को निम्न प्रत्युत्तर दिया है:

"श्री (डॉक्टर) मुनीष भाई शिकागो (USA) ने आंदोलन और पार्टी बनने में बहुत परिश्रम किया था। उन्होंने और डॉक्टर रजनीश जी ने पार्टी को सबसे पहले एक लाख रुपए का योगदान दिया था यद्यपि उसी दिन श्री शान्ति भूषण जी के एक करोड़ के योगदान के कारण अन्य सूचनाएं छुप गई थी। 

आपका आभार यह संदेश मुझ तक पहुंचाया अन्यथा मुझे तो परमजीत भाई के देवलोकगमन का पता ही नही था। उनके संघर्ष को प्रणाम करता हूं अद्भुत जीवट वाले व्यक्ति थे। 2013 के परिणामों के उपरांत तो बहुत लोग जुड़े किंतु इन परिणामों तक पहुंचाने में जिनका योगदान था वे सभी (लगभग) कर्मठ  निस्वार्थ कार्यकर्ता नेपथ्य में चले गए। भाई परमजीत के देवलोकगमन की सूचना ह्रदयविदारक है। भाई (डॉक्टर) आशावंत जी के नेतृत्व में उन्होंने हो सेवाएं दी उनका वर्णन शब्दों में व्यक्त नही किया जा सकता।

सादर।

जय जय श्री सीताराम जी।"

भाई, आपसे सादर निवेदन है कि यदि भाई आशावंत जी से संपर्क हो तो उन्हें नमस्कार और भाई परमजीत जी के देहावसान की संवेदना अग्रेषित करना। डॉक्टर साहब ने आंदोलन को बल तो दिया ही पार्टी में कदाचार (आर्थिक - नैतिक सभी प्रकार का) नही पनपे इस हेतु बहुत सहयोग दिया।

मेरा नाम कृष्णकांत सेवदा है किंतु सभी आत्मीयजन "संजू" नाम से ही जानते है। यह नाम "स्नेह और लघुता" देता है और मुझे यही अच्छा लगता है। मैं बीकानेर राजस्थान से हूं।

आपने और अन्य सभी NRI बांधवों ने जिस प्रकार पार्टी को सहयोग दिया वह अतुलनीय है। आज भी जब मुझे मेरी तुकबंदी "आपका ट्रेजरार बोल रहा हूं" स्मरण में आती है तो लगता है "सपने कभी सच नही होते" हम कभी भ्रष्टाचार मुक्त नहीं होंगे। अगली पीढ़ी को त्रासदपूर्ण स्थितियों में छोड़ने का दुख तो रहेगा। 

सादर।

जय जय श्री सीताराम जी।”

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