भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस माना रहा है। वहीं, भारत की परंपरा के अनुसार, इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले (Lal Quila) पर तिरंगा झंडा फहराएंगे। भारतीय होने के नाते आपके मन में भी इसको लेकर कई सवाल पैदा होते होंगे कि स्वतंत्रता दिवस (Independence day) पर तिरंगा फहराने के केंद्र के रूप में लाल किला को ही क्यों चुना गया और प्रधानमंत्री ही क्यों स्वतंत्रता दिवस का तिरंगा फहराते हैं, राष्ट्रपति क्यों नहीं? तो चलिए आज आपकी सारी चिंताएं दूर करते है।
लाल किले पर तिरंगा फहराने का कोई औपचारिक कारण नहीं हैं, और न ही यह किसी दस्तावेज में दर्ज हैं। लेकिन लाल किले (Lal Quila) पर तिरंगा फहराने की परम्परा तब से चली आ रही हैं जब भारत ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस 1947 में मनाया था।
1947 में भारत ने ब्रिटिश शासन से मुक्त होने का जश्न मनाया, तब भारत के पहले प्रधानमत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली के लाल किले के लाहोरी गेट पर राष्ट्र तिरंगा फहराया था, उसके बाद से ही, हर स्वतंत्रता दिवस (Independence day) पर प्रधानमंत्री ही झंडारोहण करते हैं, इसके बाद राष्ट्रगान गया जाता हैं। और प्रधानमंत्री राष्ट्रगान के बाद देश को संभोधित भी करते हैं।
लाल किला को ही क्यों स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा झंडा फहराना का केन्द्र चुना गया। इसकी वहज इतिहास के कुछ घटनाक्रम से जुड़ी हैं। जिसके कारण हर स्वतंत्रता दिवस (Independence day) पर लाल किला को केंद्र माना जाता हैं। लाल किला हमेशा से ही सत्ता का मुख्य केन्द्र रहा हैं।
उत्तरी भारत में जब भी आक्रमण हुआ, लाल किला (Lal Quila) को ही निशाना बनाया गया। अगर बात करे ईरान के नादिर शाह के हमले से लेकर मराठाओं, सिखों, जाटों, गुज्जरों के सैन्य आक्रमण, इन सभी का मुख्य केंद्र लाल किला ही रहा था। वहीं, इसकी एक और खास वहज यह हैं, जब देश 1947 में ब्रिटिश के शासन से आज़ाद हुआ, तब स्वंतत्रता की आज़ादी का जश्न लाल किले पर ही मनाया गया। और लाल किला से ही पहली बार भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवालाल नेहरू ने ध्वजारोहण किया, जिसके बाद लाल किले पर ही स्वंतत्रता के अवसर पर तिरंगा फहराना की परम्परा बन गई।
सुभाष चंद्र बोस का भी लाल किला से एक गहरा नाता जुड़ा हुआ हैं। 1940 के दशक में जब महान देशभक्त सुभाष चंद्र बोस ने रंगून पहुंचकर जफर की समाधि को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की, उसके साथ दिल्ली चलो का नारा दिया।
बता दें, दिल्ली चलो का यह नारा देश की राजधानी दिल्ली को अपनी शक्ति का प्रर्दशन करने का एक प्रतिक था और इस मार्च का केंद्र भी सुभाष चंद्र बोस ने लाल किले को ही चुना था। जिसके बाद लाल किला (Lal Quila) एक बार फिर मुख्य गढ़ के रूप में उभरा।(VR)
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