2021 के बाद यूपी में शुरू हुए 7 में से 6 एयरपोर्ट पर शेड्यूल्ड फ्लाइट्स बंद हो चुकी हैं; केवल महार्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम चालू है।
कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा समेत कई एयरपोर्ट पर यात्रियों की कमी और घटती उड़ानों के कारण संचालन रोकना पड़ा, जबकि निर्माण और संचालन पर करोड़ों रुपये खर्च हुए।
पर्यटन, उद्योग और कनेक्टिविटी की कमी वाले एयरपोर्ट बंद हुए, जबकि कानपुर एयरपोर्ट और आगरा एयरपोर्ट जैसे सक्रिय शहरों में यात्री संख्या लगातार बढ़ रही है।
'अब हवाई चप्पल वाला भी हवाई जहाज में सफर करेगा' ये कथन हमारे नहीं हैं बल्कि वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के हैं। तारीख थी 27 अप्रैल 2017 जब पीएम मोदी ने देश को सम्बोधित करते हुए क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना (UDAN) की नींव रखी थी।
आज आलम यह है कि हवाई चप्पल वाला हवाई जहाज में सफर नहीं कर पा रहा है क्योंकि हवाई यात्रा का किराया इतना महंगा है कि आपका बजट तक हिल सकता है। अब इसी बीच आई एक और खबर ने नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार के UDAN योजना की पोल खोल दी है। इस बात का खुलासा एक RTI से हुआ है। क्या है पूरा मामला आइये समझते हैं।
नामचीन मीडिया कंपनी इंडिया टुडे की तरफ से एक RTI फाइल की गई जिसमें पता चला कि यूपी (Uttar Pradesh) में एयरपोर्ट बनाने की कोशिशों में गड़बड़ी हो रही है। इसमें पता चला कि 2021 के बाद शुरू हुए 7 में से 6 एयरपोर्ट पर पहले ही शेड्यूल्ड कमर्शियल फ्लाइट्स बंद हो चुकी हैं। सिर्फ अयोध्या का एयरपोर्ट चल रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुशीनगर एयरपोर्ट का उद्घाटन 20 अक्टूबर, 2021 को हुआ था, और शेड्यूल्ड फ्लाइट्स 26 नवंबर, 2021 से शुरू हुईं लेकिन 2023 नवंबर के करीब यहाँ की गतिविधियों को रोक दिया गया। कारण यह बताया गया कि शुरुआत के एक महीने में 54 उड़ानें चलीं, जो सबसे ज्यादा थीं लेकिन 2023 में उड़ानों की संख्या लगातार घटती गई। जब मात्र 6 उड़ानें बचीं, तो नवंबर 2023 में इसे बंद करना पड़ा। बता दें कि इस एयरपोर्ट को बनाने में करीब 327.30 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। वहीं, 2023-24 में लगभग 719.89 लाख रुपये और 2024-25 में करीब 759.35 लाख रुपये ऑपरेशन पर खर्च हुए।
इसके साथ ही आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद के एयरपोर्ट, जिनका उद्घाटन मार्च 2024 में हुआ था, ये कुछ ही महीनों में बंद हो गईं। आजमगढ़ और चित्रकूट की सर्विस करीब 8 महीने चले, मुरादाबाद 3 महीने जबकि श्रावस्ती और अलीगढ़ को लांच के तुरंत बाद ही रोक दिया गया था। फिलहाल 30 दिसंबर, 2023 को शुरू हुआ अयोध्या एयरपोर्ट अभी चालू है।
वहीं, कानपुर और आगरा एयरपोर्ट की बात करें, तो ये अभी भी संचालन में हैं। 26 मई 2023 को कानपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल शुरू हुआ था और 7 जून 2023 से उड़ानें शुरू हो गईं। कानपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या जून-दिसंबर 2023 में 1,70,214 रही। इसके साथ ही 2024 में 2,89,577 जबकि 2025 में 3,64,075 रही।
मतलब 2 साल में यात्रियों की संख्या दोगुनी रफ़्तार से बढ़ी। बता दें कि इस एयरपोर्ट के निर्माण में 122.14 करोड़ रुपये और रखरखाव पर 1.09 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके साथ ही आगरा एयरपोर्ट की बात करें तो यहाँ 2025 में कुल 2,39,758 यात्रियों ने सफर किया। अभी भी यात्रियों की संख्या लगातार बनी हुई है।
अब यहाँ सवाल यह भी उठता है कि कोई एयरपोर्ट आखिर बंद क्यों हो रहा है जबकि वो तो जनता के फायदे के लिए ही होता है। तो इसका जवाब सीधा और सरल है। सरकार की प्लानिंग में कमी। कई बार सरकार बिना सही सर्वे और जरूरत समझे एयरपोर्ट बना देती है। इससे एयरलाइंस को लाभ नहीं मिलता और उनकी उड़ानें बंद हो जाती है।
एयरपोर्ट के आसपास बड़े उद्योग, पर्यटन या व्यापार गतिविधि कम होने से वहां से यात्री नहीं जाते हैं। खराब सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी भी बड़ी समस्या होती है। आगरा एयरपोर्ट को ही ले लें, तो यहाँ आप उतरकर ताजमहल और पुराना किला जैसी चीजें घूम सकते हैं जबकि आज़मगढ़, मुरादाबाद जैसे एयरपोर्ट के आसपास कोई पर्यटन स्थल नहीं हैं। ऐसे में यहाँ सरकार की गलती दूरदर्शी रणनीति की कमजोरी दिखाती है।