एडवोकेट निशा गौर ने तीस हजारी कोर्ट में जमानत के बदले ₹30,000 की रिश्वत मांगने का सनसनीखेज खुलासा किया है। सीबीआई ने आरोपों को सही पाया है। यह घटना अदालती भ्रष्टाचार और आम आदमी की न्याय तक पहुंच पर गंभीर सवाल उठाती है, जिसकी बात पूर्व में शांति भूषण जैसे दिग्गजों ने भी की है।
दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में रिश्वत लेने की खबर सामने निकलकर आ रही है। एक वकील ने इस मामले का खुलासा स्वयं किया है। जिस वकील ने खुलासा किया है उसी से तीस हजारी कोर्ट में रिश्वत मांगा गया। महिला वकील ने हार नहीं मानी और रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया। यह मामला इशारा करता है कि अदालतों के भीतर असल में न्याय कैसे मिलता है।
दरअसल, ये मामला दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट का है। एक महिला वकील ने बताया है कि कोर्ट के भीतर किसी को जमानत कैसे मिलता है। वकील निशा गौर ने इस पूरे मामले को विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा कि एक गरीब आदमी जो वाहन धुलाई का काम करता था उसके ऊपर मुकदमा दर्ज हो गया था। आरोपी के परिवार वालों ने निशा गौर से जमानत के लिए संपर्क किया। निशा ने अदालत में जमानत के लिए एप्लीकेशन लगाया। इसके लिए तीस हजारी कोर्ट के रूम नंबर 178 में बहस होना तय हुआ।
निशा के अनुसार, उनसे कोर्ट के भीतर ही एक शख्स ने कहा कि जमानत की अर्जी स्वीकृत नहीं होगी। महिला वकील ने पूछा कि आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं। अंत में यही हुआ कि जमानत याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद निशा की बात एक बड़े अधिकारी से हुई। अधिकारी ने निशा से कहा कि कोर्ट आपसे कुछ चाहता है।
पहले तो निशा को दुविधा हुआ कि किस चीज की बात कर रहे हैं। लेकिन बाद में उन्होंने निशा से कहा कि आप कोर्ट के स्टाफ से मिलिए आपको सब कुछ समझ आ जाएगा। इसके बाद एडवोकेट निशा ने संजीव नामक शख्स से मुलाकात की। बातचीत के दौरान कोर्ट के स्टाफ ने बताया कि 30 हजार रुपए दीजिए आपको जमानत आसानी से मिल जाएगी। अगर आप नहीं देंगी तो जमानत शायद नहीं मिल पाएगी।
एक पुलिस वाले के मुंह से ये सबकुछ सुनने के बाद एडवोकेट निशा सन्न रह गई। इस पूरे मामले की शिकायत के लिए निशा ने कोर्ट के अलग-अलग दरवाजे को खटखटाया लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी। इसके बाद निशा ने इस मामले की शिकायत सीबीआई से कर दी। सीबीआई ने छानबीन के बाद पाया कि निशा ने जो आरोप लगाया है वह बिल्कुल सही है।
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निशा का कहना है अगर कोर्ट में ये सब ऐसे ही चलता रहेगा तो वकील कहाँ जाएगा? अगर जमानत सिर्फ पैसे से ही मिलता है तो फिर इसका मतलब यही है कि वकील का कोई काम ही नहीं है। ये तो एक मामला है जहां वकील ने खुद आकर सच्चाई बताई है। बहुत बार ऐसा होता है कि इस तरीके के मामले अंदर ही अंदर दबा दिए जाते हैं और किसी को भनक तक नहीं लगती है। निशा ने कहा कि एक गरीब जो वाहन धुलाई का काम करता है उससे इस तरीके से अगर एक जमानत के लिए पैसे मांगा जाएगा तो वह न्याय के लिए कहां जाएगा?
बता दें कि यह पहली बार नहीं हुआ है कि अदालत में किसी वकील द्वारा इस तरीके के मामले पर प्रकाश डाला गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के वकील और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण (Shanti Bhushan) ने साल 2008 -9 में एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया। इस हलफनामे में 16 पूर्व जजों के नाम थे। उन्होंने कहा था कि उस समय 16 में से कम से कम 8 जज ऐसे हैं जो भ्रष्ट रहे हैं।
पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काट्जू (Markandey Katju) भी इस मामले पर काफी तीखी प्रतिक्रया दे चुके हैं। उनका कहना है कि बहुत सारे जजों को न्यायिक प्रक्रिया की बुनियादी समझ भी नहीं होती है फिर भी उनको जज बना दिया जाता है और यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट में आधे से ज़्यादा जज भ्रष्ट हैं।
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