तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय थलापति द्वारा 18 मई 2026 को LTTE प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को श्रद्धांजलि देने से सियासी बवाल मच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने वाले प्रभाकरण के इस महिमामंडन के बाद, आगामी राजनीतिक गठबंधन की कयासबाजियों के बीच कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के तीखे हमलों से घिर गई है।
तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद अभिनेता से नेता बने विजय थलापति राज्य के नए मुख्यमंत्री बने हैं। सरकार बनने के बाद से ही राष्ट्रीय राजनीति में लगातार ये कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस और मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) का आगामी गठबंधन देश की सियासत में एक नया मोड़ लेकर आएगा।
हाल ही में मुख्यमंत्री विजय द्वारा लिए गए एक फैसले ने इस राजनीतिक गठबंधन पर ग्रहण लगा दिया है। सीएम विजय ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने वाले लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के पूर्व प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को खुले तौर पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस पूरे मामले के बाद केंद्र और राज्य की राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस पार्टी इस समय चारों तरफ से घिरती हुई नजर आ रही है।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 18 मई 2026 को पूर्व LTTE प्रमुख प्रभाकरण की पुण्यतिथि पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने उसे श्रद्धांजलि अर्पित की। सीएम विजय ने प्रभाकरण को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। विजय ने तमिल कार्ड खेलते हुए कहा कि समुद्र के उस पार तमिल अस्मिता की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रभाकरण ने एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ी थी।
सोशल मीडिया पर अपना संदेश साझा करते हुए उन्होंने कहा, “हम मुल्लीवाइक्कल की यादों को अपने दिलों में संजोकर रखेंगे! हम समुद्र पार रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए हमेशा एकजुट होकर खड़े रहेंगे!” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद देश की सुरक्षा और पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान को लेकर दिल्ली से लेकर चेन्नई तक सियासी बवाल मच गया है।
घटनाक्रम को समझने के लिए इसके इतिहास को जानना जरूरी है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले तमिल समुदाय का एक बड़ा हिस्सा हर साल 18 मई की तारीख को “मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस" के रूप में याद करता है, जिसका अर्थ है ‘तमिल नरसंहार स्मरण दिवस’। दरअसल, इसी दिन यानी 18 मई 2009 को श्रीलंकाई गृहयुद्ध के अंतिम चरण में LTTE प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को मुल्लीवाइक्कल में श्रीलंकाई सेना द्वारा मार गिराया गया था।
बता दें कि भारत के इतिहास का एक काला पन्ना प्रभाकरण से जुड़ा हुआ है। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम धमाके में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य हत्याकांड की साजिश रचने में सीधे तौर पर LTTE प्रमुख प्रभाकरण का नाम सामने आया था, जिसके बाद भारत सरकार ने LTTE को पूरी तरीके से एक आतंकी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया था।
इस विवाद के ठीक तीन दिन बाद देश में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि मनाई गई। 21 मई 2026 के दिन नई दिल्ली में राजीव गांधी की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
अब देश के सियासी गलियारों में इस बात की तीखी चर्चा हो रही है कि जहां एक तरफ उत्तर भारत अर्थात दिल्ली में देश के पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारत (तमिलनाडु) में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी के मुखिया और सीएम विजय, राजीव गांधी के हत्यारे प्रभाकरण को शहीद और नायक की तरह पूज रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस और विजय के गठबंधन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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