सुप्रीम कोर्ट ने हयात रीजेंसी होटल नीलामी मामले में दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल।  IANS
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सुप्रीम कोर्ट ने हयात रीजेंसी होटल नीलामी मामले में दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल, सरकार-बैंकों को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हयात रीजेंसी होटल की नीलामी मामले पर सुनवाई की। यह मामला गैर-सरकारी संगठन इंफ्रास्ट्रक्चर वॉचडॉग द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आधारित है।

Author : IANS

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली (Delhi) के हयात रीजेंसी होटल की नीलामी मामले पर सुनवाई की। यह मामला गैर-सरकारी संगठन इंफ्रास्ट्रक्चर वॉचडॉग द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आधारित है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल का मुद्दा उठाया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (Chief Justice of India) की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान दोहरे मापदंड पर सवाल खड़े किए। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि जब कोई गरीब महिला अपना घर बेचने आती है, तो उसकी वैल्यूएशन 40 लाख रुपए बताकर बैंक मना कर देता है। लेकिन, जब पांच सितारा होटल की बात आती है, तो वैल्यूएशन का नियम अलग कैसे हो जाता है? यह क्या हो रहा है?

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में वैल्यूएशन कैसे तय की जाती है, यह परेशान करने वाला है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एशियन होटल्स ग्रुप (हयात रीजेंसी दिल्ली) के खिलाफ वैल्यूएशन और आईबीसी प्रक्रिया का पूरा विवरण मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि लोन चुकाने में लापरवाही के बाद दिल्ली के इस होटल की वैल्यूएशन कैसे हुई।

सीजेआई (CJI) ने आगे कहा कि अगर कोई कर्जदार बैंक को पैसे लौटाकर अपनी संपत्ति बचा सकता है, तो उसे ऐसा करने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन, वैल्यूएशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। कोर्ट ने विभिन्न मामलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाने पर चिंता जताई।

कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब नेशनल बैंक और एशियन होटल्स को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े लोन माफ करने और जनता के पैसे की धोखाधड़ी के लिए होटल की वैल्यूएशन जानबूझकर कम की गई।

यह मामला सार्वजनिक धन की सुरक्षा और आईबीसी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रक्रियाओं में कोई दोहरा मापदंड नहीं बरता जाना चाहिए। आगे की सुनवाई में सरकार और बैंकों के जवाब के आधार पर फैसला होगा। यह कॉरपोरेट कर्ज माफी और संपत्ति नीलामी में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

(PO)