कोयला घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. मनमोहन को दी बड़ी राहत Wikimedia commons
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कोयला घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. मनमोहन सिंह को दी बड़ी राहत

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला घोटाला गड़बड़ी में न्यायालय से मिली बड़ी राहत. सुप्रीम कोर्ट ने अब जाकर उनके खिलाफ 2015 में जारी की गई समन आदेश को रद्द करने का फैसला लिया है. यह निर्णय सीबीआई द्वारा मनमोहन सिंह को क्लीन चिट देने के बाद लिया गया. वहीं, शीर्ष अदालत ने मनमोहन सिंह को उनके निधन के बाद बड़ी कानूनी राहत दी है.

Author : न्यूज़ग्राम डेस्क

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को कोयला घोटाला गड़बड़ी में न्यायालय से मिली बड़ी राहत. सुप्रीम कोर्ट ने अब जाकर उनके खिलाफ 2015 में जारी की गई समन आदेश को रद्द करने का फैसला लिया है. यह निर्णय सीबीआई द्वारा मनमोहन सिंह को क्लीन चिट देने के बाद लिया गया. वहीं, शीर्ष अदालत ने मनमोहन सिंह को उनके निधन के बाद बड़ी कानूनी राहत दी है.

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणी एवं फैसला

डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की स्पेशल कोर्ट ने 2015 में एक समन जारी किया था. समन कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले का था. इस समन को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार यानी 29 जुलाई को रद्द करने का फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत का कहना है कि सीबीआई की जांच के बाद इस बात की पुष्टि हो चुकी हैं, कि कोयला घोटाला गड़बड़ी में डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) का कोई हाथ नहीं है, और सीबीआई पहले ही उनको क्लीन चिट दे चुकी है, ऐसे में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के पास कोई उपयुक्त कारण नहीं है, जिससे कोर्ट उनको आरोपी घोषित कर सके.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से दाखिल की गयी याचिका को मंजूरी दी. वहीं, शीर्ष अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए उनके खिलाफ जारी सारी कार्रवाई खत्म करने का आदेश सुनाया।

कानूनी तर्क एवं रक्षा पक्ष

सुनवाई के समय वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत के सामने अपना तर्क रखते हुए कहा- डॉ. मनमोहन सिंह (Dr.Manmohan Singh) का निधन 27 दिसंबर 2024 को हो चूका है, और उनके निधन के बाद यह मामला अपने आप कानूनी तौर पर खत्म हो सकता था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की छवि और गरिमा पर इसका असर हमेशा देखने को मिलता। इस कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की, कि डॉ.मनमोहन के खिलाफ सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जो नकारात्मक बातें कहीं, उन सभी बातों को कोर्ट के रिकॉर्ड से हटाया जाये। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील सिब्बल के तर्क से सहमति जाहिर की.

मामले का पृष्ठभूमि (Background)

कोयला ब्लॉक आवंटन मामला उड़ीसा में स्थित तलबीरा- II और III में 2005 का हैं. इस घटना के समय डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) प्रधानमंत्री का पदभार संभाल रहे थे, और इसके साथ कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी भी उनके पास ही थी. केंद्र सरकार ने कोयला ब्लॉक के लिए तलबीरा की लोकल कंपनी 'हिंडालको' (Hindalco) को नियुक्त किया गया था.

2012 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सामने आयी, जिसने कोयला ब्लॉक आवंटन गड़बड़ी को देश के सामने उजागर किया। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कोयला ब्लॉक आवंटन के समय नियमो में लापरवाई हुई जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. इसी क्रम में मामले की पूरी जांच सीबीआई को सौपी गई.

वहीं, सीबीआई ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की और इसमें डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कुछ नहीं पाया. लेकिन सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज कर डॉ.मनमोहन के खिलाफ 2015 में समन जारी किया. इस समन को डॉ. मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, इसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को सुनवाई करते हुए सीबीआई जांच को सही माना और क्लोजर रिपोर्ट पर मोहर लगाते हुए डॉ.मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) के खिलाफ जारी कार्यवाई खत्म करने का फैसला लिया। (VR)

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