सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन जब इसी प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आए, तो चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हाल ही में इंस्टाग्राम (Instagram) पर कथित तौर पर चाइल्ड एब्यूज (Child Abuse) से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों की खबर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए मेटा (Meta) के अधिकारियों को तलब किया है। यह मामला सिर्फ एक कंपनी की जवाबदेही का नहीं, बल्कि करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स, खासकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से भी जुड़ा है। पूरा मामला क्या है, सरकार ने क्या कार्रवाई की है, मेटा (Meta) ने इस पर क्या जवाब दिया है और आगे क्या हो सकता है, आइये जानते है|
हाल ही में इंस्टाग्राम (Instagram) पर कथित तौर पर ऐसे विज्ञापनों की मौजूदगी की खबर सामने आई, जिनका संबंध Child Sexual Abuse Material (CSAM) से बताया गया। यह मामला सामने आते ही केंद्र सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया और मेटा (Meta) से जवाब मांगते हुए उसके अधिकारियों को तलब किया। इस घटना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा व्यवस्था, विज्ञापनों की निगरानी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे पहले समझते हैं की CSAM क्या होता है? आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा कोई भी फोटो, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट होता है जिसमें किसी बच्चे का यौन शोषण, उत्पीड़न या उससे जुड़ा आपत्तिजनक सामग्री दिखाई या साझा की जाती है। ऐसे कंटेंट का बनाना, रखना, देखना, साझा करना या उसका प्रचार करना भारत सहित दुनिया के लगभग सभी देशों में गंभीर अपराध माना जाता है। भारत में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं, जिनके तहत इस तरह की सामग्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। यही वजह है कि जब इंस्टाग्राम (Instagram) पर ऐसे कथित विज्ञापनों की बात सामने आई, तो सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। यह मामला केवल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि बड़ी टेक कंपनियां बच्चों की सुरक्षा और अवैध कंटेंट को रोकने की अपनी जिम्मेदारी कितनी प्रभावी ढंग से निभा रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Union IT Minister Ashwini Vaishnav) ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद मंत्रालय ने मेटा के अधिकारियों को तलब कर पूरे मामले पर जवाब मांगा। सरकार यह जानना चाहती है कि Instagram पर ऐसे कथित विज्ञापन कैसे दिखाई दिए, उन्हें रोकने के लिए कंपनी के पास क्या सुरक्षा व्यवस्था है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। वहीं मेटा ने अपने शुरुआती बयान में कहा कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा किसी भी तरह का कंटेंट उसकी नीतियों के खिलाफ है और ऐसे विज्ञापनों या अकाउंट्स को हटाने के लिए सख्त कार्रवाई की जाती है। कंपनी का दावा है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम और विशेषज्ञ टीमों की मदद से आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने तथा बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है।
भारत में लागू IT Rules के तहत सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध और आपत्तिजनक कंटेंट की निगरानी करें तथा शिकायत मिलने पर तय समय के भीतर उसे हटाने की कार्रवाई करें। खासकर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को रोकने और हटाने के मामले में सरकार का रुख बेहद सख्त है। ऐसे मामलों में कंपनियों से पारदर्शिता, त्वरित कार्रवाई और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की उम्मीद की जाती है। Instagram से जुड़े इस विवाद के बाद आम यूजर्स पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में विज्ञापनों की जांच और कंटेंट मॉडरेशन पहले से अधिक सख्त हो सकता है, संदिग्ध अकाउंट्स पर तेजी से कार्रवाई की जा सकती है और सुरक्षा फीचर्स को भी मजबूत बनाया जा सकता है। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ने की संभावना है, ताकि प्लेटफॉर्म पर बच्चों और अन्य यूजर्स के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल सुनिश्चित किया जा सके। [SP]