मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मोहन भागवत के मुसलमानों की उत्पत्ति संबंधी बयान का समर्थन करते हुए रमजान सहूलियत, धर्मांतरण कानून और महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण खत्म करने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी।  IANS
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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आरएसएस प्रमुख के बयान का किया समर्थन

ऑल इंडिया मुस्लिम जमीयत के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्‍होंने कहा है कि मुसलमान अरब से नहीं आए हैं।

Author : IANS

ऑल इंडिया मुस्लिम जमीयत के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्‍होंने कहा है कि मुसलमान अरब से नहीं आए हैं। वहीं, शहाबुद्दीन रजवी ने तेलंगाना में रमजान पर मुस्लिम कर्मचारियों को दी गई सहूलियत का स्वागत किया।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत में जो हिंदू, बौद्ध, दलित और आदिवासी समुदाय के लोग थे, उनके साथ इतिहास में नाइंसाफी हुई। जब मुस्लिम शासक भारत आए और उन्होंने इंसाफ के आधार पर फैसले लिए और इंसानों को इंसानियत का दर्जा दिया और उन पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई। इसके बाद कई लोगों ने इस्लाम धर्म को अपनाया और उसके दायरे में आए। यह ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत में रहने वाले मुसलमानों के पूर्वज पहले हिंदू ही थे, जिन्होंने इस्लाम कबूल किया, जबकि अरब से केवल कुछ लोग ही भारत आए थे।

‘घर वापसी’ के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनके मत में यह भी धर्मांतरण की श्रेणी में आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में धर्मांतरण को लेकर कानून बन चुका है और यदि कोई व्यक्ति दबाव, प्रलोभन या लालच के जरिए धर्म परिवर्तन कराता है तो वह कानून की गिरफ्त में आएगा। उन्होंने कहा कि संविधान भी स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी पर दबाव डालकर या लालच देकर उसका मजहब नहीं बदला जा सकता।

उत्तर प्रदेश के संभल और हरियाणा के नूंह में पंचायतों द्वारा लिए गए हालिया फैसलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि संभल की पंचायत ने निर्णय लिया है कि शादी से पहले लड़की और लड़का एक-दूसरे का मोबाइल नंबर साझा नहीं करेंगे और न ही आपस में मिलेंगे-जुलेंगे। इसी तरह का फैसला हरियाणा के नूंह में भी लिया गया है, जिसमें शादियों में डीजे और नाच-गाने पर रोक की बात कही गई है।

उन्होंने बताया कि ये फैसले स्थानीय उलेमा और जिम्मेदार लोगों द्वारा समाज सुधार के उद्देश्य से लिए गए हैं। उनका कहना था कि आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनसे समाज की बदनामी होती है, इसलिए हर इलाके में इस तरह के निर्णयों पर विचार होना चाहिए। युवाओं को सही शिक्षा मिले और शरीयत के मुताबिक शादी हो। इस्लाम ने शादी को बहुत आसान बनाया है, लेकिन मुसलमानों ने इसे खुद मुश्किल बना लिया है। इसलिए समाज में सुधार की दिशा में पहल जरूरी है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को दी गई सहूलियत का स्वागत करते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि यह उनका हक है। उन्होंने कहा कि रोजेदार कर्मचारियों को शाम चार बजे तक काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि उसके बाद इफ्तार और नमाज का समय शुरू हो जाता है। उन्होंने तेलंगाना सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि पूरे देश में इस तरह की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि रोजा रखने वाले कर्मचारियों को सहूलियत मिल सके।

महाराष्ट्र में मुसलमानों को दिए जा रहे आरक्षण को खत्म किए जाने के फैसले पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का यह निर्णय गलत है। मौलाना रजवी ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें पहले ही बताया गया था कि मुसलमानों की आर्थिक स्थिति कई मामलों में दलितों से भी अधिक कमजोर है। महाराष्ट्र में दिया जा रहा कोटा मजहबी आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर था। ऐसे में इस कोटे को खत्म करना मुसलमानों की कमर तोड़ने के बराबर है। उन्होंने सरकार से पुनर्विचार की मांग की।

(MK)