SC/ST एक्ट का किस्सा  X
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'टीम में लो वरना SC/ST एक्ट से करूंगा शिकायत...', पूर्व छात्र नेता रौनक खत्री ने सुनाया खौफनाक किस्सा

साल 1989 में SC/ST एक्ट (अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) लागू किया गया। इसका मकसद था कि SC/ST समुदाय के लोगों को जातिगत हिंसा, भेदभाव, अपमान और शोषण से कानूनी सुरक्षा मिले।

Author : Mayank Kumar
Reviewed By : Ritik Singh

  • UGC का नया Equity नियम दुरुपयोग के खतरे को लेकर विवाद में

  • रौनक खत्री का दावा: नियम/कानून से दबाव बनाने के उदाहरण

  • जनरल कैटेगरी की चिंता: झूठी शिकायतों से सुरक्षा का अभाव

क्रिकेट में कहते हैं, रिकॉर्ड्स बनते ही हैं टूटने के लिए, तो वहीं, क़ानूनी जगत में यह मजाक चलता है कि नियम बनते ही हैं टूटने के लिए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अधिकारी दिनरात मेहनत करके नियम कानून बनाते हैं और अपराधियों को इसे तोड़ने में जरा भी समय नहीं लगता है। वो कोई ना कोई जुगाड़ निकाल ही लेते हैं कि कैसे भी करके सिस्टम को चमका दिया जाए।

भारत में मौजूदा हालात भी कुछ ऐसे ही प्रतीत होते हैं। UGC ने एक नियम बनाया है, जिसमे हर कॉलेज/यूनिवर्सिटी में “Equity Committee” बनेगी ताकि SC/ST/OBC आदि के साथ भेदभाव रोका जाए और समान अवसर सुनिश्चित हों। हालांकि, इस नियम के उपयोग कम दुरूपयोग होने के आसार ज्यादा दिख रहे हैं। इसका एक उदहारण रौनक खत्री ने सुनाया है, जो पूर्व में DU छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं।

पूर्व DU छात्रसंघ अध्यक्ष ने सुनाया किस्सा

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। ये वीडियो रौनक खत्री का है, जो पूर्व में DU छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। देश में जब UGC का मुद्दा गरमाया हुआ है, तो उन्होंने एक किस्सा सुनाया और उनकी इस बात से यह प्रतीत होता है कि UGC जो नियम बना रही है, उसके दुरूपयोग के आसार ज्यादा हैं।

IANS न्यूज एजेंसी को दिए एक बयान में रौनक एक घटना के बारे में बताते हुए कहते हैं, "मुझे एक घटना याद आती है, एक छात्र मेरे पास आया और कहता है कि मैं कॉलेज की क्रिकेट की टीम में एडमिशन लेना चाहता हूँ, लेकिन मैंने कहा कि ये मेरिट के आधार पर होता है, तो वो बोलता है कि आप छात्र नेता हो आप करा सकते हो। जब मैंने मना किया, तो उसने कहा कि मुझे क्रिकेट टीम में लो, नहीं तो आपके ऊपर SC/ST एक्ट लगा दूंगा।"

उन्होंने आगे कहा, "अगर ये चीज मेरे साथ हो सकती है, तो ये किसी भी सवर्ण समुदाय के लोगों के साथ भी हो सकती है। किसी शिक्षक के साथ भी हो सकती है। अगर आप SC/ST/OBC के हितों की बात करते हैं, तो जनरल वालों के भी हितों की बात करें।"

क्या है SC/ST एक्ट?

साल 1989 में SC/ST एक्ट (अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) लागू किया गया। इसका मकसद था कि SC/ST समुदाय के लोगों को जातिगत हिंसा, भेदभाव, अपमान और शोषण से कानूनी सुरक्षा मिले। इस जाति के खिलाफ अगर अपराध होता है, तो सख्त सजा हो और तुरंत FIR दर्ज भी किया जाए। इसमें जमानत के नियम काफी कड़े होते हैं। ये तो इसके फायदे थे लेकिन इसके नुकसान यह देखने को मिले कि कुछ लोग इसमें झूठे केस लगाने लगे और फर्जी शिकायत करने लगे। ऐसा ही एक किस्सा 2018 में देखने को मिला।

डॉक्टर सुभाष काशीनाथ महाजन पर एक दलित कर्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि महाजन ने कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए मंजूरी देकर SC/ST एक्ट का उल्लंघन किया है। महाजन ने इस FIR को रद्द करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उस समय महाजन महाराष्ट्र के तकनीकी शिक्षा विभाग में डायरेक्टर थे।

इसके बाद 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन मुख्य दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए, जिसमे तुरंत गिरफ्तारी पर रोक, FIR दर्ज करने से पहले जाँच, आरोपी आम नागरिक है, तो जिले के SSP की अनुमति लेनी होगी जबकि आरोपी सरकारी कर्मचारी है, तो उसकी गिरफ्तारी के लिए उसके विभाग के उच्च अधिकारी की अनुमति जरूरी रहेगी।

वहीं, अग्रिम जमानत पर कोर्ट ने कहा था कि इसमें जो पूर्ण प्रतिबंध था, उसे उन मामलों में हटाया जा सकता है जहाँ पहली नज़र में कोई मामला नहीं बनता।

UGC का नया नियम क्या है?

13 जनवरी 2026 को UGC ने एक नया नियम लागू किया। इसका नाम है - 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026'. UGC के नए नियम के मुताबिक इससे SC/ST और OBC वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोका जाएगा।

इसके लिए सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में 24x7 हेल्पलाइन, Equal Opportunity Centre, Equity Squads और Equity Committee का गठन करना होगा। इस नियम के जरिये UGC सबपर निगरानी रखेगा। अगर कोई भी संस्थान इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। कॉलेज की मान्यता रद्द या फंड तक रोका जा सकता है।

हालांकि, इसी नियम से सवर्ण समाज जो जनरल कैटेगरी में आते हैं, ये वर्ग काफी नाराज है। उनका कहना है कि इस नए नियम का उनके खिलाफ ग़लत उपयोग किया जा सकता है। इससे सवर्ण छात्रों के लिए भविष्य में एक खतरा बन सकता है।

सवर्ण छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसमें झूठी शिकायतों का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में उनके ऊपर कभी भी झूठी शिकायते दर्ज करवाकर उन्हें फंसाया जा सकता है। इस नियम में भेदभाव की परिभाषा स्पष्ट नहीं है। यह नया नियम एकतरफा है और इसका दुरूपयोग ज्यादा हो सकता है।