एक ऐसा दौर था (वर्ष 2006 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा रिकॉर्ड तोड़ सीटों से चुनाव जीती थी ) जहां वाम मोर्चा (Marxist) सत्ताधारी पार्टी थी और अन्य पार्टियाँ जैसे भाजपा,कांग्रेस या कोई छोटे क्षेत्रीय पार्टियों का कोई वजूद नहीं था l आज की मौजूदा स्थिति बिलकुल विपरीत है, वाम मोर्चा का बंगाल में लगभग वर्चस्व समाप्त हो चुका है l जब से साल 2011 के बंगाल चुनाव (Bengal Elections) में आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) ने अपनीजीत का परचम लहराया है तब से ही वाम मोर्चा एक दम सिमट गई है l अब सत्ता में ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की सरकार है, कांग्रेस और वामपंथ का जमानत जब्त हो गया है l भाजपा अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए धीरे-धीरे अपने आप को बंगाल की जनता के बीच स्थापित कर रही है l
वामपंथियों नेअपनी हार को स्वीकार किया है और यह भी साफ़ कहा है कि “हमें सत्ता का लोभ नहीं है और न ही हम कुर्सी की खातिर चुनाव लड़ते हैं l हमारा मुख्य लक्ष्य समाज के गरीब, मजदूर और किसान वर्ग के हक़ की आवाज़ को जनता के बीच रखना और उनकी भलाई के लिए काम करना है l हाल ही में जो SIR प्रक्रिया की शुरुआत पश्चिम बंगाल में हुई है, इस से वाम मोर्चा को एक उम्मीद की किरण नजर आई है और उन्हें लग रहा है कि बड़ी संख्या में तो नहीं कम से कम 2-4 सीट पर फिर से उनकी वापसी हो सकती है l ऐसे में अगर ऐसा होता है, तो ये मोदी सरकार के लिए एक सिरदर्दी की बात हो सकती है।
पश्चिम बंगाल में वामपंथ पर एक नजर:
एक समय में पश्चिम बंगाल सहित समूचे पूर्वोत्तर (North-East) में वामपंथियों का राज था l हर जगह एक ही बोल चाल था “लाल सलाम” साथी l वामपंथी विचारधारा (Marxist ideology) बंगाल में आजादी के पहले से ही अंकुरित हो चुका था l कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (Communist Party of India) ने समाज के पिछड़े तबके के लोगों और ख़ास तौर पर छात्रों (students), मजदूरों (labours) और किसानों (farmers) को अपने पार्टी में प्राथमिकता दी l ऐसे कर के वामपंथ मजदूर संघों (labour unions) के बीच काफी लोकप्रिय हो गया और लोग उसमे बड़ी तादाद में जुड़ने लगे l साल 1960 के आसपास CPI से अलग हो कर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया-मार्क्सिस्ट CPI -M (Communist Party of India-Marxist) बना l
सब कोई देश के लिए लड़ रहा था लेकिन वामपंथी गरीब और मजदूरों के हक़ की लड़ाई लड़ रहे थे l एक समय ऐसा आया कि ये हक़ की लड़ाई एक आन्दोलन का रूप ले लिया और बाद में धीरे धीरे हिंसक होने लगा l साल 1967 में नक्सल्बारी आन्दोलन (Naxalbari Movement) ने बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया l साल 1977 से 2011 तक वाम मोर्चा सत्ता में रही l इस दौर में बंगाल ने एक नया इतिहास लिखा l 1977 के चुनाव में भारतीय मार्क्सवादी विचारक, कम्युनिस्ट कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ ज्योति बसु (Jyoti Basu) बंगाल के छठे मुख्यमंत्री के रूप के शपथ लिया और बंगाल में एक नई शासन का दौर शुरू हुआ l 1977 से 2000 तक बंगाल के मुख्यमंत्री रहे l भरत में सबसे लम्बे समय के लिए मुख्यमंत्री रहने की श्रेणी में बसु तीसरे स्थान पर हैं l
भारत में सबसे लम्बे समय के लिए मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग (Pawan Kumar Chamling) के नाम है जो कि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (Sikkim Democratic Front) के नेता थे l सिक्किम में 24 साल 165 दिन तक (12 दिसम्बर 1994 से 26 मई 2019) CM का पद संभाला, और दूसरे स्थान पर ओड़िसा (Orissa) के नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) हैं जो बीजू जनता दल (Biju Janata Dal) के नेता हैं l 5 मार्च 2000 से 12 जून 2024 तक लगातार 24 साल 99 दिन तक ओड़िसा का CM पद संभाला l
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