राम मंदिर चोरी मामले में एसआईटी (SIT) ने अपर मुख्य सचिव गृह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें ट्रस्ट से जुड़े कई करीबियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, उससे जुड़े बैंकों की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। X
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राम मंदिर विवाद: दान का पैसा कहां और कितना खर्च हुआ? चंपत राय ने जानकारी देने से किया इनकार

राम मंदिर चोरी मामले में एसआईटी (SIT) ने अपर मुख्य सचिव गृह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें ट्रस्ट से जुड़े कई करीबियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

Author : Pradeep Yadav

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक चंपत राय ने ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, उससे जुड़े बैंकों की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। हालांकि रिपोर्ट में बहुत सारी बातों के शामिल होने की खबर बताई जा रही है।

SIT ने सौंपी रिपोर्ट, राम मंदिर चोरी में कौन कितना दोषी?

SIT ने राम मंदिर चंदा चोरी से संबंधित जांच रिपोर्ट 5 जून 2026 को अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रिपोर्ट में बहुत सारी बातें सामने निकलकर आने वाली हैं। वहीं 23 जून 2026 को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने अपर जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी को पत्र लिखकर बताया कि चंपत राय से जब जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मंदिर से जुड़े बैंकों, खर्च आदि के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया।

चंपत राय का कहना है कि SIT जांच के बीच में किसी भी प्रकार से आधी-अधूरी जानकारी किसी को नहीं दी जा सकती है। हालांकि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि कौन कितना दोषी है, लेकिन आरएसएस के कार्यकर्ता जो राम मंदिर से चिपके रहते थे उनके ऊपर भयंकर धब्बा लग चुका है।

रिपोर्ट में है चौंकाने वाली खबर

SIT की रिपोर्ट में चौंकाने वाली खबर सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल ट्रस्ट पर ही नहीं बल्कि उससे जुड़े बैंकों, उनके कर्मचारियों के ऊपर, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पुलिस कर्मियों के ऊपर सवाल खड़े किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक राम मंदिर में चोरी की पूरी घटना को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है। इस पूरे मामले में सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है। पैसा गिनने वाली टीम से लेकर बाहर के पहरेदारों तक एक व्यवस्थित सप्लाई चेन के माध्यम से इस घटना को अंजाम दिया गया है।

इस पूरी घटना में जिन लोगों के नाम सामने निकलकर आ रहे हैं उनमें ज्यादातर लोग आरएसएस से जुड़े रहे हैं। चंपत राय स्वयं आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं। अनिल मिश्रा भी आरएसएस के लंबे समय तक प्रचारक रहे हैं। गोपाल राव भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं।

घटना में कितने लोग आरएसएस से जुड़े हैं ?

इस पूरी घटना में जिन लोगों के नाम सामने निकलकर आ रहे हैं उनमें ज्यादातर लोग आरएसएस से जुड़े रहे हैं। चंपत राय स्वयं आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं। बता दें कि चंपत राय ने आरएसएस के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी। संघ का प्रचार करते हुए वो साल 1975 में पूर्णकालिक संघ प्रचारक बने।

वहीं इस घटना में अनिल मिश्रा का नाम भी सामने निकलकर आ रहा है। बता दें कि अनिल मिश्रा भी आरएसएस के लंबे समय तक प्रचारक रहे हैं। साल 2017-2020 तक अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह रहे हैं। वहीं गोपाल राव भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। मंदिर में चोरी के बाद से पूरे संगठन पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि इस मामले पर कोर्ट का निर्णय आना बाकी है।

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