नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हुई तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। महज एक घंटे की बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे चिंताजनक हालात नोएडा के सेक्टर-105 में देखने को मिले, जहां ओवरफ्लो हो रहे नाले और पानी में डूबे बिजली के ट्रांसफार्मरों के कारण बड़े हादसे का खतरा मंडराने लगा है।
वहीं, ग्रेटर नोएडा में खुले मैनहोल में 10 वर्षीय बच्चे के गिरने की घटना ने प्राधिकरण की लापरवाही को उजागर कर दिया। जानकारी के अनुसार, सेक्टर-105 स्थित सीएनजी पेट्रोल पंप के सामने से गुजरने वाले मुख्य नाले का जलस्तर क्षमता से अधिक होने के कारण नाला पूरी तरह ओवरफ्लो हो गया। इसके चलते नाले का दूषित पानी सेक्टर की आंतरिक नालियों और सड़कों पर वापस आने लगा, जिससे पूरे इलाके में जलभराव की स्थिति बन गई। हालात तब और गंभीर हो गए जब एटीएस हेमलेट का बारिश का पानी भी तेज गति से सेक्टर-105 के नाले में पहुंचने लगा।
इससे ग्रीन बेल्ट और आसपास की कॉलोनियों में पानी भर गया। सबसे अधिक चिंता का विषय ग्रीन बेल्ट में स्थापित बिजली के मुख्य ट्रांसफार्मरों के आसपास जमा हुआ पानी है। ट्रांसफार्मरों से जुड़ी भूमिगत बिजली की केबलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पानी नहीं निकाला गया तो केबलों के क्षतिग्रस्त होने, शॉर्ट सर्किट और पानी में करंट फैलने जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं, जिससे जनहानि का भी खतरा बना हुआ है।
सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी प्रकार के जलभराव के कारण भूमिगत बिजली केबलें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिसके चलते पूरे सेक्टर में लगभग 48 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस बार भी समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। आरडब्ल्यूए ने नोएडा प्राधिकरण और विद्युत विभाग से तत्काल पंप लगाकर पानी निकालने, नाले के बैकफ्लो को रोकने तथा बिजली के ढांचे को सुरक्षित करने की मांग की है।
इधर, सेक्टर-62 स्थित लेबर चौक से गाजियाबाद को जोड़ने वाली सड़क पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर गंदा और दूषित पानी भर जाने से स्कूटी चालकों और राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई वाहन पानी में बंद हो गए, जिससे लंबा जाम लग गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि दूषित पानी के कारण संक्रामक और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
बता दें कि नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने पहले ही जलभराव की स्थिति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में हालात नहीं सुधरे। वहीं, ग्रेटर नोएडा में भी बारिश के बीच प्राधिकरण की लापरवाही सामने आई। सड़क किनारे खुले पड़े गटर में एक 10 वर्षीय मासूम अचानक गिर गया।
बच्चे की मां की चीख-पुकार सुनकर मौके से गुजर रहे एआरटीओ राजेश मोहन और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए गटर में उतरकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते रेस्क्यू होने से एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने खुले मैनहोल और गटरों को लेकर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बारिश के बाद सामने आई इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मानसून से निपटने की तैयारियां अभी भी अपर्याप्त हैं। स्थानीय निवासी अब मांग कर रहे हैं कि जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, खुले मैनहोल तत्काल बंद किए जाएं और संवेदनशील इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात की जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)